संजीवनी टुडे

इतिहास में घटी एक ऐसी अनोखी प्रेम कहानी, पढ़कर आपके भी खड़े हो जायेंगे रोंगटे

संजीवनी टुडे 11-02-2019 05:15:00


डेस्क । भारत के इतिहास में हम आपको एक ऐसी कहानी के बारें में बताएंगें जिसे सुनकर आप हैरान रह जायेंगें। इनमें एक ऐसी अमर प्रेम कहानी जो काफी रोचक है। यह कहानी पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता की है। आपको बता दें कि पृथ्वीराज चौहान दिल्ली के सबसे आखिरी हिन्दू शासक थे जिन्होंने दिल्ली पर शासन किया था।संयोगिता कन्नौज की राजकुमारी थीं। एक बार की बात हैं जब उनके राज्य में एक चित्रकार आया था। उसके पास कई राजा-रानियों की तस्वीरें थीं। लेकिन कन्नौज की  लड़कियों को एक तस्वीर काफी पसंद आई। यह तस्वीर थी पृथ्वीराज चौहान की। पूरे राज्य में पृथ्वीराज के चर्चे होने लगे और ये बातें संयोगिता के कानों में भी पहुंच गई। इसके बाद संयोगिता भी देखना चाहती थीं कि आखिर वो कौन है। जिसकी सभी दीवानी हो रही है। ऐसे में ही उन्होंने चित्रकार से कह कर पृथ्वीराज चौहान की तस्वीर अपने कमरे में रखवाई। तस्वीर को जब संयोगिता अपनी सहेलियों के साथ देखने कमरे में गईं तो संयोगिता की नजरें उनकी तस्वीर को ही देखती रह गई।  जयपुर में प्लॉट मात्र 2.40 लाख में Call On: 09314166166

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लेकिन आपको बता दें कि संयोगिता के पिता जयचंद का सबसे बड़ा दुश्मन पृथ्वीराज चौहान थे। लेकिन वह अपना दिल दे बैठी थीं। इधर चित्रकार कन्नौज छोड़कर दिल्ली पहुंच चुका था। उसने पृथ्वीराज को संयोगिता की तस्वीर दिखाई। तस्वीर देखते ही पृथ्वीराज चौहान दंग रह गए, ऐसी खूबसूरती इससे पहले आज तक नहीं देखी थी। 

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पृथ्वीराज ने अपना संदेश अपने लोगों से संयोगिता के पास भिजवाने लगे। संयोगिता भी उन्हीं लोगों के हाथों अपना संदेश पृथ्वीराज को भेजती थी। कुछ दिनों तक ऐसा ही चलता रहा और दोनों में प्यार बढ़ता चला गया। लेकिन इससे पहले ये चाहत और बढ़ती इस बात का पता राजा जयचंद को चल गया। जयचंद ने अपनी बेटी के स्वयंवर की घोषणा कर दी। जयचंद ने आसपास के सभी राजा महाराजाओं को निमंत्रण भेजा लेकिन पृथ्वीराज चौहान को इस स्वयंवर में नहीं बुलाया। 

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संयोगिता के स्वंयवर में देश के सभी राजा महाराजा पहुंचे। लेकिन राजकुमारी संयोगिता स्वंयवर में चारों तरफ पृथ्वीराज चौहान को ही खोज रही थीं। लेकिन चौहान उन्हें कहीं नज़र नहीं आए। फिर बाद में राजकुमारी धीरे-धीरे सभी राजाओं को ठुकरा कर दरवाजे के पास मौजूद उस पुतले के पास पहुंच गईं और माला पृथ्वीराज चौहान के पुतले के गले में डाल दिया। जैसे ही उन्होंने माला पहनाई पुतले के पीछे से खुद पृथ्वीराज चौहान संयोगिता के सामने आ गए। यह देखकर सभी लोग हैरान रह गए। 

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उस समय राजा जयचंद्र का काफी गुस्सा आ रहा था। उन्होंने फौरन सेना को पृथ्वीराज चौहान को बंधक बनाने का आदेश दिया। वहीं दूसरी तरफ पृथ्वीराज चौहान संयोगिता को लेकर राज्य से भाग निकले। ऐसे में जयचंद ने मोहम्मद गौरी से हाथ मिला लिया। मोहम्मद गौरी पृथ्वीराज चौहान का सबसे बड़ा दुश्मन था। गौरी के साथ मिलकर जयचंद ने दिल्ली पर हमला कर दिया, फिर जो हुआ वो आज भी इतिहास के पन्नों में अमर है। 

 

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