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Women's Day 2020: एक महिला ने बदली गांव की सोच, जानें इनका अभूतपूर्व योगदान

संजीवनी टुडे 08-03-2020 16:55:40

आज हम आपको एक ऐसी औरत के संबंध में बताने वाले है जिसने पूरे ग्राम की सोच को ही बदल दिया है।


धार। आज हम आपको एक ऐसी औरत के संबंध में बताने वाले है जिसने पूरे ग्राम की सोच को ही बदल दिया है। रूढ़ीवादी और परपंरागत सोच को एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बदल कर रख दिया है। इस परिवर्तन में करीबन 5 से छह वर्ष लग गए। अब प्रत्येक प्रसव घर में नहीं, सुरक्षित ढंग से अस्पताल में हो रहे हैं। पिछले 6 वर्षों में लगभग उसके क्षेत्र में एक भी प्रसव घर पर नहीं हुआ है। 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, ये कहानी 40 वर्षीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता राजूबाई की है। जो देलमी में 158 परिवार की जिम्मेदारी संभालती है। वो साल 1998 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बनी। राजूबाई के मुताबिक, शुरू में घर पर प्रसव को लेकर समझाना काफी दिक्कत भरा काम होता है। 

लगभग 5 वर्ष तक अपनी टीम संग घर-घर जाकर महिलाओं को समझाया, इसके बाद स्थिति में परिवर्तन आया। साल 1998-99 में राजूबाई के क्षेत्र में 39 प्रसव घर पर हुए थे। जबकि एक प्रसव अस्पताल में करवाया गया था। साल 2014 के पश्चात उनके क्षेत्र में एक भी प्रसव घर नहीं हुआ है। 

राजूबाई की माने तो, हमने सुरक्षित प्रवस होने संग ही उन्हें योजनाओं के लाभ के बारे में बताया। राजूबाई ने कहा कि, ग्रामीण क्षेत्रों में औरतों की सोच बदलने में काफी परेशानियां आती है। उनके साथ जुड़ना होता है। उनकी मालवी भाषा में बातचीत करते हैं। उससे उन्हें अपनापन लगता है एवं वो हमारी बात मानती हैं। 

इलाके के लोगों की माने तो, राजूबाई का दिमाग हार्ड डिस्क जैसे है। वह कुपोषित बच्चों के नाम संग उनके जन्म सहित अन्य डाटा मुंह जुबानी याद रखती हैं। राजूबाई ने कहा कि हम कुपोषण और टीकाकरण को लेकर 100% परिणाम देने का काम करते हैं। वहीं, जिला अस्पताल के एसएनसीयू में अनेक लावारिस नवजात बच्चों को भर्ती करवाया जाता है। 

अनेक अंजान बच्चों पर यूनिट की नर्स ही माता के रूप में ममता की स्नेह बिखेरती हैं। नवजात को अपने बच्चों जैसे देखरेख से लेकर उन्हें लाड़-दुलार करती हैं। चिकित्सक जमरा ने यह कहा कि हमारी टीम ऐसे अंजान और लावारिस बच्चों की परिवार की तरह से प्यार देकर देखरेख करती है। उनके इस विचार ने अनेक बच्चो को नई जिंदगी दी हैं। हमारे देश को भी ऐसी ही सोच की सख्त जरूरत हैं। 

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