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जानिए, देश के महान स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर से जुडी कुछ बातें...

संजीवनी टुडे 26-02-2018 08:07:27

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डेस्क। देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक विनायक दामोदर सावरकर थे। वह बड़े ही वीर और साहसी थे। उन्होंने देश की आजादी की लड़ाई में बढ़ चढ़ कर भाग लिया। अनेक कष्ट सहे। उनकी वीरता, निर्भीकता और साहस से प्रभावित होकर देश के लोगों ने उन्हें 'वीर' की उपाधि प्रदान की। वह वीर सावरकर के नाम से प्रसिद्ध हुए।

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वीर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के भगूर नामक गाँव में हुआ था। उनके पिता दामोदर पंत सावरकर विद्या-प्रेमी थे। उनकी माता का नाम राधाबाई था। वीर सावरकर की शुरूआती शिक्षा शिवाजी विद्यालय, नासिक में हुई थी। उन्होंने 9 वर्ष की आयु में अपनी माँ को खो दिया। वही साल 1899 में सावरकर ने प्लेग दौरान अपने पिता को खो दिया। उन्होंने मार्च 1901 में यमुनाबाई से शादी की। विवाह के बाद उन्होंने पुणे में फर्गुसन कॉलेज में दाखिला लिया।

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सावरकर एक सच्चे देशभक्त थे। उनके देशभक्तिपूर्ण भाषण और गतिविधियों ने ब्रिटिश सरकार नाराज़ हो गयी और ब्रिटिश सरकार ने उनकी बीए की डिग्री वापस ले ली। इसके बाद सावरकर बैरीस्टर बनने के लिए साल 1906 में लंदन चले गए। लंदन में उन्होंने भारतीय छात्रों को भारत में हो रहे ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकजुट किया। उन्होंने नि: शुल्क भारत सोसाइटी की स्थापना की। 

लंदन में रहने के दौरान सावरकर की मुलाकात लाला हरदयाल से हुई। मदनलाल धींगरा को फांसी दिए जाने के बाद उन्होंने 'लंदन टाइम्स' में भी एक लेख लिखा था। 1911 से 1921 तक वीर सावरकर  अंडमान जेल में रहे। 1921 में वे स्वदेश लौटे और फिर 3 साल जेल भोगी। जेल में 'हिंदुत्व' पर शोध ग्रंथ लिखा। 1937 में वे हिंदू महासभा के अध्यक्ष चुने गए। 1943 के बाद मुंबई में रहे।

26 फरवरी 1966 को 83 वर्ष की आयु में वीर सावरकर का निधन हो गया। उनके निधन से भारत देश का एक महान देशभक्त ,स्वतन्त्रता सेनानी ,कवि और लेखक उठ गया।

सावरकर दुनिया के अकेले स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्हें दो-दो आजीवन कारावास की सजा मिली। सावरकर पहले ऐसे भारतीय राजनेता थे जिन्होंने सर्वप्रथम विदेशी वस्त्रो की होली जलाई थी। वीर सावरकर ने राष्ट्र ध्वज तिरंगे के बीच में धर्म चक्र लगाने का सुझाव सबसे पहले दिया था जिसे राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने माना। 

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