संजीवनी टुडे

ई – सिगरेट प्रतिबंध के प्रवर्तन पर मीडिया कार्यशाला का आयोजन

संजीवनी टुडे 15-06-2019 20:51:58

तंबाकू नियंत्रण नीतियों को मजबूत करने के साथ राजस्थान को "तंबाकू मुक्त राज्य" बनाने के उद्देश्य से कार्य कर रहा एक गैर-लाभकारी संगठन है।


जयपुर। तंबाकू में पाये जाने वाले 500 टोक्सिन्स, 7000 रसायन तथा 14 प्रकार के कैंसर फैलाने वाले 70 रसायन मनुष्य में  आवेगशील व्यावहारिक परिवर्तन लाते हैं जिससे मनुष्य की कार्यक्षमता में नकारात्मक प्रभाव पड़ता है पिंक सिटी प्रेस  क्लब में शनिवार को वाग्धारा द्वारा आयोजित एक मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला में बोलते हुए डॉ राकेश गुप्ता ने ये बात कही। वाग्धारा संस्था राज्य में तंबाकू के उपयोग को कम करने के लिए राज्य सरकार सहित विभिन्न हितधारकों को शामिल कर  तंबाकू नियंत्रण नीतियों को मजबूत करने के साथ राजस्थान को "तंबाकू मुक्त राज्य" बनाने के  उद्देश्य से कार्य कर रहा  एक गैर-लाभकारी संगठन है। 

वाग्धारा द्वारा मार्च 2017 में ई - सिगरैट पर प्रतिबंध लगाने की एक मुहिम शुरू की थी जिसकी परिणति विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत के इस पर प्रतिबंध की घोषणा से हुई। इस क्रम में आज वाग्धारा द्वारा  प्रैस क्लब में एक मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया । इस अवसर पर डॉ राकेश गुप्ता ने बताया कि ई - सिगरेट में पायी जाने वाली निकोटिन में पाये जाने वाले प्रिज़रवेटिव फेफड़ों मैं गहरे उतर कर पॉप कॉर्न लंग बना देते हैं जिसका कोई इलाज नहीं है। ई – सिगरेट  के सेवन से गर्भवती माँ के शिशु के मस्तिष्क को प्रभावित कर उसे विकसित होने से रोकती है । 25 वर्ष तक मस्तिष्क का विकास होता है पर यदि कोई ई – सिगरेट का सेवन करता है तो उस व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता बहुत प्रभावित होती है। ई सिगरेट या किसी भी तंबाकू उत्पाद का उपभोग व्यक्ति की कार्यक्षमत को प्रभावित कर उसके जीवन में बड़ी मुश्किलें पैदा कर सकती हैं इसलिए किसी भी व्यक्ति को इनके सेवन से बचना चाहिए । इस अवसर पर संयुक्त निदेशक , प्रचार पुलिस मुख्यालय, श्री गोविंद पारीक ने मीडिया के रोल पर अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि 42 प्रतिशत हिन्दी फिल्मों में नायक को धूम्रपान या किसी भी अन्य प्रकार का तंबाकू सेवन करते हुए दिखाया जाता है जिसे देश का युवा वर्ग अनुसरण कर खुद भी तंबाकू का सेवन करने लग जाता है। उन्होने ये भी कहा कि पूरे देश में 1,14,000 छोटे , माध्यम तथा बड़े समाचार पत्र पंजीकृत हैं।

समाचार पत्र किसी भी विषय पर जनमानस की राय को बदलने की क्षमता रखते हैं। यदि ये सभी समाचार पत्र सप्ताह में एक बार भी तंबाकू के खतरों से जनता को अवगत करा उनका तंबाकू विरोधी मानस बनाने में  सफल हो जाते हैं तो देश में धीरे – धीरे  तंबाकू उपभोग को नगण्य किया जा सकता है। नागरिक प्रगति मंच के अध्यक्ष तथा सर्वोदय कार्यकर्ता श्री सवाई सिंह जी कहा कि ई – सिगरेट  पर प्रतिबंध एक अच्छा कदम है परंतु जब तक अन्य तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध नहीं लगता या उनका प्रचालन नहीं रुकता तब तक युवाओं को अन्य प्रकार के नशे की लत लगती रहेगी।  ई सिगरेट पर लगाए गए प्रतिबंध के प्रवर्तन पर बोलते हुए औषधि नियंत्रक अजय फाटक ने सभी को आश्वस्त करते हुए कहा कि ई – सिगरेट  पर प्रतिबंध का प्रवर्तन यथा संभव जारी रहेगा। इस संबंध में सभी अधिकारियों को यथोचित निर्देश जारी कर दिये गए हैं। उन्होने मीडिया से भी आग्रह किया कि किसी भी सूचना प्रपट होने पर वे विभाग को तुरंत सूचित करें , इस पर तुरंत कार्यवाही की जावेगी। सवाई मान सिंह अस्पताल के कोटपा नोडल ऑफिसर डॉ. सुरेश सिंह ने कहा कि “ सबसे सस्ती चीज़ खाने का सबसे महँगा इलाज” यानि 4-5 रू। में बिकने वाली तंबाकू के खाने से होने वाली बीमारी कैंसर का 4- 5 लाख रु में सबसे महँगा इलाज होता है।

राज्य में  कोटपा के क्रियान्वयन में कई खामियां  हैं। अस्पताल के मुख्य द्वार पर किसी भी समय 10 -12 गाडियाँ तंबाकू बेचते किसी भी वक्त नज़र आ जाती हैं।  कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन वाग्धारा के मैनेजर एडवोकेसी, राजेश हिरन द्वारा किया गया। वाग्धारा सचिव जयेश जोशी ने अपने वक्तव्य में मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ,राजस्थान सरकार, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्रालय तथा चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा को राज्य में ई– सिगरेट  पर प्रतिबंध लगाने का एक प्रभावी आदेश जारी करने पर  आभार प्रकट कर धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होने सरकार से ये भी निवेदन किया कि तंबाकू उत्पादों की बिक्री को लाईसेंस के दायरे में लाया जाए।

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