संजीवनी टुडे

शनिवार को इस विधि विधान से करें शनि की पूजा, होंगे हर संकट दूर

संजीवनी टुडे 25-05-2019 07:53:27


डेस्क। हिन्दू धर्म में शनि की पूजा के लिए शनिवार का दिन बहुत ही शुभ माना जाता हैं। हिन्दू धर्म  में भगवान शनिदेव को दंडाधिकारी माना जाता हैं। बुरे कर्मों के लिए इंसान शनिदेव के दंड का पात्र होता है, शनिदेव हर एक बुरे काम का फल मनुष्य को ज़रूर देते हैं। जो गलती जानकर की गई उसके लिए भी और जो अंजाने में हुई, इसलिए इसे शनिदेव की क्रूरता कहना गलत है। श्री शनिदेव की पूजा क्यों और कब करें? हां, शनिदेव को प्रसन्न कर आप अपनी परेशानियां कम अवश्य कर सकते हैं।    आइये जानें शनिदेव से जुड़ी अहम बातें और कैसे करें शनिदेव की पूजा। 

जानिए शनिदेव के बारे में यह विशेष जानकारी, 

1. शुद्ध स्नान करके पुरुष पूजा कर सकते हैं।

2. महिला शनि चबूतरे पर नहीं जाएं। मंदिर हो तो स्पर्श न करें।

3. अगर आपकी राशि में शनि आ रहा है तो शनि को अवश्य पूजें।

4. अगर आप साढ़ेसाती से ग्रस्त हो तो शनिदेव का पूजन करें।

5. यदि आपकी राशि का अढैया चल रहा हो तो भी शनि देव की आराधना करें।

6. यदि आप शनि दृष्टि से त्रस्त एवं पीड़ित हो तो शनिदेव की अर्चना करें।

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7. यदि आप कारखाना, लोहे से संबद्ध उद्योग, ट्रेवल, ट्रक, ट्रांसपोर्ट, तेल, पे‍ट्रोलियम, मेडिकल, प्रेस, कोर्ट-कचहरी से संबंधित हो तो आपको शनिदेव मनाना चाहिए।

8. यदि आप कोई भी अच्‍छा कार्य करते हो तो शनि देव की कृपा के लिए प्रार्थना करें।

9. यदि आपका पेशा वाणिज्य, कारोबार है और उसमें क्षति, घाटा, परेशानियां आ रही हों तो शनि की पूजा करें।

10. अगर आप असाध्य रोग कैंसर, एड्स, कुष्ठरोग, किडनी, लकवा, साइटिका, हृदयरोग, मधुमेह, खाज-खुजली जैसे त्वचा रोग से त्रस्त तथा पीड़ित हो तो आप श्री शनिदेव का पूजन-अभिषेक अवश्य कीजिए।

11. सिर से टोपी आदि निकालकर ही दर्शन करें।

12. जिस भक्त के घर में प्रसूति सूतक या रजोदर्शन हो, वह दर्शन नहीं करता।

शनिदेव पूजन 

शनिवार को शनिदेव का दिन कहा जाता है। इसलिए उन्हें प्रसन्न करने के लिए शनिवार को व्रत पूजन किया जाता है। यूँ तो आप वर्ष के किसी भी शनिवार के दिन आप इस व्रत की शुरुआत कर सकते है। लेकिन श्रावण मास में शनिवार का व्रत प्रारंभ करना मंगलकारी होता है। 

– इस व्रत को करने के लिए मनुष्य का पवित्र होना अनिवार्य है। इसके लिए सबसे पहले प्रातः ब्रह्म मुहूर्त ने स्नान करना चाहिए।

– व्रत के दिन शनिदेव की प्रतिमा की विधिपूर्वक पूजन करना चाहिए।

– इस दिन शनि देव को लाजवंती का फूल, तिल, तेल, गुड़ आदि अर्पण करना चाहिए।

– शनिवार के दिन शनि देव के नाम का तेल का दीपक जलाना चाहिए।

– इसके बाद अपने द्वारा किये गए पापकर्म और जाने अनजाने में किये गए अपराधों के लिए क्षमा मांगे।

– शनि देव की पूजा करने के बाद राहु-केतु की भी पूजा करनी चाहिए।

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– शनिवार के दिन मंदिर में जाकर पीपल के पेड़ का दिया जलाना चाहिए और उसमे जल भी देना चाहिए।

– पीपल के जल देने के बाद उसकी सूत्र बांधकर सात बार परिक्रमा भी करनी चाहिए।

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