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COVID-19 का इलाज: दो भारतीय फार्मा कंपनियां बना सकेगी कोरोना की दवा, संक्रमितों पर 5 दिन में दिखेगा असर

संजीवनी टुडे 13-05-2020 15:16:52

इस दवा ने अपना क्लीनिकल ट्रायल इसी महीने पूरा किया है।


नई दिल्ली। जल्द ही दो भारतीय फार्मा कंपनियां कोरोना के इलाज में मददगार रेमडेसिविर दवा बेचेंगी। सिपला और जुबिलैंट लाइफ साइंसेज ने रेमडेसिविर बेचने के लिए अमेरिकी दवा कंपनी के साथ लाइसेंसिंग एग्रीमेंट किया है। इसके बाद दोनों कंपनियां भारत समेत दुनिया के 127 देशों में यह दवा बेच सकेंगी। 

यह दोनों भारतीय कंपनियां दवा का उत्पादन करने के साथ ही अपने ब्रांड का इस्तेमाल भी कर सकेंगी। यह डील भारत और 127 अन्य गरीब, कम और मध्यम कमाई वाले देशों के लिए है, जहां यह कंपनी दवा बेच सकती है। ईटी ने 5 मई को जानकारी दी थी कि गिलीड साइंसेज जुबिलंट लाइफ के अलावा कई भारतीय कंपनियों के साथ लाइसेंस की डील करने की कवायद में जुटी थी।

Remedisivir

रेमडेसिविर दवा ने अपना क्लीनिकल ट्रायल इसी महीने पूरा किया है। इसके बाद अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने इसे कोरोना मरीजों पर इस्तेमाल की मंजूरी दी है। सिपला और जुबिलिएंट लाइफ सांइसेस दोनों ने ही अमेरिकी कंपनी से करार होने की पुष्टि है। रेमडेसिविर एक जेनेरिक दवा है, ऐसे में इसकी कीमत भी ज्यादा नहीं है। हालांकि दोनों कंपनियों को पेटेंट रखने वाली अमेरिकी कंपनी को तय रकम देनी होगी।

जुबि‍लंट लाइफ साइंसेज के चेयरमैन श्याम भरतिया और एमडी हरि एस भरतिया ने अपने बयान में कहा, "हम क्लिनिकल परीक्षण और नियामकीय मंजूरी पर करीब से नजर रखने वाले हैं और तमाम अनुमतियां हासिल करने के बाद जल्द ही दवा को भारत में लॉन्च करेंगे।"

Remedisivir

उन्होंने कहा कि इस दवा का हम घरेलू उत्पादन करने का विचार कर रहे हैं ताकि लागत को कम किया जा सके और इसकी नियमित उपलब्धता बनी रहे। जुबिलंट को गिलीड सांइस द्वारा तकनीकी मदद भी दी जाएगी, ताकि नियामकीय मंजूरी के बाद उत्पादन की क्षमता और रफ्तार बढ़ाई जा सके।

रेमडेसिविर के इस्तेमाल से साइड इफेक्ट कम-
रेमेडेसिविर के इस्तेमाल पर कोरोना संक्रमितों में जल्द सुधार देखने को मिला है। इंडियन कांउसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने भी इस दवा को संक्रमितों के इलाज में कारगर बताया है। इस दवा के इस्तेमाल से साइड इफेक्ट कम होते हैं। 

Remedisivir

बता दें कि मौजूदा समय में भारत संक्रमितों के इलाज के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल कर रहा है। इस दवा के कई साइड इफेक्ट हैं। डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीजों पर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल करने से उनमें दूसरी स्वास्थ्य समस्या पैदा होने का डर रहता है।

क्लीनिकल ट्रायल में 50 फीसदी मरीजों को मिला फायदा-
अमेरिकी दवा कंपनी गिलियड साइंसेस के मुताबिक, आम तौर पर कोरोना मरीजों में 10 दिन के इलाज के बाद सुधार देखने को मिलता है। हालांकि, रेमडेसिविर के क्लीनिकल ट्रायल के दौरान 5 दिन तक इस दवा कोर्स लेने वाले रोगियों की स्थिति में सुधार पाया गया। 50% मरीजों की हालत में रेमडेसिविर की वजह सुधार देखा गया। यह दवा किसी टेबलेट फॉर्म में नहीं बल्कि लिक्विड फॉर्म में होती है, जिसे नसों के जरिए मरीज के शरीर में इंजेक्ट किया जाता है।

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गौरतलब है कि कोरोना वायरस के इलाज के लिए दुनियाभर की नजरें रेमडेसिविर पर हैं। अप्रैल में इसे अमेरिकी दवा नियामक ने हरी झंडी दिखा दी थी और इसके बाद यह पहली दवा बन गई जिसे इस महामारी के लिए आधिकारिक रूप से इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस दवा के चलते सामान्य रूप से कोरोना संक्रमित लोगों की रिकवरी टाइम 10 दिनों से घटकर 5 दिन ही रह गया था। ईटी को मिली जानकारी के अनुसार, गिलीड साइंसेज भारत की अन्य कंपनियों के साथ इसी तरह की डील करने पर विचार कर रही है। 

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Source: Sanjeevnitoday.com

 

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