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निगम चुनाव : भाजपा खेल रही फ्रंटफुट पर तो कांग्रेस सांगठनिक ढांचे को लेकर कमजोर

संजीवनी टुडे 24-10-2020 12:16:55

प्रदेश के जयपुर, जोधपुर और कोटा में हो रहे नगर निगमों के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी जहां गहलोत सरकार व निगमों के कामकाज के खिलाफ ब्लैक पेपर जारी कर आगे बढ़ रही है।


जयपुर। प्रदेश के जयपुर, जोधपुर और कोटा में हो रहे नगर निगमों के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी जहां गहलोत सरकार व निगमों के कामकाज के खिलाफ ब्लैक पेपर जारी कर आगे बढ़ रही है। वहीं, कांग्रेस 41 बिन्दुओं का संकल्प पत्र जारी कर छहों निगमों की सत्ता पर काबिज होने की कवायद कर रही है। इस बीच, टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर चुनावी मैदान में कांग्रेस-भाजपा के उम्मीदवारों के सामने ताल ठोक चुके बागी समीकरण बिगाडऩे पर उतारू हो रहे हैं। टिकट वितरण से लेकर अब तक की चुनावी कवायद में भाजपा के सांगठनिक ढांचे के सामने कांग्रेस बैकफुट पर हैं।

तीनों शहरों के छहों निगमों के लिए उम्मीदवारों के चयन से लेकर टिकट वितरण और बागियों की मान-मनौव्वल तक की प्रक्रिया में भाजपा को जहां अपने सांगठनिक ढांचे का फायदा मिला हैं, वहीं कांग्रेस इसमें पूरी तरह नाकाम रही है। भाजपा ने जहां टिकट वितरण के बाद प्रत्याशियों की सूचियां जारी करने में एहतियात बरती, वहीं कांग्रेस में सांगठनिक ढांचा नहीं होने से विधायक उम्मीदवारों की सूचियां जेब में लेकर घूमते रहे। उम्मीदवारों की सूचियां तक सार्वजनिक नहीं की जा सकी। उम्मीदवारों को फोन कर बताया गया कि उन्हें फलां वार्ड से टिकट मिला है। ऐसे में तीनों शहरों के कई वार्डों में तो उम्मीदवारों के चेहरों तक से वार्डवासी वाकिफ नहीं हो पाए। 

बगावत का डर भाजपा में भी था, लेकिन डेमेज कंट्रोल के लिए टीम भी तैयार थी। जबकि, कांग्रेस प्रदेश की सत्ता में होने के बावजूद बगावत के साथ एक अन्य खौफ से दहशतजदां रही। दोनों दलों में चूंकि, टिकट वितरण का काम विधायकों के जिम्मे था, इसलिए बगावती तेवर अपनाने वाले बागियों की मान-मनौव्वल का जिम्मा भी उन्हें दिया गया। 

भाजपा ने दावा किया कि उनके 90 फीसदी बागियों को मनाने में सफल रही। कोटा में तो भाजपा ने अपने 22 बागियों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया, कोटा दक्षिण में 13 तथा कोटा उत्तर निगम में 9 बागियों को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया, लेकिन कांग्रेस तीनों शहरों में ऐसी हिम्मत नहीं दिखा सकी। कांग्रेस के पास तो आज भी यह फीडबैक नहीं हैं कि उसके कितने बागी छहों निगमों में अधिकृत प्रत्याशी के सामने ताल ठोक चुके हैं।

दोनों प्रमुख राजनीतिक दल बागियों को आंख दिखा रहे हैं, उन पर कार्रवाई करने की बात कर रहे हैं। अचरज इस बात का है कि जिन पर कार्रवाई करनी है, पार्टी को उन कार्यकर्ताओं के बारे में जानकारी ही नहीं है। दोनों पार्टियां भले ही अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कर रही हो, लेकिन अगर बागी हार गया तो बैरी और जीत गया तो पार्टी को उसे भी गले लगाना मंजूर होगा। क्योंकि निगम की राजनीति में कुर्सी तक पहुंचने का रास्ता सिर्फ और सिर्फ संख्याबल के आधार पर ही तय होगा।

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