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केंद्र सरकार की ओर से लाये गये तीन कृषि कानूनों पर पूरे देश में हो रहा है विरोध : रामेश्वर

संजीवनी टुडे 29-09-2020 16:14:57

झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सह राज्य के खाद्य आपूर्ति तथा वित्तमंत्री रामेश्वर उरांव ने बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने कृषि बिल को लेकर आज वर्चुअल माध्यम से बिहार और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के किसानों से चर्चा की।


रांची। झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सह राज्य के खाद्य आपूर्ति तथा वित्तमंत्री रामेश्वर उरांव ने बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने कृषि बिल को लेकर आज वर्चुअल माध्यम से बिहार और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के किसानों से चर्चा की। उरांव ने मंगलवार को बताया कि केंद्र सरकार द्वारा लाये गये तीन कृषि कानूनों पर पूरे देश में विरोध हो रहा है। हर दिन झारखंड, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अलावा अलग-अलग राज्यों में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। इस लड़ाई में कांग्रेस किसानों के साथ खड़ी है।

उन्होंने बताया कि वर्चुअल संवाद में किसानों ने पुरजोर तरीके से इस कानून का विरोध किया है। एक किसान ने तो राहुल गांधी से कहा कि अगर आज महात्मा गांधी जिंदा होते, तो वे भी नरेंद्र मोदी सरकार के इस कानून का विरोध करते । एक अन्य किसान ने कहा कि इस बिल से अंबानी, अडानी जैसे लोगों का ही लाभ होने वाला है, साधरण किसानों की मुश्किलें बढ़ जाएगी।उरांव ने कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम ने प्रभावी ढ़ंग से जमाखोरी को कानूनी रुप दे दिया, मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान समझौता अध्यादेश 2020 मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया को निर्धारित नहीं करता। कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य अधिनियम 2020 एपीएमसी को खत्म करता है एवं खाधान्न की खरीद का आश्वासन समाप्त करता है।

इस संबंध में पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने कहा कि एक किसान ने कहा कि पहले जिस तरह से ईस्ट इंडिया कंपनी थी अब उसी रूप में अब ये कॉरर्पोरेट कंपनी आ जाएगी, जिससे किसानों की जिंदगी तबाह हो जाएगी। प्रवक्ता लाल किशोरनाथ शाहदेव ने कहा कि देशभर में विभिन्न राज्यों के किसानों का यह साफ मानना है कि नये कृषि बिल से गरीब किसानों की मुश्किलें और भी बढ़ जाएगी। इस काले कानून से झारखंड समेत देशभर के 62करोड़ किसानों में रोष व्याप्त है।

राजेश गुप्ता ने बताया कि किसानों का कहना है कि प्रधानमंत्री   बार-बार भले यह कह रहे हों कि एमआरपी खत्म नहीं होगी, लेकिन आम किसानों को यह दिख रहा है कि यदि कृषि बिल में इसका लिखित प्रावधान नहीं किया गया, तो एमआरपी की बात भी देश के हर नागरिकों के बैंक खाते में 15 लाख रुपये जमा कराने की बात की तरह सिर्फ जुमलेबाजी ही सिद्ध होगी।

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