संजीवनी टुडे

यहां किताबी ज्ञान ही नहीं सामाजिक शिक्षा और खेती भी सीख रहे है बच्चे

संजीवनी टुडे 16-07-2019 14:43:16

सरकारी स्कूलों के बच्चे अब मध्याह्न भोजन में जैविक तरीके से उगाए गए सब्जी और फल का स्वाद लेंगे, उसमें भी खुद से उपजाया गया।


बेगूसराय। सरकारी स्कूलों के बच्चे अब मध्याह्न भोजन में जैविक तरीके से उगाए गए सब्जी और फल का स्वाद लेंगे, उसमें भी खुद से उपजाया गया। इसके लिए जमीन उपलब्ध रहने वाले विद्यालयों में पोषण वाटिका लगाई जा रही है। फिलहाल 69 स्कूलों में पोषण वाटिका शुरू हो चुकी है। 

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जिसमें से दो स्कूल, मध्य विद्यालय मसनदपुर बीहट और रेलवे विद्यालय बछवाड़ा में पोषण वाटिका से उत्पादन भी शुरू है। केन्द्र सरकार के तय पैमाना के आधार पर नीति आयोग की ओर से बेगूसराय को आकांक्षी जिला घोषित करने के बाद यहां शिक्षा एवं बच्चों के समग्र संवर्धन करने में लगे गांधी फेलोज पोषण शिक्षा की ओर प्रेरित करना शुरू किया गया।

किताबी ज्ञान के साथ बच्चों को समाजिक शिक्षा और दायित्व तथा कम लागत में अधिक खेती कर बागवानी के गुर भी सिखाये जाने लगे। जिसके बाद यह अभियान रंग लाने लगा और स्कूलों के पोषण वाटिका में भिंडी, कद्दू, करेला, बैगन, झींगा, साग, बीन्स, पालक, बोरा, खीरा आदि बच्चों ने लगाया है। 

बच्चों की इच्छा के अनुसार विद्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए बीज लगाने के बाद बच्चों ने क्लास से बचे समय में खूब मेहनत की और सब्जियां उगने के बाद बच्चों का उत्साह दोगुना हुआ। बगैर खाद वाली सब्जी खाकर बच्चे खुश हैं। इससे उन्हें पोषण युक्त हरी और ताजा सब्जियां खाने को मिलेंगी, जो एनिमिया और कुपोषण को खत्म करेगी।

पिरामल फाउंडेशन के डिस्ट्रिक को-ऑर्डिनेटर रॉबिन राजहंस ने बताया कि जिले के जिन विद्यालयों में अतिरिक्त जमीन हैं। वहां के शिक्षकों एवं बच्चों को पोषण वाटिका लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ताकि स्वास्थ्य के अनुकूल बगैर रासायनिक खाद, कीटनाशक के प्रयोग से तैयार सब्जी से जहां स्वास्थ्य पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा। वहीं, शिक्षा के साथ-साथ बागवानी के तरीके से भी छात्र रूबरू होंगे और प्रेरणा भी मिलेगी। 

सरकार बच्चों को जैविक खेती और पोषण से जोड़ने के लिए अंकुरण प्रोजेक्ट के तहत मिडिल स्कूलों में पोषण वाटिका लगाना शुरू किया है। प्रोजेक्ट को पूर्णिया में सितंबर 2016 में प्रयोग के तौर पर शुरू किया गया था। वहां मिली शानदार सफलता को देखते हुए इसे पूरे राज्य में लागू करने का फैसला लिया गया है। 

13 फरवरी, 2019 को शिक्षा विभाग ने सभी डीएम को इसको लेकर पत्र लिखा था। विभाग का निर्देश है कि जिन मिडिल स्कूलों में पोषण वाटिका बनाने के लिए जरूरी जमीन है, वहां इसे शुरू किया जाय। पोषण वाटिका में उगाई गई सब्जियों को मिड-डे मील में शामिल कर बच्चों में पोषक तत्वों की कमी को दूर किया जाएगा। 

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इस प्रोजेक्ट से बिहार में एनिमिया को खत्म करने में बड़ी मदद मिलेगी। सरकार की कोशिश है कि बच्चों को पोषण युक्त आहार देने के साथ ही उन्हें स्वास्थ्य और जैविक खेती के प्रति जागरूक किया जाए। उल्लेखनीय है कि 90 के दशक तक सभी स्कूलों में रोज एक समय निर्धारित किया गया था, जिसमें बच्चे बागवानी कर सब्जी, फल एवं फूल लगाते थे। 

लेकिन धीरे-धीरे शिक्षकों ने इसपर ध्यान देना बंद कर दिया। अब करीब दो दशक से अधिक समय के बाद जब सामुदायिक तौर पर लोगों को प्रेरित करना शुरू किया गया है तो ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे ही नहीं अभिभावक भी खुश हैं कि बच्चे स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने के साथ-साथ धरती से भी जुड़ रहे हैं।

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