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Pran पुण्यतिथि विशेष: जिनकी एक आवाज से पूरा सिनेमाहॉल थर-थर कांपने लगता था, जानिए ऐसी ही कुछ रोचक बातें

संजीवनी टुडे 12-07-2019 10:32:25

फिल्म इंडस्ट्री का एक ऐसा सितारा जिसकी एक आवाज से पूरा सिनेमाहॉल थर-थर कांपने लगता था। उन्होंने अपने जबरदस्त अभिनय और रौबदार अंदाज से सभी का मन मोह लिया लेकिन ये अभिनेता आज हमारे बीच में नहीं है। इस अभिनेता का नाम प्राण है। जिन्होंने पर्दे पर सभी प्रकार के किरदार निभाए है।


नई दिल्ली । बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री का एक ऐसा सितारा जिसकी एक आवाज से पूरा सिनेमाहॉल थर-थर कांपने लगता था। उन्होंने अपने जबरदस्त अभिनय और रौबदार अंदाज से सभी का मन मोह लिया लेकिन ये अभिनेता आज हमारे बीच में नहीं है। इस अभिनेता का नाम प्राण है। जिन्होंने पर्दे पर सभी प्रकार के किरदार निभाए है। लेकिन प्राण ने विलन के किरदार से जो छाप छोड़ी है। वह छाप आज तक कोई दूसरा नहीं कर पाया है। इनका जन्म 12 फरवरी 1920 को हुआ था। उन्होंने अपने फिल्मी करियर में करीब 350 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है और वह 6 दशक तक फिल्म इंडस्ट्री में एक्टिव रहे थे।  

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सन 1940 में उन्हें “यमला जट” नाम की पंजाबी फिल्म में पहली बार अभिनय करने का मौका मिला। इस फिल्म में उनके अभिनय को काफी पसंद किया गया। इसके बाद उन्हें लगातार काम मिलता गया। लाहौर में उन्हें ज्यादातर नकारात्मक किरदार ही मिलते थे लेकिन पहली बार दलसुख पंचोली ने हिंदी फिल्म “खानदान” में बतौर नायक मौका दिया। इस फिल्म में उस दौर की मशहूर अदाकारा और गायिका नूरजहाँ उनके संग नायिका बनी थी। 

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आजादी से पहले तक प्राण ने लाहौर में करीब 22 फिल्मो में काम किया लेकिन आजादी और बंटवारे के बाद वो मुम्बई आ गये। यहा संघर्ष का नया सिलसिला शुरू हुआ। इस दौरान उन्होंने ये नही सोचा कि खलनायक का किरदार नफरत करने वाला होता है या प्यार करने वाला। बस किरदार की जिंदगी को संजीदगी से जीने में विश्वास करने लगे। 

नब्बे के दशक में बाद उन्होंने फिल्म अभिनय के प्रस्ताव अस्वीकार करना शुरू कर दिया। हिंदी सिनेमा में अहम योगदान के लिए 2001 में उन्हें भारत सरकार के पद्म भूषण सम्मान से नवाजा गया। ही 1997 में उन्हें फिल्म फेयर के लाइफ टाइम अचीवमेंट खिताब से सम्मानित किया गया। अपने लम्बे फ़िल्मी करियर और शानदार सफलता को देखते हुए साल 2012 का दादा साहब फाल्के सम्मान दिया गया। 

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प्राण साहब फिल्मों में अपने किरदारों के लिए अलग अलग पोशाक औऱ विग प्रयोग करने के लिए भी जाने जाते थे। उनकी कुछ प्रमुख फिल्में हैं पत्थर के सनम, तुम सा नहीं देखा, बड़ी बहन, मुनीम जी, गंवार, गोपी, हमजोली, दस नंबरी, अमर अकबर एंथनी, दोस्ताना, कर्ज, अंधा क़ानून, पाप की दुनिया, मृत्युदाता आदि।

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50 और 60 के दशक में उन्होंने अधिकतर विलेन का ही रोल किया लेकिन 1967 में आई फिल्म उपकार में उनके द्वार निभाया गया मलंग चाचा के किरदार से उनकी छवि बदली। इस फिल्म में उन्होंने एक गाना भी गया और दर्शकों को रुलाया भी। इस फिल्म के बाद उन्हें विलेन के अलावा भी किरदार मिलने लगे। जंजीर फिल्म जिसने अमिताभ बच्चन को एंग्री यंग मैन के रूप में स्थापित किया था उसमें प्राण द्वारा निभाया गया पठान का किरदार आज भी लोगों को हीरो के रोल से ज्यादा याद है। 

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उनकी शादी 1945 में शुक्ला अहलूवालिया से हुई और शादी के बाद उनके तीन बच्चे दो बेटे अरविंद और सुनील और एक बेटी पिंकी हुई। 12 जुलाई 2013 में काफ़ी बीमार होने के बाद प्राण साहब हमेशा हमेशा के लिए इस दुनिया को छोड़ के चले गए थे। 

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