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भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के पितामह ने बनाई थी पहली फिल्म राजा हरिश्चंद्र, सबसे पहले दिया था महिलाओं को मौका

संजीवनी टुडे 16-02-2019 11:27:44


नई दिल्ली। फिल्म इंडस्ट्री के 'पितामह' दादा साहेब फालके की आज पुण्यतिथि है। दादा साहेब ही वो शख्सियत थे जिन्होंने हमारे देश में सिनेमा जगत की नींव डाली। धुंडिराज गोविन्द फालके उपाख्य दादासाहब फालके का जन्म 30 अप्रैल 1870 को नासिक में हुआ था। वह महापुरुष हैं जिन्हें भारतीय फिल्म उद्योग का 'पितामह' कहा जाता है।

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दादा साहब फालके, सर जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट से प्रशिक्षित सृजनशील कलाकार थे। वह मंच के अनुभवी अभिनेता थे, शौकिया जादूगर थे। कला भवन बड़ौदा से फोटोग्राफी का एक पाठ्यक्रम भी किया था। उन्होंने फोटो केमिकल प्रिंटिंग की प्रक्रिया में भी प्रयोग किये थे। प्रिंटिंग के जिस कारोबार में वह लगे हुए थे, 1910 में उनके एक साझेदार ने उससे अपना आर्थिक सहयोग वापस ले लिया। 

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फाल्के ने अपना करियर बतौर फोटोग्राफर शुरू किया। उन्होंने मशहूर चित्रकार राजा रवि वर्मा के साथ भी काम किया। यही नहीं एक जर्मन जादूगर का मेकअप भी फाल्के ही किया करते थे। साल 1909 में उन्होंने जर्मनी जाकर सिनेमा के बारे में जानकारी ली और यहीं से उनकी रुचि बढ़ने लगी।

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दादा साहब की जिंदगी में अहम मोड़ तब आया जब उन्होंने साल 1910 में 'लाइफ ऑफ क्राइस्ट' देखी। फिल्म देखने के बाद दादा साहब के मन में विचार आया कि उन्हें इसी दिशा में कार्य करना चाहिए। 

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साल 1912 में उन्होंने पहली फिल्म राजा हरिश्चंद्र बनाई जो एक मूक फिल्म थी और देश की पहली फिल्म भी। फिल्म को बनाने में कुल 15 हजार की लागत आई।

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फालके के फिल्मनिर्मिती के प्रयास तथा पहली फिल्म राजा हरिश्चंद्र के निर्माण पर मराठी में एक फिचर फिल्म 'हरिश्चंद्राची फॅक्टरी' 2009 में बनी, जिसे देश विदेश में सराहा गया। 16 फरवरी 1944 को मुंबई में 73 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था। भारत सरकार ने उनकी याद में 1969 से सिनेमा जगत का सबसे बड़ा अवॉर्ड दादा साहब फाल्के पुरस्कार की शुरुआत की। इसे सिनेमा जगत का सर्वोच्च पुरस्कार माना जाता है। 

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