संजीवनी टुडे

किन्नरों से जुड़ी कुछ ऐसी अनोखी परम्पराएं, शायद नहीं जानते होंगे आप!

संजीवनी टुडे 18-02-2020 12:06:40

हमारी इस दुनिया में कई चीजे ऐसी हैं जिनके काफी सारे अनजाने पहलू होते हैं। इनमें से एक किन्नरों का विषय है। ट्रांसजेंडर यानि किन्नरों की दुनिया आम लोगों से बिल्कुल अलग होती है। समाज में उन्हें पर्याप्त सम्मान नहीं मिलता है। इसके चलते उन्हें रोजगार में भी दिक्कतें आती हैं। वे भीख मांगने को मजबूर हैं। अभी तक कानून में इसे एक अपराध माना जाता था।


डेस्क। हमारी इस दुनिया में कई चीजे ऐसी हैं जिनके काफी सारे अनजाने पहलू होते हैं। इनमें से एक किन्नरों का विषय है। ट्रांसजेंडर यानि किन्नरों की दुनिया आम लोगों से बिल्कुल अलग होती है। समाज में उन्हें पर्याप्त सम्मान नहीं मिलता है। इसके चलते उन्हें रोजगार में भी दिक्कतें आती हैं। वे भीख मांगने को मजबूर हैं। अभी तक कानून में इसे एक अपराध माना जाता था। मगर किन्नरों की मजबूरी को देख‘ट्रांसजेंडर्स पर्सन्स विधेयक, 2019 के विवदित प्रावधान को हटा लिया गया था। आज हम आपको किन्नरों से जुड़ी कुछ ऐसी अनोखी परंपराओं के बारे में बताएंगे, जिनके बारे में शायद ही आप जानते होंगे....

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-जब कोई नया किन्नर किन्नरों की टोली में आता है तो पूरी टोली उसका जोरदार स्वागत करती है जिसमें नाच-गाना और दावत होती है। इसे वो एक उत्सव के रूप में मनाते हैं।

किन्नरों से आम लोग बेहद ही कम शादी करते हैं, बताया जाता है इनके समाज ने एक अलग ही परंपरा बनाई हुई है। किन्नरों की परंपरा के मुताबिक इनकी शादी साल में एक बार होती है जो कि वो उनके भगवान ‘अरावन’ के साथ करते हैं। और इसके अगले ही दिन वो विधवा हो जाती हैं। 

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-क्या आप जानते हैं कि किन्नरों की भी शादी होती है? बता दें, ये अनोखी शादी साल में सिर्फ एक ही दिन के लिए होती है जो कि वो उनके भगवान ‘अरावन’ के साथ करते हैं।

-किन्नरों के अंतिम संस्कार को गुप्त रखा जाता है। अंतिम यात्रा दिन की जगह रात में निकाली जाती है। मान्यता है कि इनकी शव यात्रा देखना अशुभ होता है। किन्नर नहीं चाहते हैं कि अगले जन्म में दूसरा इंसान उनकी तरह जन्म ले।

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-किन्नरों की शव यात्रा से जुड़ी एक परंपरा के तहत अंतिम संस्कार से पहले बॉडी को जूते-चप्पलों से पीटा जाता है। इससे उस जन्म में किए सारे पापों का प्रायश्चित हो जाता है।

-किन्नरों में शव को जलाने की जगह दफनाया जाता है। इसके अलावा समुदाय में किसी की मौत होने पर वे अगले एक हफ्ते तक खाना नहीं खाते हैं।

-किन्नरों की ज्यादातर परम्पराएं हिन्दू धर्म के मुताबिक निभाई जाती हैं, लेकिन उनके ज्यादातर गुरू मुस्लिम समुदाय के होते हैं।

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-किन्नर समुदाय की परंपरा के तहत उन्हें सुबह 6 बजे उठना होता है। इसके बाद नित्यकर्म करके उन्हें अपनी रोजी-रोटी के लिए घर से निकल जाना होता है।

-मालूम हो कि महाभारत युद्ध से पहले पांडवों ने मां काली की पूजा में एक राजकुमार की बलि देने का निर्णय लिया था। इसके लिए इरावन तैयार हो गया था मगर उसकी शर्त थी कि वो बिना विवाह के इस कार्य को पूरा नहीं करेगा। चूंकि इरावन की मृत्यु होने वाली थी ऐसे में कोई भी लड़की उससे विवाह नहीं करना चाहती थी। तब श्रीकृष्ण ने मोहिनी बनकर इरावन से शादी की थी।

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-बताया जाता है कि किन्नर समाज में शादी समारोह को बड़े धूमधाम से आयोजित किया जाता है। साथ ही इरावन की मूर्ति के साथ जुलूस भी निकालते हैं। विवाह संपन्न होने के अगले ही दिन किन्नर श्रृंगार उतारकर विधवा की तरह शोक मनाते हैं और सफेद कपड़े पहनते हैं।

-किन्नरों की शादी के अलावा उनकी मृत्यु से जुड़े तथ्य भी बेहद रोचक हैं। कहते हैं कि किन्नरों में किसी की मृत्यु होने पर शोक मनाने की जगह खुशियां मनाते हैं। क्योंकि उनका मानना है कि मृत्यु से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होगी।

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