संजीवनी टुडे

रोटी की खातिर बच्चों को गिरवी रखकर पेट भरने को मजबूर हो रहे आदिवासी

संजीवनी टुडे 11-07-2019 12:35:58

राजस्थान के बारां जिले में इन दिनों मासूमियत का बाजार लग रहा है। गरीबी से जूझ रहे आदिवासी समुदाय के लोग अपने बच्चों को गिरवी रखकर पेट भरने को मजबूर हो रहे हैं।


बारां। राजस्थान के बारां जिले में आजकल मासूमियत का बाजार लग रहा है। गरीबी से जूझ रहे आदिवासी समुदाय के लोग अपने बच्चों को गिरवी रखकर पेट भरने को मजबूर हो रहे हैं। केवल 30 से 40 हजार में इन बच्चों को भेड़ एवं ऊंट चराने हेतु गिरवी रखा जा रहा है। 

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सरकारी दावों के विपरीत बारां के आदिवासी समुदाय की इस फोटो में रोजाना वृद्धि हो रही है। बारां के आदिवासी क्षेत्र में नि:शुल्क राशन, शिक्षा तथा चिकित्सा के सरकारी दावों की पोल खोलने वाली यह दास्तां कह रही है कि पेट की भूख के आगे सब कुछ बेईमानी है। 

बता दें कि, यहां माता-पिता सालभर की मजदूरी के नाम पर 30 से 40 हजार में बच्चों को रेबारियों के पास गिरवी रख रहे हैं। रेबारी इन बच्चों को भेड़ एवं ऊंट चराने का कार्य देते हैं। बारां के शाहबाद उपखंड के भील समाज के ग्राम आनासागर, रानीपुरा, हाड़ौता, उचावत, मंगलपुरा, खूंटी, बलारपुर इत्यादि ग्रामों के 50 से अधिक बच्चे रेबारियों के पास गिरवी हैं। 

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चौंकाने वाली बात तो ये है कि चाइल्ड लाइन तथा मानव तस्करी यूनिट इस गोरखधंधे को जानकर भी अज्ञान बनी हुई है।

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