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आखिर क्यों लगाते हैं माथे पर तिलक, जानिए इसके पीछे की रोचक दास्ता

संजीवनी टुडे 25-01-2020 11:26:03

अक्सर तिलक को आमतौर पर किसी भी पूजा के बाद माथे पर लगाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार तिलक हमेशा दोनों भौहों के बीच आज्ञाचक्र पर लगाया जाता है। चंदन या कुमकुम का तिलक लगाना शुभ माना गया है। इसके अलावा तिलक हल्दी-कुमकुम का भी अच्छा माना जाता है। पुरुष को माथे पर चंदन और महिला को कुमकुम लगाना चाहिए।


डेस्क। हिन्दू आध्यात्म की असली पहचान तिलक से होती है। मान्यता है कि तिलक लगाने से समाज में मस्तिष्क हमेशा गर्व से ऊंचा होता है। सनातन धर्म में आदि काल से माथे पर तिलक लगाने की प्रथा चली आ रही है, अक्सर तिलक को आमतौर पर किसी भी पूजा के बाद माथे पर लगाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार तिलक हमेशा दोनों भौहों के बीच आज्ञाचक्र पर लगाया जाता है। चंदन या कुमकुम का तिलक लगाना शुभ माना गया है। इसके अलावा तिलक हल्दी-कुमकुम का भी अच्छा माना जाता है। पुरुष को माथे पर चंदन और महिला को कुमकुम लगाना चाहिए। कहते हैं कि तिलक के बिना तीर्थ स्नान, जप कर्म, दान कर्म, यज्ञ, होमादि, पितर के लिए श्राद्ध कर्म और देवों की पूजा-अर्चना ये सभी कर्म निष्फल हो जाते हैं। कई लोग ऐसा सोचते हैं कि तिलक क्यों लगाया जाता है? किस अंगुली से तिलक लगाने के क्या लाभ बताए गए हैं। साथ ही इसके पीछे के वैज्ञानिक कारण क्या हैं? आज हम इस बारे में जानते हैं।

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Tilak on the forehead

मान्यताओं के अनुसार सूने मस्तक को शुभ नहीं माना जाता। माथे पर चंदन, रोली, कुमकुम, सिंदूर या भस्म का तिलक लगाया जाता है। तिलक हिंदू संस्कृति में एक पहचान चिन्ह का काम करता है। तिलक लगाने की केवल धार्मिक मान्यता नहीं है बल्कि इसके कई वैज्ञानिक कारण भी हैं।

मान्यता के अनुसार तिलक लगाने से एक तो स्वभाव में सुधार आता हैं व देखने वाले पर सात्विक प्रभाव पड़ता हैं। तिलक जिस भी पदार्थ का लगाया जाता हैं उस पदार्थ की ज़रूरत अगर शरीर को होती हैं तो वह भी पूर्ण हो जाती हैं। तिलक किसी खास प्रयोजन के लिए भी लगाये जाते हैं जैसे यदि मोक्षप्राप्ती करनी हो तो तिलक अंगूठे से, शत्रु नाश करना हो तो तर्जनी से, धनप्राप्ति हेतु मध्यमा से तथा शान्ति प्राप्ति हेतु अनामिका से लगाया जाता हैं।

Tilak on the forehead

पुराणों में वर्णन मिलता है कि संगम तट पर गंगा स्नान के बाद तिलक लगाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है की स्नान करने के बाद पंडों द्वारा विशेष तिलक अपने भक्तों को लगाया जाता है। माथे पर तिलक लगाने के पीछे आध्यात्मिक महत्व है।

दरअसल, हमारे शरीर में सात सूक्ष्म ऊर्जा केंद्र होते हैं, जो अपार शक्ति के भंडार हैं। इन्हें चक्र कहा जाता है। माथे के बीच में जहां तिलक लगाते हैं, वहां आज्ञाचक्र होता है। यह चक्र हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है, जहां शरीर की प्रमुख तीन नाडि़यां इड़ा, पिंगला व सुषुम्ना आकर मिलती हैं इसलिए इसे त्रिवेणी या संगम भी कहा जाता है।

Tilak on the forehead

यह गुरु स्थान कहलाता है। यहीं से पूरे शरीर का संचालन होता है। यही हमारी चेतना का मुख्य स्थान भी है। इसी को मन का घर भी कहा जाता है। इसी कारण यह स्थान शरीर में सबसे ज्यादा पूजनीय है। योग में ध्यान के समय इसी स्थान पर मन को एकाग्र किया जाता है।

आमतौर से तिलक अनामिका द्वारा लगाया जाता हैं और उसमे भी केवल चंदन ही लगाया जाता हैं तिलक संग चावल लगाने से लक्ष्मी को आकर्षित करने का तथा ठंडक व सात्विकता प्रदान करने का निमित छुपा हुआ होता हैं। अतः प्रत्येक व्यक्ति को तिलक ज़रूर लगाना चाहिए।

Tilak on the forehead

हिंदू धर्म में जितने संतों के मत हैं, जितने पंथ है, संप्रदाय हैं उन सबके अपने अलग-अलग तिलक होते हैं। तंत्र शास्त्र में पंच गंध या अस्ट गंध से बने तिलक लगाने का बड़ा ही महत्व है तंत्र शास्त्र में शरीर के तेरह भागों पर तिलक करने की बात कही गई है, लेकिन समस्त शरीर का संचालन मस्तिष्क करता है। इसलिए इस पर तिलक करने की परंपरा अधिक प्रचलित है। तिलक लगाने में सहायक हाथ की अलग-अलग अंगुलियों का भी अपना महत्व है।

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