संजीवनी टुडे

मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल करना बच्ची को पड़ा भारी, हुई ऐसी हालत...

संजीवनी टुडे 16-08-2019 15:13:21

जहां एक ओर इस स्मार्टफोन के कई फायदें हैं तो वहीँ इसके कुछ नुकसान भी हैं।


नई दिल्ली। आज के वक्त में तकनीक काफी आगे पहुंच गई हैं। इस तकनीक की वजह से सर्वाधिक चलन स्मार्टफोन का भी बड़ा हैं। इस फोन की लत हमें अनेक घंटो मोबाइल स्क्रीन पर देखने को मजबूर कर डालती हैं। जहां एक ओर इस स्मार्टफोन के कई फायदें हैं तो वहीँ इसके कुछ नुकसान भी हैं। 

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हमारे मोबाइल फोन से निकलने वाली हानिकारक किरणें हमारी आंखों हेतु ठीक नहीं होती हैं। आज कल अनेक मां-बाप अपने बच्चों को बचपन से ही मोबाइल देखना सिखा देते हैं। फिर ये बच्चे भी घंटो इसी मोबाइल में अपनी आंखें गड़ाए रहते हैं। इस कारण आजकल अनेक छोटे बच्चों की आंखों पर भी चश्मा चढ़ गया हैं। 

किन्तु कुछ मामलो में ये बात केवल आंखों के चश्मे तक ही सीमित नहीं रहती हैं बल्कि इसके कुछ गंभीर नतीजे भी हो सकते हैं। ऐसा ही कुछ थाईलैंड में जीवन बिता रहे माता-पिता संग हुआ। दरअसल, थाईलैंड के निवासी Dachar Nuysticker Chuayduang की 4 वर्ष की पुत्री को ज्यादा स्मार्टफोन देखना काफी भारी पड़ गया। 

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खबरों की माने तो, उनकी पुत्री 2 साल की थी तब से बहुत अधिक मोबाइल फोन देखती आ रही हैं। ऐसे में जब उसकी आयु चार वर्ष ही हुई तो उसकी आंखों में मोबाइल के कारण समस्यां पैदा हो गई। पहले तो इस परेशानी से निपटने हेतु बच्ची को चश्मा दिया गया। किन्तु इससे कोई बात नहीं बनी। क्योंकि बच्ची को ‘लेजी आई’ नाम का एक रोग हो गया। 

ये एक ऐसा रोग हैं जिसका उपचार चश्मा लगाने के पश्चात भी संभव नहीं हैं। इस रोग के कारण हमारा दिमाग आंखों को दिखने वाली तस्वीर को सेन्स नहीं कर पाता हैं। नतीजन हमें उस आंख से कम या फिर ना के समान नजर आने लगता हैं। पिता Dachan ने ये पूरी घटना फेसबुक की मदद से लोगों को कहीं हैं। बता दें कि, सर्जरी के पश्चात अब बच्ची की हालत ठीक हैं एवं उसमे धीरे-धीरे सुधार आ रहा हैं। 

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कितने घंटे बच्चों हेतु मोबाइल देखना हैं सेफ?
नेत्र विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों को आमतौर पर दिनभर में 2 घंटे से अधिक मोबाइल या फिर टीवी नहीं देखने देना चाहिए।  वहीँ, अगर बच्चे की आयु 2 से 5 वर्ष के मध्य में हैं तो यह टीम सिर्फ 1 घंटे का रह जाता हैं। 2 से 5 वर्ष के बच्चों की आँखों तथा दिमाग पर इसका सर्वाधिक नकारात्मक प्रभाव पड़ता हैं। 

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