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सूर्य ग्रहण 2019: ग्रहण के दौरान इस मंदिर के कभी नहीं किए जाते कपाट बंद, जानिए क्या हैं वजह

संजीवनी टुडे 26-12-2019 11:15:46

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का प्रभाव नकारात्मक होता है। ऐसे में मंदिरों को सबसे पवित्र स्थान माना गया है इसलिए मंदिरों को काली शक्तियों और नकारात्मकताओं से बचाने के लिए मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।


डेस्क। हिंदू धर्म में सूतक लगने पर कई तरह के कार्यों को नहीं किया जा सकता। सूतक के समय को अशुभ समय माना गया है। ऐसे में सूर्य ग्रहण से पहले सूतक काल शुरू होता है, जिसकी वजह से मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए।

साल 2019 का अंतिम सूर्य ग्रहण: आखिर ग्रहण के दौरान क्यों बंद किए जाते हैं मंदिरों के कपाट, इस समय क्या होता है वहां!

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 धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का प्रभाव नकारात्मक होता है। ऐसे में मंदिरों को सबसे पवित्र स्थान माना गया है इसलिए मंदिरों को काली शक्तियों और नकारात्मकताओं से बचाने के लिए मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। 

लेकिन ग्रहण के वक्त जहां देश के सभी मंदिर जहां बंद कर दिए जाते हैं, वहीं एक मंदिर ऐसा है जहां पूजा-पाठ होती रहती है। यह दक्षिण भारत के श्री कालाष्ठीं में स्थित कालहटेश्वदर मंदिर है। यह देश का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां मंदिर को बंद नहीं किया जाता है। 

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इस वजह से बंद नहीं किया जाता हैं मंदिर 

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कालहटेश्वदर मंदिर इसलिए बंद नहीं किया जाता क्योंकि यहां राहू और केतू की पूजा होती है। ग्रहण के दौरान इस मंदिर के कपाट बंद न करके यहां पूजा अर्चना की जाती है। 

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