संजीवनी टुडे

जानिएं, क्या आपकाे पता हैं 11 से 15 साल के 93 प्रतिशत बच्चे नही ले पाते नींद

संजीवनी टुडे 21-03-2018 13:18:33

डेस्क। नींद की कमी के कारण सभी लाेग परेशान रहते हैं। चाहे वयस्क हाे या छाेटे छाेटे बच्चें नींद नही आने पर चिढ़चिढ़े रहने लगते हैं। 5 साल से लेकर 11 साल की उम्र के बच्चाें काे नींद नही आने का कारण पढ़ाई का बोझ, पढ़ाई को लेकर माता-पिता का प्रेशर, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, गैजट्स का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल जैसे कई और कारण हैं।  

एक शाेध के मुताबिक कहा गया हैं कि जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते जाते हैं उनमें नींद की कमी बढ़ती जाती है। इस स्टडी के मुताबिक 11-12 साल के बीच के 84-87 प्रतिशत बच्चे नींद की कमी से जूझ रहे हैं जबकि 13-15 साल के 91-93 प्रतिशत बच्चों को नींद नहीं आती है।

एक शाेध में सरकारी स्कूलों के 11 से 15 साल के बीच के 501 स्टूडेंट्स को शामिल किया गया था। इसके मुताबिक जो बच्चे एक सप्ताह में 58 घंटे और 10 मिनट से कम सोते थे यानी एक रात में साढ़े 8 घंटे से कम की नींद लेते थे उन्हें नींद से वंचित माना गया।

एक स्टडी के मुताबिक किशोरावस्था यानी 13-15 साल के बीच के बच्चे और किशोरावस्था से पहले यानी 11-13 साल के सिर्फ एक तिहाई बच्चे ही ऐसे हैं जो नींद आने पर सोने चले जाते हैं। लेकिन कुछ बच्चे या तो अपनी पढ़ाई पूरी करने की वजह से देर से सोते हैं या फिर इस वजह से उनके माता-पिता और भाई-बहन जगे हुए हैं या फिर वे टीवी देखने में व्यस्त रहते हैं।
 

WATCH VIDEO

शाेध के मुताबिक देर से सोने की वजह से बच्चे सुबह देर से उठते हैं और समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाते जिससे उनके शैक्षणिक प्रदर्शन पर भी असर पड़ता है। साथ ही समय पर सोने का बच्चे के मूड से भी गहरा संबंध है। देर से सोने वाले बच्चों में डिप्रेशन अधिक मात्रा में होता है।

Rochak News Web

More From lifestyle

Trending Now
Recommended