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अगर आप भी रखते हैं पिछली जेंब में पर्स तो हो जाए सावधान, वरना बहुत बुरा हो सकता हैं इसका अंजाम

संजीवनी टुडे 23-01-2020 10:07:55

ज्यादातर लोग वॉलेट को अपने पीछे के पॉकेट में रखते हैं। एक सर्वे के मुताबिक कार्ड पैसों से भरा वॉलेट बैक पॉकेट में रखना बेहद खतरनाक होता है और इससे पायरी फोर्मिस सिंड्रोम नामक बीमारी हो सकती है।


डेस्क। ये तो आप सब जानते ही है की पर्स रखने के लिए हर कोई पॉकेट का इस्तेमाल करता है  अक्सर कई लोगो का मानना हैं की जिसका पर्स जितना ज्यादा मोटा होगा, उसका रूतबा भी उतना ही बड़ा होगा।  लेकिन क्या आप जानते हैं कि पैंट की पिछली जेब में रखे इस पर्स से कितनी गंभीर परेशानियों को बुलावा दे रहे हैं? 

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ज्यादातर लोग वॉलेट को अपने पीछे के पॉकेट में रखते हैं। एक सर्वे के मुताबिक कार्ड, पैसों से भरा वॉलेट बैक पॉकेट में रखना बेहद खतरनाक होता है और इससे पायरी फोर्मिस सिंड्रोम नामक बीमारी हो सकती है। इस बीमारी में साइटिका की नस दब जाती है। इस बीमारी में मरीज को काफी तेज दर्द होता है। दरअसल ज्यादातर लोगों की आदत होती है कि पर्स को बैक पॉकेट में रखकर लोग घंटों ऑफिस में या फिर कही भी बैठे रहते है।

डॉक्टरों के अनुसार पिछली जेब में आराम फरमा रहा पर्स हमारे शरीर को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकता है। पिछली जेब में रखा हुआ भारी-भरकम पर्स आपके हिप ज्वाइंट और कमर के निचले हिस्से में दर्द पैदा करता है।

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कूल्हे में एक नस होती है, जिस साइटिका कहते हैं। जब पिछली जेब में पर्स रखकर हम ज्यादा देर तक बैठते हैं, तो साइटिका दब जाती है। इसके दबने से हिप ज्वाइंट और कमर के निचले हिस्से में दर्द शुरू होता है, जो बढ़ते-बढ़ते पंजे तक पहुंच जाता है। इस आम भाषा में पैर का सुन्न हो जाना या पैर का सो जाना कहते हैं। लेकिन साइंस की भाषा में इस शूटिंग पेन कहा जाता है।

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पिछली जेब में मोटा पर्स रखने की वजह से कूल्हा एक तरफ झुका रहता है, जिसकी वजह से रीढ़ की हड्डी पर और ज्यादा दबाव पड़ता है। सीधे बैठने के बजाय कमर के निचले हिस्से में इंद्रधनुष जैसा आकार बन जाता है। पर्स जितना ज्यादा मोटा होगा, शरीर उतना ज्यादा एक तरफ झुकेगा और उतना ही ज्यादा दर्द होगा। मोटा पर्स रखने से रीढ़ की हड्डी में टेढ़ापन आ सकता है।

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इस तरह की सबसे ज्यादा समस्या कोचिंग स्टूडेंट्स को होती है, क्योंकि वह पिछली जेब में पर्स डालकर 8-8 घंटे तक क्लासेज में बैठे रहते हैं। घंटों तक ऐसे ही बैठे रहने से हिप ज्वाइंट्स में मौजूद पिरिफॉर्म मसल्स पर भी दबाव पड़ता है। पीछे की पॉकेट में पर्स रखकर लगातार बैठने से इन नसों पर काफी दबाव पड़ता है, जिससे कई बार ब्लड सर्कुलेशन रुक जाता है। ऐसी स्थिति लंबे समय तक अगर बनी रहती है तो इससे नसों में सूजन भी बढ़ सकती है। कुल मिलाकर यह संदेश उन लोगों के लिए है जो अगर ऐसा करते है तो वह अपनी इस आदत को जल्द से जल्द बदल डालें। 

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