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विलुप्त होती उड़न गिलहरी कैमरे मैं कैद, उड़न गिलहरी का दिखना पर्यावरण के लिए शुभ माना जाता है

संजीवनी टुडे 07-04-2020 17:59:52

नई टिहरी । पर्यावरण, वन्यजीव एवं प्रकृतिप्रेमियों के लिए यह सुखद खबर है। उत्तराखंड में माणिकनाथ रेंज (टिहरी) अंतर्गत देवप्रयाग के कांडाधार क्षेत्र के जंगलों में दुर्लभ उड़न गिलहरी (फ्लाइंग स्क्वैरल) दिखाई दी है। पर्यावरण विशेषज्ञ इसे जैव विविधता के लिहाज से शुभ संकेत मान रहे हैं।


नई टिहरी । पर्यावरण, वन्यजीव एवं प्रकृतिप्रेमियों के लिए यह सुखद खबर है। उत्तराखंड में माणिकनाथ रेंज (टिहरी) अंतर्गत देवप्रयाग  के कांडाधार क्षेत्र के जंगलों में दुर्लभ उड़न गिलहरी (फ्लाइंग स्क्वैरल) दिखाई दी है। पर्यावरण विशेषज्ञ इसे जैव विविधता के लिहाज से शुभ संकेत मान रहे हैं। उड़न गिलहरी का समुद्रतल से 1824 मीटर की ऊंचाई पर सजवाण कांडा के खेतों में देखा जाना ग्रामीणों के लिए किसी अजूबे से कम नहीं है।

मणिकनाथ रेज के रेंजर देवेंद्र सिंह पुंडीर ने बताया कि उड़न गिलहरी  बिल्कुल विलुप्त की कगार पर है। ऐसे में उसका देवप्रयाग क्षेत्र में देखा जाना किसी अचरज से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि भारत मे  गिलहरी की 12 प्रजाति हैं। ये वन्यजीव संरक्षण 1972 की अनुसूची की भाग दो मे आनेवाला प्राणी है।  भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून को इस बारे में सूचित कर दिया गया है।

ऐसे कैद हुई कैमरे में उड़न गिलहरीः ग्राम प्रधान वीरपाल सिंह पलियाल ने बताया कि गांव के बच्चों ने खेतों के पास गुलदार का बच्चा बैठे होने की बात कही थी। वहां पहुंचने पर अनोखा जानवर दिखाई दिया।  उसके मुंह से गुर्राने की आवाज आ रही थी। सिंह ने बताया कि उन्होंने इस जानवर की फोटो क्लिक की और बच्चों को वहां से हटा दिया। ग्राम प्रधान के मुताबिक गांववासियो ने अपने जंगलों में ऐसा प्राणी कभी नहीं देखा  है। उन्होंने इसकी सूचना अपने मित्र  गंगा प्रहरी व ग्राम प्रधान तुंणगीअरविंद जियाल को दी। जियाल ने पता कर बताया कि यह उड़न गिलहरी है। 

भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के वैज्ञानिक डॉ. एसए हुसैन ने बताया कि उड़न गिलहरी  मध्य हिमालय क्षेत्र में पहले बहुतायत में थी। काफी समय से यह लुप्तप्राय है। ऐसे में इसका दिखना वन्यजीव अनुसंधान के लिए अहम है। उन्होंने बताया कि इसके टांगो व पेट के बीच चमड़े के तौलिया सा आकार का होता है। इस वजह से यह वन्यप्राणी 15 से 20 मीटर की उड़ान भर लेते हैं। उन्होंने कहा आनेवाले फायर सीजन मे दुर्लभ उड़न गिलहरी को बचाने के लिय ग्रामवासियों को जानकारी देने की बहुत जरूरत है।

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