संजीवनी टुडे

जेल में बंद इस माओवादी लड़के ने पास की सेट की परीक्षा, रचा इतिहास

संजीवनी टुडे 15-03-2019 16:10:22


कोलकाता। जेल में बंद माओवादी नेता अर्णव दाम उर्फ विक्रम ने स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट (सेट) की परीक्षा पास कर इतिहास रच दिया है। गत दो दिसम्बर को सेट की परीक्षा हुई थी, तब वह कोलकाता के प्रेसिडेंसी जेल में बंद था। उसने जेल से ही परीक्षा दी। अब मध्य कोलकाता के कॉलेज में पढ़ाने के लिए सेट की परीक्षा पास कर ली है। शुक्रवार को उसने अपना रिजल्ट स्पीड पोस्ट के जरिए पिता एस.के. दाम को भेजा। 

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इससे पहले जेल में बंद किसी भी व्यक्ति ने सेट की परीक्षा पास नहीं की थी। वह शोध कार्य करना चाहता है। वर्तमान में अर्णव हुगली जेल में बंद है। अर्णव एक समय में पश्चिम बंगाल-झारखंड-ओडिशा के जंगली इलाके में सक्रिय माओवादियों के संगठन का सचिव था। उसका छद्म नाम विक्रम था और इसी नाम से उसे जाना जाता था। जुलाई 2012 में पुरुलिया जिले के विरामडी रेलवे स्टेशन के पास से उसे सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार कर लिया था। 

वह मूल रूप से सुभाषग्राम का रहना वाला है। इस बारे में एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट (एपीडीआर) नाम की मानवाधिकार संस्था के सचिव रंजीत सुर ने शुक्रवार को बताया कि प्रेसिडेंसी जेल में बंद रहने के दौरान ही उसने अपनी बीए ऑनर्स और एमए (इतिहास) की पढ़ाई पूरी की है और परीक्षा भी प्रथम श्रेणी से पास की है।

अर्णव खड़गपुर आईआईटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था, लेकिन इसी बीच में ही पढ़ाई छोड़कर अति हिंसक माओवादी बन गया था। हालांकि इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई कर रहा था। उसने स्नातक में 65 फीसदी नंबर लाए थे। इसके बाद इतिहास से स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की और 66.4 फीसदी नंबर लाया। यह भी इच्छा है कि वह भविष्य में पीएचडी करे।

रंजीत सुर के अनुसार वह अर्णव ही नहीं, बल्कि जेल में अन्य कैदियों की भी पढ़ाई की व्यवस्था करवाने के पक्षधर हैं। जेल अस्पताल में साफ-सफाई, खाने की गुणवत्ता और अन्य सुविधाओं को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चिट्टियां भी लिखी हैं। अर्णव के खिलाफ माओवादी हमले के 31 मामले दर्ज हैं। इनमें से 30 में तो उसे जमानत मिल गई है, लेकिन सिलादह के ईएफआर कैंप पर हमले के मामले में उसे जमानत नहीं मिली है।

उसे जानने वालों का दावा है कि हर एक लक्ष्य को उसने पूरा किया है। एक समय में उसे मास्टर दा के नाम से भी जाना जाता था। अब अगर सेट की परीक्षा पास करने के बाद वह किसी कॉलेज में शिक्षक बनता है तो निश्चित तौर पर माओवाद के उन्मूलन के मामले में मील का पत्थर साबित हो सकता है। 

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रंजीत सुर ने बताया कि 18 दिसम्बर को अर्णव नेट की परीक्षा देना चाहता था। इसके लिए उसे एडमिट कार्ड भी मिल गया था, लेकिन जेल प्रबंधन की लापरवाही से वह परीक्षा नहीं दे सका। इसके विरोध में अर्णव ने चार दिन तक अनशन किया और राज्य के कारागार मंत्री उज्जवल विश्वास के आश्वासन के बाद अनशन तोड़ा था। इस साल होने वाली नेट की परीक्षा में वह बैठेगा।

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