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खर्राटे हो सकते हैं खतरनाक, जल्द अपनाएं ये तरीके

संजीवनी टुडे 25-08-2019 13:58:21

हर व्यक्ति सोते वक्त खर्राटे लेता है। फर्क केवल इतना होता है कि किसी के खर्राटे की आवाज तेज होती है और किसी के खर्राटे के आवाज बहुत कम होती है। अक्सर कई लोग अपनी अच्छी नींद नहीं ले पाते है। इसकी वजह होती है उनके पार्टनर के खर्राटे, जो उन्हे हर रात परेशान करते है।


डेस्क। आपने  कई लोगो को नींद में खर्राटे लेते हुए देखा होगा, हालांकि हर व्यक्ति सोते वक्त खर्राटे लेता है। फर्क केवल इतना होता है कि किसी के खर्राटे की आवाज तेज होती है और किसी के खर्राटे के आवाज बहुत कम होती है। अक्सर कई लोग अपनी अच्छी नींद नहीं ले पाते है। इसकी वजह होती है उनके पार्टनर के खर्राटे, जो उन्हे हर रात परेशान करते है। जब कोई किसी से कहता है कि तुम बहुत खर्राटे लेते हो तो अधिकतर की पहली प्रतिक्रिया इसे नकारने की होती है। आंकड़ों की मानें तो 45 प्रतिशत लोग कभी-कभी खर्राटे लेते हैं, जबकि 25 प्रतिशत लोग नियमित रूप से ऐसा करते हैं। खर्राटे एक कर्कश आवाज है, जो संकेत है कि व्यक्ति को सोते समय सांस लेने में परेशानी हो रही है। आमतौर पर इसे सामान्य मान लिया जाता है। लंबे समय तक इसकी अनदेखी न सिर्फ खर्राटे लेने वाले की नींद व उसकी गुणवत्ता पर असर डालती है।

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इसलिए खर्राटे हैं खतरा 

-कई अध्ययनों के अनुसार जिन्हें खर्राटे आते हैं, उनकी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।

-लंबे समय तक खर्राटे लेने वालों में उच्च रक्तचाप, रात में सीने में दर्द होना, ध्यान केंद्रित न कर पाना, हृदय की धडक़न असामान्य होना, रक्त में शर्करा को नियंत्रित न रख पाना या फेफड़ों के क्षतिग्रस्त होने की आशंका अधिक होती है।

-खर्राटों के कारण कैरोटिड धमनियों की दीवार मोटी हो जाती है। इन धमनियों का कुछ भाग गले के बहुत पास होता है और खर्राटों के कारण होने वाले कंपन का प्रभाव इन पर पड़ता है। धमनियों के मोटा होने से स्ट्रोक और धमनियों के कड़ा होने का खतरा बढ़ जाता है। ये दोनों स्थितियां हृदय को प्रभावित करती हैं। वसा के जमा होने से गले की धमनियां संकरी हो जाती है, जो स्ट्रोक की आशंका को बढ़ाती हैं।

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इन्हें अपना कर देखें

-रात में सोने और सुबह उठने का एक समय निर्धारित करें। तरल पदार्थों का सेवन अधिक करें।

-सोने वाले कमरे में पर्याप्त नमी रखें। सूखी हवाएं नाक व गले की मांसपेशियों में जलन करती हैं।

-गले में खराश हो तो नमक के पानी से गरारे करें। नाक बंद रहती है तो नेजल स्प्रे भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

-खर्राटे की समस्या यदि गंभीर नहीं है तो जीवनशैली में कुछ बदलाव लाकर इसे कम किया जा सकता है।

-अपना वजन कम करें। सक्रिय रहें। सोने से तुरंत पहले धूम्रपान, एल्कोहल व भारी भोजन से बचें। नींद की गोलियों से बचें। पीठ के बल सीधे लेटने की जगह करवट लेकर सोएं।

साइनस की समस्या में लहसुन का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है। लहसुन में हीलिंग-क्वालिटी होती है।ये ब्लॉकेज साफ करने के साथ ही श्वसन-तंत्र को भी बेहतर बनाती है। अच्छी और चैन की नींद के लिए लहसुन का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद है। 

-जब भी मौका मिले कोई गीत गुनगुना लें इससे तालू और गले की मांसपेशियों पर नियंत्रण बढ़ता है।
व्यायाम भी है कारगर 

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-जीभ के अग्रभाग को दांतों से सटा लें। फिर जीभ को पीछे की ओर खींचे। ऐसा एक मिनट तक करेंए दिन में कम से कम तीन बार करें।

-अंग्रेजी के अक्षरों ए.ई.आई.ओ.यू को तीन मिनट तक जोर-जोर से बोलें ऐसा दिन में कई बार करें।

गोवर्मेन्ट एप्रूव्ड प्लाट व फार्महाउस मात्र रु. 2600/- वर्गगज, टोंक रोड (NH-12) जयपुर में 9314166166  

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