संजीवनी टुडे

इस मंदिर पर हर 12 साल में गिरती है आकाशीय बिजली, फिर भी नहीं होता कोई नुकसान

संजीवनी टुडे 28-07-2019 10:32:16

भगवान शिव का ये मंदिर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में मौजूद है।


नई दिल्ली। हिन्दुस्तान में अनेक ऐसे मंदिर है जिनका रहस्य आज भी बना हुआ है। उन्हीं में से एक ऐसा मंदिर ‘बिजली मंदिर’ है, जिसके रहस्य को लोग चमत्कार मानते है। भगवान शिव का ये मंदिर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में मौजूद है। कुल्लू शहर में व्यास और पार्वती नदी के संगम के नजदीक बसा है। 

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यह जगह समुद्र सतह से 2450 मीटर की ऊंचाई पर उपस्थित है।मान्यता है कि, ये घाटी एक बड़े सांप का रूप है जिसका वध भगवान शिव ने किया था। यहां पर जिस जगह पर शिवलिंग की स्थापना की गई है वहां प्रत्येक वर्ष बिजली गिरती है, जिससे मंदिर का शिवलिंग खंडित हो जाता है।

जानिए मंदिर की खासियत  
इस मंदिर की सबसे विशेष बात यह है कि इस मंदिर पर प्रत्येक 12 साल में आकाशीय बिजली गिरती है, हालांकि इसके पश्चात भी मंदिर को किसी तरह का कोई हानि नहीं पहुंचती है। इस खंडित शिवलिंग को मंदिर के पुजारी जमा करके मक्खन से वापस जोड़ देते है। कुछ महीने के पश्चात ये शिवलिंग ठोस रूप में बदल जाता है।

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बताया जाता हैं कि यहां पहले कुलांत नामक एक दानव निवास करता था। एक दिन वो कुल्लू से अजगर का रूप धारण कर मंडी की घोग्घरधार से होता हुआस लाहौल स्पीति से मथाण ग्राम आ पहुंचा। वो कुण्डली मारकर व्यास नदी के प्रवाह को रोककर इस स्थान को पानी में डुबोना चाहता था।

उसका उद्देश्य यह था कि यहां जीवन विचरण करने वाले सभी जीव-जंतु पानी में डूबकर मर जाएंगे। भगवान शिव कुलांत की इस सोच से काफी चिंतित हो गए। तब उन्होंने उस दानव अजगर को अपने विश्वास में लिया। शिव ने उसके कान में बोला कि तुम्हारी पूंछ में आग लग गई है। 

इतना सुनते ही जैसे ही कुलांत पीछे मुड़ा तभी शिव ने उसके सिर पर त्रिशूल से धावा बोल दिया। जिससे उसकी मौत हो गई। उसके मरते ही उसका शरीर एक बड़े पर्वत में तब्दील हो गया। उसका शरीर धरती के जितने भाग में फैला हुआ था वह पूरा की पूरा क्षेत्र पर्वत में परिवर्तित हो गया। 

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कुल्लू घाटी का बिजली महादेव से रोहतांग दर्रा एवं उधर मंडी के घोग्घरधार तक की घाटी कुलान्त के शरीर से बनी हुई मानी जाती है। किंवदंती है कि कुलांत से ही कुलूत एवं तत्पश्चात कुल्लू नाम पड़ा। कुलांत दैत्य को मारने के पश्चात शिव ने इंद्र से कहा कि वे 12 साल में एक बार इस जगह पर बिजली गिराया करें। 

प्रत्येक 12 वर्ष में यहां बिजली गिरती है। जिससे शिवलिंग चकनाचूर हो जाता है। शिवलिंग के टुकड़े जमा करके शिवजी का पुजारी मक्खन से जोड़कर स्थापित कर लेता है। थोड़े वक्त के पश्चात पिंडी अपने पुराने स्वरूप में आ जाती है।

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