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आखिर लाल, पीले और हरे रंग की ही क्यों होती है ट्रैफिक सिग्नल की लाइट, जानिए इनका मतलब...

संजीवनी टुडे 09-09-2019 13:52:21

सड़क पर सुरक्षित चलने हेतु यातायात के नियमों का पालन करना काफी आवश्यक होता है।


नई दिल्ली। सड़क पर सुरक्षित चलने हेतु यातायात के नियमों का पालन करना काफी आवश्यक होता है। इन नियमों में ट्रैफिक सिग्नल्स भी आते हैं। बता दें कि ट्रैफिक सिग्नल में 3 रंगों की लाइट लगी हुई होती है, किन्तु क्या आप ये जानते हैं कि आखिर ट्रैफिक लाइट में इन्हीं तीन रंगों का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?

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आप ये जानकर चौंक जाएंगे कि विश्व में सबसे पहले ट्रैफिक लाइट 10 दिसंबर, 1868 को लंदन के ब्रिटिश हाउस ऑफ पार्लियामेंट के समक्ष लगाई गई थी। 

इस लाइट को जेके नाईट नामक रेलवे इंजीनियर ने लगाया था। तब रात में ट्रैफिक लाइट नजर आए, इसके लिए उसमें गैस भरा जाता था। हालांकि वो अधिक दिन तक नहीं चल पाते थे एवं गैस की वजह से फूट जाते थे। 

ट्रैफिक सिग्नल में होता है दिन रंगों का उपयोग 
दरअसल, लाल रंग दूसरे रंगों की अपेक्षा में बेहद ही गाढ़ा होता है। ये दूर से ही नजर आने लगता है। लाल रंग का उपयोग इस बात का भी संकेत देता है कि आगे खतरा है, आप ठहर जाइए। 

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ट्रैफिक लाइट में पीले रंग का उपयोग इसलिए किया जाता है, क्योंकि यह रंग ऊर्जा एवं सूरज का प्रतीक माना जाता है। यह रंग कहता है कि आप अपनी ऊर्जा को समेट कर दोबारा से सड़क पर चलने हेतु तैयार हो जाइए। 

हरा रंग प्रकृति तथा शांति का प्रतीक माना जाता है। ट्रैफिक लाइट में इसका उपयोग इसलिए किया जाता है, क्योंकि यह खतरे के बिल्कुल विपरीत होता है। इसका अर्थ होता है कि अब आप बिना किसी खतरे के आगे बढ़ सकते हैं।

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