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International Women's day: 8 मार्च को ही क्यों, कब हुई शुरूआत जाने पूरा इतिहास

संजीवनी टुडे 08-03-2019 10:45:18


डेस्क। अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस  हर साल  8 मार्च को ही मनाया जाता हैं। इस दिन जब दुनिया के हर क्षेत्र में महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार प्रकट करते हुए उनकी हर क्षेत्र में स्थापित उपलब्धियों को याद किया जाता है और उनके प्रति आभार भी प्रकट होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं। 8 मार्च को ही क्यों मनाया जाता हैं। इसके पीछे क्या कारण  है।

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कहा जाता है कि सबसे पहला महिला दिवस अमेरिका के न्यूयॉर्क में 1909 में मनाया गया था। जिसका सुभारम्भ अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी ने किया था। 1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय दर्जा हासिल हुआ। इस सम्मेलन में 17 देशों की 100 महिला प्रतिनिधि हिस्सा लेने पहुंची थी। इसके बाद 1911 में 19 मार्च को कई देशों ने इस दिन को मनाया। लेकिन इसे आधिकारिक दर्जा मिला। 

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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का रूस से भी संबंध रहा है। 1917 की बोल्शेविक क्रांति के दौरान रूस की महिलाओं ने सम्राट निकोलस के खिलाफ हड़ताल करने का फैसला किया। महिलाओं ने ये हड़ताल वोट देने की मांग को लेकर शुरू की थी। इस हड़ताल के असर को देखते हुए मौजूदा सम्राट ने सत्ता छोड़ दी और अन्तरिम सरकार ने महिलाओं को वोट देने के अधिकार दे दिया। जिस दिन रूस की महिलाओं ने हड़ताल शुरू की थी। उस दिन ग्रेगेरियन कैलैंडर के अनुसार 8 मार्च की तारीख थी। 8 मार्च को महिलाओं के वोट देने का अधिकार मिलने की वजह से तभी से हर साल 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। 

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वर्ष 1975 में संयुक्त राष्ट्र से आधिकारिक रूप से मान्यता मिलने के बाद महिला दिवस को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाने की शुरूआत हुई।तब से इसे वार्षिक तौर पर एक थीम के साथ मनाना शुरू किया गया। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पहली थीम थी 'सेलीब्रेटिंग द पास्ट, प्लानिंग फॉर द फ्यूचर' थी। जबकि 2019 की अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम 'बैंलेस फॉर बैटर' रखी गई है। हालांकि साल 2019 में हम 107वां अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मना रहे हैं।

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