संजीवनी टुडे

ऑर्थराइटिस स्टेज-4 का बेहतरीन इलाज टोटल नी रिप्लेसमेंट

संजीवनी टुडे 12-07-2020 14:27:42

भारत में आर्थराइटिस से पीडि़त मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। यह बीमारी खासकर ऑफिस जाने वाले लोगों में ज्यादा देखी जाती है।


जयपुर। भारत में आर्थराइटिस से पीडि़त मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। यह बीमारी खासकर ऑफिस जाने वाले लोगों में ज्यादा देखी जाती है। वे अक्सर जोड़ों के दर्द, सूजन या अकडऩ की समस्या से परेशान रहते हैं। इस बीमारी के कारण हड्डियां कमजोर हो जाती है जिससे फ्रेक्चर का खतरा बढ़ जाता है।

पुरुषों की तुलना में महिलाओं में खतरा ज्यादा --
सीनियर जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. एसएस सोनी ने बताया कि सामान्य तौर पर यह समस्या मोटापा, एक्सरसाइज में कमी, चोट आदि से संबंधित है। इस समस्या का खतरा पुरुषों की तुलना में महिलाओं में तीन गुना ज्यादा होता है, जिसके बाद उन्हें जॉइंट रिप्लेसमेंट कराना पड़ता है। ऑर्थराइटिस जब स्टेज 4 पर पहुंच जाती है तो यह एक गंभीर समस्या बन जाती है। इसमें घुटनों के मरीजों को चलते वक्त या मूवमेंट के दौरान तीव्र दर्द और असहजता महसूस होती है। ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि उनकी हड्डियों के बीच मौजूद कार्टिलेज पूरी तरह से घिस जाते हैं जिसके बाद हड्डिया आपस में टकराती हैं और मरीज को तीव्र दर्द होता है।

शुरूआत में दवाओं से इलाज की कोशिश --
डॉ एसएस सोनी ने बताया कि, स्टेज 4 वाले मरीजों की हालत गंभीर हो जाती है, जिसके बाद उन्हें हाथ-पैर हिलाने में भी तकलीफ होती है। सामान्यत: शुरूआती निदान के साथ, मरीजों को किसी खास इलाज की जरूरत नहीं पड़ती है। इस दौरान समस्या को केवल एक्सरसाइज और फिजिकल थेरेपी से ठीक किया जाता सकता है। इस प्रकार की थेरेपी में किसी भी प्रकार के मेडिकेशन की आवश्यकता नहीं होती है। एक्सरसाइज से लाभ न मिलने पर मेडिकेशन की सलाह दी जाती है। सदि समस्या ज्यादा है तो डॉक्टर सप्लीमेंट्स के अलावा ओटीसी पेन किलर दवाइयां और पेन रिलीफ थेरेपी की सलाह दे सकते हैं। सामान्यतौर पर स्टेज 3 की स्थिति में मरीज मेडिकेशन की मदद से ठीक हो सकता है। 

गंभीर होने पर रिप्लेसमेंट सर्जरी एकमात्र उपाय --
जोड़ों की समस्या जब गंभीर रूप ले लेती है, तो ऐसे में डॉक्टर के पास सर्जरी के अलावा कोई भी विकल्प नहीं बचता है। डॉ. सोनी ने बताया कि टोटल नी रिप्लेसमेंट, ऑर्थराइटिस की समस्या के इलाज के सबसे लोकप्रिय विकल्प माने जाते हैं। इनकी जरूरत तभी पड़ती है, जब तीनों कंपार्टमेंट प्रभावित हो चुके हों। इसमें खराब जोड़ों को निकालकर उनकी जगह पर कृत्रिम जोड़े लगा दिये जाते हैं। कृत्रिम जोड़े प्लास्टिक या मेटल से बने होते हैं जो बिल्कुल प्राकृतिक जोड़ों की तरह काम करते हैं। इस प्रक्रिया के बाद मरीज को रिकवर होने में कुछ हफ्तों का समय लग सकता है। 

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