संजीवनी टुडे

अब मोरिंगा की पत्तिया दिलाएंगी TB मरीजों को कुपोषण से राहत

संजीवनी टुडे 25-03-2019 08:55:25


डेस्क। गांव में पाया जाने वाला वृक्ष सहजन जिसका वैज्ञानिक नाम मोरिंगा ओलीफेरा है। इसका उपयोग सब्जियों में होता है। अब इस वृक्ष पत्तियां  टीबी के कारण कुपोषित हुए मरीजों को नई ताकत देंगी। आमतौर पर सहजन में सबसे ज्यादा उपयोग लोग फल का करते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक फल से ज्यादा पौष्टिक पदार्थ सहजन की पत्तियों में मिला है। इसकी पत्तियों में संतरे से सात गुना विटामिन, दूध से चार गुना कैल्शियम, अंडे से 36 गुना मैग्निशियम, पालक से 24 गुना आयरन, केले से तीन गुना अधिक पोटैशियम मिलता है। इसके पत्ते में एंटी ऑक्सीडेंट के गुर भी मिले हैं। 

इसके औषधीय गुणों को लेकर बंगलुरू के डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी और हैदराबाद स्थित आर्डिनेंस फैक्ट्री के डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल इंजीनियरिंग के तीन विशेषज्ञों ने इस पर दो साल रिसर्च की। उनका शोध अंतर्राष्ट्रीय जर्नल साईंस डाईरेक्ट में प्रकाशित हुआ। इसके अलावा गुजरात के भावनगर स्थित आरके कालेज ऑफ फार्मेसी के प्रो. तेजस गनात्रा की अगुआई में पांच विशेषज्ञों की टीम ने शोध किया। यह शोध इंटरनेशनल जर्नल ऑफ फार्मेसी में प्रकाशित हुआ। इस शोध के परिणाम चौंकाने वाले मिले। सहजन के पेड़ की फली, फूल, पत्ती, छाल तीन सौ से ज्यादा बीमारियों से बचाव करती है। इसकी पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे-धीरे कम होने लगता है। मध्य प्रदेश सरकार ने कुपोषण दूर करने में सहजन की पत्तियों का प्रयोग किया।

गोरखपुर में शुरू हुआ ट्रॉयल: सहजन की पत्तियों के पौष्टिक गुरों को देखते हुए टीबी मरीजों के पोषण में इसका उपयोग करने का फैसला किया। स्वयं सेवी संस्था सेवा मार्ग और अक्षय योजना ने इस प्रस्ताव को जिला टीबी फोरम में रखा। फोरम से हरी झंडी मिलने के बाद 12 मरीजों का कुपोषण खत्म करने के लिए ट्रॉयल के तौर पर उन्हें सहजन की पत्तियों का चूरा दिया जा रहा है। 

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घर पर तैयार करते हैं चूरा
सेवा मार्ग के निदेशक और न्यूट्रिशियन डॉ. हरिकृष्णा ने बताया कि टीबी मरीजों के इलाज में सबसे बड़ी बाधा कुपोषण होती है। सहजन के पत्ते में मौजूद पोषक तत्व कुपोषण को दूर करने में सहायक होंगे। इस पौधे की पत्तियों का उपयोग क्षय रोग(टीबी) के इलाज में हो सकता है। इसको देखते हुए टीबी मरीजों को प्रेरित किया जा रहा है। ज्यादातर मरीजों के घर के पास ही सहजन के पौधे हैं। वह पत्तियों को तोडकर घर लाते हैं। उन्हें उबले पानी से धुलकर, सुखाकर चूरा बना लेते हैं। यह ट्रॉयल एक महीने से चल रहा है। इसके परिणाम भी सकारात्मक मिले हैं। 

मोरिंगा के नुकसान

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गर्भवती महिलाएं सहजन के पत्ते, जड़, छाल और फूलों को गर्भावस्था के दौरान इस्तेमाल करने से बचें। 
संवेदनशील पेट वाले लोग इसकी सब्जी खाने से बचें। 
प्रसव के कुछ हफ्ते बाद ही इसका प्रयोग करना चाहिए। 
पीरियड्स के दौरान मोरिंगा का सेवन पित्त को बढ़ाता है।  इसलिए इस दौरान इसका सेवन करने से बचें। 
जिन लोगों को ब्लीडिंग डिसऑर्डर की समस्या है, वो भी इसे ना लें। 

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