संजीवनी टुडे

...तो इस वजह से हमेशा काला कोट ही पहनते हैं वकील

संजीवनी टुडे 16-08-2019 11:09:04

वकालत की शुरुआत साल 1327 में एडवर्ड तृतीय ने की थी एवं उस वक्त ड्रेस कोड के आधार पर न्यायाधीशों की वेशभूषा बनाई गई थी।


नई दिल्ली। अक्सर आप फिल्मों में या फिर वास्तविक जीवन में वकीलों को हमेशा काला कोट और सफेद शर्ट में ही देखते होंगे। किन्तु क्या आप ये जानते हैं कि वकील काला कोट ही क्यों धारण करते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये कोई फैशन नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा कारण है।

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बता दें कि, वकालत की शुरुआत साल 1327 में एडवर्ड तृतीय ने की थी एवं उस वक्त ड्रेस कोड के आधार पर न्यायाधीशों की वेशभूषा बनाई गई थी। उस वक्त में जज अपने सिर पर एक बालों वाला विग धारण करते थे। वकालत के प्रारंभी वक्त में वकीलों को चार हिस्सों में विभाजित किया गया था जो कि इस प्रकार थे- स्टूडेंट, प्लीडर, बेंचर तथा बैरिस्टर।

ये सभी जज का स्वागत करते थे। उस वक्त कोर्ट में सुनहरे लाल वस्त्र और भूरे रंग से तैयार गाउन धारण किया जाता था। तत्पश्चात साल 1600 में वकीलों की वेशभूषा में परिवर्तन आया और 1637 में यह प्रस्ताव रखा गया कि काउंसिल को जनता के अनुरूप ही वस्त्र धारण करने चाहिए। तत्पश्चात वकीलों ने लंबे वाले गाउन पहनने शुरू कर दिए।

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साल 1694 में ब्रिटेन की महारानी क्वीन मैरी की चेचक की वजह से मौत हो गई, तत्पश्चात उनके पति राजा विलियम्स ने सभी न्यायधीशों और वकीलों को सार्वजनिक रुप से शोक मनाने हेतु काले गाउन पहनकर एकत्रित होने का आदेश दिया। तत्पश्चात से आज तक यह प्रथा चली हुई आ रही है कि वकील काला गाउन धारण करते हैं। 

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अधिनियम 1961 के तहत अदालतों में सफेद बैंड टाई संग काला कोट पहन कर आना आवश्यक कर दिया गया था। ऐसा माना जाता है कि ये काला कोट व सफेद शर्ट वकीलों में अनुशासन लाता है तथा उनमें न्याय के प्रति भरोसा जगाता है। 

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