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आप नहीं जानते होंगे करौंदे के ये हैरान कर देने वाले फायदे

संजीवनी टुडे 17-09-2020 15:10:00

करौंदे का कच्चा फल कड़वा खट्टा और स्वादिष्ट होता है। यह एक छोटा-सा फल है पर इसमें काफ़ी औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसमें कई सामान्य बीमारियों को नष्ट करने की अद्भुत क्षमता होती है।


डेस्क। करौंदे का कच्चा फल कड़वा, खट्टा और स्वादिष्ट होता है। यह एक छोटा-सा फल है, पर इसमें काफ़ी औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसमें कई सामान्य बीमारियों को नष्ट करने की अद्भुत क्षमता होती है। उपचार के आधार से इसमें साइट्रिक एसिड और विटामिन सी समुचित मात्रा में पाया जाता है। इसके फल, पत्तियों एवं जड़ की छाल औषधीय प्रयोग में लाई जाती है। करौदें के फल पकने के बाद काले पड़ जाते हैं। इस कारण इसको कृष्णपाक फल भी कहते हैं। 

Gooseberry

 करौदें के फायदे 

-सूखी खांसी में एक चम्मच करौंदे के पत्ते का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से फ़ायदा होता है। 

-करौंदा का औषधीय गुण करौंदे का पका फल प्रकृति से अम्लीय, तिक्त, गर्म, गुरु, वात को कम करने वाला, खाने में रूची बढ़ाने वाले, कफ को बढ़ाने वाला, और प्यास को बढ़ाने वाला होता है। इसके अलावा यह मधुर, पाचक, पित्त को कम करने वाला होता है।

Gooseberry

-करौंदे का पका फल प्रकृति से अम्लीय, तिक्त, गर्म, गुरु, वात को कम करने वाला, खाने में रूची बढ़ाने वाले, कफ को बढ़ाने वाला, और प्यास को बढ़ाने वाला होता है। इसके अलावा यह मधुर, पाचक, पित्त को कम करने वाला होता है।

-जानवरों के कीड़े युक्त घावों में करौंदे की जड़ को पीसकर भर देने से कीड़े नष्ट होकर घाव शीघ्र भर जाते हैं। 

-अगर किसी बीमारी के वजह से आपको हद से ज्यादा प्यास लगती है तो पके फल से बने 1-2 ग्राम चूर्ण का सेवन करने से पित्त एवं कफ विकृति, अतिपिपासा, खाने की रूची तथा अरुचि में लाभ होता है।

Gooseberry

-करौंदे के पके फल अथवा जड़ को पीसकर लगाने से पामा, खुजली तथा दाह आदि त्वचा विकारों से आराम मिलता है। इसके अलावा करौंदे की मूल को अश्व मूत्र, नींबू रस तथा कपूर के साथ पीसकर लगाने से कण्डु या खुजली दूर होती है।

-करोंदे का फल अम्लीय, कड़वा, जलन को कम करने वाला तथा विषनाशक होता है। इसकी जड़ कृमिनाशक होती है। करौंदे के जड़ की छाल प्रकृति से कड़वी और गर्म होती है। यह कफ और वात को कम करने वाली, खांसी कम करने में सहायक, ज्यादा मूत्र होने की समस्या तथा सामान्य दूर्बलता को दूर करने में मदद करती है।

-जलोदर के रोगी को करौंदे के पत्तों का रस पहले दिन 5 मिली, दूसरे दिन 10 मिली, इस तरह प्रतिदिन 5-5 मिली बढ़ाते हुए 50 मिली तक सेवन करें तथा पुन: घटाते हुए 5 मिली तक प्रयोग करें। इस प्रकार रोज सुबह पिलाने से जलोदर में लाभ होता है।

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