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बोरी बांध से सिंचित होती भूमि और आत्मनिर्भर होते किसान

संजीवनी टुडे 25-09-2020 21:02:41

बोरी बांध से सिंचित होती भूमि और आत्मनिर्भर होते किसान


रांची । धरती पर जीवन बचाने और जल, जंगल, जमीन को लेकर मानव जाति का संघर्ष जारी है। जल संचयन के वास्ते रांची से सटे खूंटी जिला में जुगाड़ तकनीक के सहारे ग्राम सभा, जिला प्रशासन और सेवा वेलफेयर सोसायटी के साझा प्रयास से अब तक डेढ़ सौ माइक्रो बोरी बांध बनाये गए हैं। एक बोरी बांध से दस से लेकर 20 एकड़ तक कि भूमि सिंचित की जा सकती है। बोरी बांध के ज़रिए जल संचयन को लेकर खूंटी में संजीदा प्रयास हुए हैं, जिससे जिले में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हुआ है। खूंटी जिले में ग्राम सभा, जिला प्रशासन और सेवा वेलफेयर सोसायटी के साझा प्रयास से अब तक डेढ़ सौ माइक्रो बोरी बांध बनाये गए हैं । ये माइक्रो बोरी बांध खूंटी के जंगल पहाड़ों के बीच से होकर गुजरनेवाले छोटे-छोटे नालों में सीमेंट की खाली बोरियों में बालूयुक्त मिट्टी भरकर बनाया गया है। 

 विशेषज्ञों के अनुसार एक बोरी बांध से दस से लेकर 20 एकड़ तक कि भूमि सिंचित की जा सकती है। जिले के विभिन्न इलाकों में बोरी बांध से लगभग 3 हजार एकड़ भूमि की सिंचाई हो सकेगी। सेवा वेलफेयर सोसाइटी ने 500 बोरी बांध ग्रामसभा की मदद से बनाने का लक्ष्य रखा है। बोरी बांध के बनने से अब सिंचित इलाके लेमन ग्रास और तुलसी की खेती आरम्भ की गई है। बोरी बांध ने ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति को पहले से बेहतर बनाने में मदद की है । 

सिंचित क्षेत्र का विस्तार होने से अब ग्रामीणों के लिए साग सब्जी की खेती के साथ ही मवेशी पालन और मत्स्य पालन का काम भी आसान बन गया, जिससे वे स्वावलंबी तथा आत्मनिर्भर बन रहे हैं । कृषि कार्यों के लिए सिंचाई सुविधाओं का होना या न होना उत्पादन और फिर आमदनी के लिए बड़ा कारक है। झारखण्ड में वर्षा आधारित कृषि से सालभर घर परिवार चलाना शायद मुश्किल है। ऐसे हालात में अगर बोरी बांध को धरातल पर वृहद् पैमाने पर उतारा जाए तो यह न केवल किसानी के लिए फायदेमंद होगा बल्कि इससे भू गर्भीय जल को‌ रिचार्ज करने में सहायता मिलेगी। 

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