संजीवनी टुडे

... तो इसलिए आते है रात में सपने ,जानिए

संजीवनी टुडे 09-06-2019 11:01:48

मानव मस्तिष्क ग्रे पदार्थ की रहस्यमय छोटी गेंद है। नींद में सोते समय मस्तिष्क में ऐसा क्या होता है जो सपनों की दुनिया में ले जाता है? इन सवालों पर कई रिसर्च्स की गई हैं। हालांकि इन सवालों के कोई पुख़्ता जवाब नहीं मिले हैं ।


डेस्क। मानव मस्तिष्क ग्रे पदार्थ की रहस्यमय छोटी गेंद है। नींद में सोते समय मस्तिष्क में ऐसा क्या होता है जो सपनों की दुनिया में ले जाता है? इन सवालों पर कई रिसर्च्स की गई हैं। हालांकि इन सवालों के कोई पुख़्ता जवाब नहीं मिले हैं।लेकिन शोधों के आधार पर सपनों के बारे में कई तथ्य सामने आए हैं। मानव मस्तिष्क ग्रे पदार्थ की रहस्यमय छोटी गेंद है। सपने मन की एक विशेष अवस्था होते हैं, जिसमें वास्तविकता का आभास होता है। स्वप्न न तो जागृत अवस्था में आते हैं न तो निद्रा में बल्कि यह दोनों के बीच की तुरीयावस्था में आते हैं।

क्यों आते हैं सपने?

-यूं तो सपने क्यों आते हैं? इसका कोई पुख़्ता जवाब नहीं मिल पाया है, लेकिन रिसर्च के आधार पर जो कारण सामने आए हैं, वे ये हो सकते हैं

- पूरे दिन ख़ुद के साथ घटित हुई बातों  व घटनाओं का पुनर्परीक्षण करने के लिए सपने आते हैं। 

-कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि सपने इसलिए आते हैं, ताकि शरीर आराम कर सके। 

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-जब आप बेहद तनाव में होते हैं, तब सपने आते हैं।

-कुछ छिपी इच्छाएं या भावनाएं, जो पूरी न हो सकी हों या पूरी न हो पा रही हों। 

-सपनों का हम पर कितना प्रभाव पड़ता है?

- ज्यादातर सपने मन के विचार से या बीमारियों से पैदा होते हैं।

- कुछ सपने चेतावनी स्वरूप या सूचना स्वरूप होते हैं और यही स्वप्न दरअसल महत्वपूर्ण होते हैं। 

- ये सपने भविष्य के प्रति आपको आगाह करते हैं और शुभ-अशुभ घटनाओं को बताते हैं। 

- भोर में या अचानक दिखने वाले सपने आम तौर पर सत्य होते हैं।

- इस प्रकार के सपने वर्तमान या भविष्य पर कोई प्रभाव नहीं डालते या न्यूनतम प्रभाव डालते हैं।

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सपने का सच

-हर व्यक्ति सपने देखता है. फिर चाहे वो पुरुष हो, स्त्री हो या बच्चा. फ़र्क़ इतना है कि कुछ लोगों को सपने याद रह जाते हैं और कुछ को नहीं। 

-नींद के लगभग 2 घंटे सपने देखने में जाते हैं। 

- हर व्यक्ति रात में 3 से 6 सपने देखता है, जिनमें से एकाध सपना ही याद रह जाता है। 

-नींद से जागने के बाद 95 फ़ीसदी लोगों को उनके सपने याद नहीं रहते हैं।

-सपने कुछ सीखने में मदद करते हैं और याद्दाश्त को मज़बूत बनाते हैं। 

-महिला और पुरुष के सपनों में फ़र्क़ होता है. दोनों अलग-अलग तरह के सपने देखते हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाएं परिवार व अपने बच्चों से जुड़े सपने ज़्यादा देखती हैं। 

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 रैपिड आई मूवमेंट और नॉन रैपिड आई मूवमेंट के दौरान देखे गए सपनों में फ़र्क़ होता है। 

- नींद में हर 90 मिनट पर एक सपना आता है. हर सपना पिछलेवाले से बड़ा होता है। एक्सपर्ट्स की माने तो रात का पहला सपना 5 मिनट लंबा होता है, जबकि आख़िरी सपना लगभग 45 मिनट से 1 घंटे का होता है। 

-एक रिसर्च के मुताबिक़, एक इंसान अपने पूरे जीवनकाल में तक़रीबन 100000 से ज़्यादा सपने देखता है या यह भी कह सकते हैं कि जीवन के 6 साल वो सपने देखने में बिताता है। 

- नेत्रहीन लोगों को देख पानेवाले लोगों के मुक़ाबले ज़्यादा सपने आते हैं। 

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