संजीवनी टुडे

तनाव दूर करने के साथ ही किसानों के लिए फायदेमंद है ये पौधा

संजीवनी टुडे 12-07-2019 12:47:46

त्वचा रोग, मतली, दर्द से छुटकारा, तनाव में फायदेमंद पुदीना की जाति का पचौली ऊसर जमीन हो या अन्य खराब जमीन, उसमें भी आसानी से खेती कर किसान एक लाख रुपये से अधिक प्रति हेक्टेयर शुद्ध लाभ कमा सकते हैं।


लखनऊ। त्वचा रोग, मतली, दर्द से छुटकारा, तनाव में फायदेमंद पुदीना की जाति का पचौली ऊसर जमीन हो या अन्य खराब जमीन, उसमें भी आसानी से खेती कर किसान एक लाख रुपये से अधिक प्रति हेक्टेयर शुद्ध लाभ कमा सकते हैं। इसके तेल का उपयोग मिठाईयों में भी किया जाता है। यदि खेत में अन्य फसलों की खेती करने में किसान असफल हैं तो जुलाई से सितंबर माह के बीच इसकी रोपाई करनी चाहिए। इसके तेल की बिक्री हर जगह संभव है। इसके साथ ही शाक की भी बिक्री बाजारों में आराम से हो जाती है।

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मूल रुप से फिलीपिंस के इस पौधे को 1942 में टाटा आयल मिल्स ने भारत में प्रस्तुत किया था। यहां इसकी खेती अधिकांश प्रदेशों में हाेती है। पत्तियों में सुंगधित तेल पाये जाने वाले इस पादप की खेती यूपी में देवीपाटन, बुंदेलखंड, लखनऊ, कानपुर आदि जिलों में बहुतायत होती है। इसकी खेती के लिए किसानों को जल निकास का समुचित ध्यान देना चाहिए। भुरभुरी भूमि बनाकर इसके पौधों का रोपण करना चाहिए।

शाकीय तने के अग्रभाग का बनाएं कटिंग
देवीपाटन मंडल के उप निदेशक उद्यान अनीस श्रीवास्तव ने  बताया कि कटिंग के जरिए शाकीय तने के अग्रभाग की 10 से 12 सेमी लम्बी चार से छह पत्तियों व तीन से चार गांठों वाली कटिंग उपयुक्त होती है। इसकी कटिंग मानसून के शुरुआती दौर में बनाना उपयुक्त होता है। उन्होंने कहा कि 30 से 35 दिन पुरानी कटिंग को जुलाई से सितंबर माह में 50-50 सेमी की दूरी पर रोपाई करना उपयुक्त होता है।

बिक्री में नहीं आती परेशानी
औषधीय उत्पाद के खरीद करने वाले दीलिप राय ने बताया कि पचौली के उत्पाद की बिक्री में कोई दिक्कत नहीं है। इसकी बिक्री स्थानीय बाजारों में भी हो जाती है। इसके अलावा कंपनियों के बिचौलिए भी खेत में जाकर ही किसानों से उत्पाद खरीद लेते हैं। उत्पाद के भाव तो हर वर्ष घटते-बढ़ते रहते हैं। इस कारण फायदा का अनुमान सही ढंग से नहीं लगाया जा सकता।

अच्छी उपज के लिए जैविक खाद डालें
अनीस श्रीवास्तव ने बताया कि अच्छा उत्पाद पाने के लिए 10-15 टन सड़ी गोबर की खाद या सात टन के लगभग वर्मी कंपोस्ट, 145 : 50:50 नत्रजन, फास्फोरस तथा पोटाश प्रति हेक्टेयर डालना चाहिए। इससे पौधा अच्छा तैयार होता है। नत्रजन चार बार डालना उपयुक्त होता है। पहली सिंचाई रोपाई के तुरंत बाद करनी चाहिए।

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60 किग्रा प्रति हेक्टेयर निकल जाता है तेल
अनीस श्रीवास्तव ने बताया कि इसकी पहली कटाई पौध रोपण के चार से पांच माह बाद, निचली पत्तियों के हल्की पीली होने करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 150 से 200 कुतंल प्रति हेक्टेयर इसका हरा शाकीय भाग का उत्पादन हो जाता है। इसे सुखाने पर 30 कुतंल और तेल लगभग 60 किग्रा प्रति हेक्टेयर निकल जाता है। इसकी खेती में लगभग 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर व्यय होता है, जबकि आय डेढ़ लाख हो जाती है अर्थात शुद्ध लाभ एक लाख रुपये तक होता है।

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