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प्रकाश झा की फिल्म 'परीक्षा' का मूल किरदार है गया के रिक्शा चालक का बेटा

संजीवनी टुडे 07-08-2020 17:04:45

प्रकाश झा की फिल्म परीक्षा गुरुवार को जी-5 पर रिलीज हुई है। इसमें बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद को एसएसपी रांची के किरदार में दर्शाया गया है जो रिक्शा चालक के पुत्र को पढ़ाते हैं।


गया। प्रकाश झा की फिल्म 'परीक्षा'  गुरुवार को जी-5 पर रिलीज हुई है। इसमें बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद को एसएसपी रांची के किरदार में दर्शाया गया है जो रिक्शा चालक के पुत्र को पढ़ाते हैं। शिक्षा से जीवन में परिवर्तन की कहानी फिल्म परीक्षा का मूल सार है। 

'परीक्षा' फिल्म में रिक्शा चालक के मूल किरदार के  रुपहले पर्दे पर आने के पीछे  अभयानंद के साथ  गया के मैखलौटगंज मुहल्ले के श्रीराम चंद्र प्रसाद वर्णवाल के पुत्र शुभम कुमार की कहानी रही है।श्रीरामचंद्र प्रसाद वर्णवाल ठेला रिक्शा चालक थे।शुभम कुमार वर्णवाल ने अभयानंद के मार्गदर्शन में मगध सुपर 30 में दो वर्षों तक पढ़ कर एनआईटी, जयपुर से पास किया और मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड में बतौर अभियंता उसे नौकरी मिल गई।

फिल्म 'परीक्षा' की कहानी का संदेश है कि छात्रों के जीवन में शिक्षा का महत्वपूर्ण स्थान है।गरीब और जरूरतमंद बच्चों के सपनों को शिक्षा रुपी पंख लगाने से उन्हें आसमान में उड़ने में मदद होती है। शिक्षा से समाज में सुप्त क्रांति लायी जा सकती है। इसका उदाहरण है दक्षिण बिहार के नक्सल प्रभावित इलाका जहां छात्रों के जीवन में शिक्षा से क्रांतिकारी परिवर्तन आया है।इस मूल मंत्र का प्रसार-प्रचार नक्सल प्रभावित इलाकों से आईआईटी व एनआईटी में प्रवेश पाने वाले छात्रों से  संभव हो पाया है। अत्यंत ही गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र-छात्राएं मगध सुपर 30 के माध्यम से आज देश के लब्ध प्रतिष्ठ तकनीकी शिक्षा संस्थानों में हैंं या पास आउट होकर अच्छे वेतन पाकर  जीवन यापन कर रहे हैं। 

गया जिले के अति नक्सल प्रभावित लुटुआ ओपी के बाबूरामडीह गांव के अश्वनी गुंजन ने एनआईटी, जमशेदपुर से बीटेक किया है।लुटुआ और आसपास के इलाके में आज भी  भारी संख्या में नक्सली आते- जाते हैं। यह दक्षिण बिहार के सबसे मोस्ट वांटेड नक्सली कमांडर संदीप यादव का इलाका है जहां से अब छात्र बंदूक के साए से निकल कर समाज की मुख्य धारा में शिक्षा पाकर  निकल रहे हैं और नक्सल प्रभावित इलाके के और बच्चों के रोल माडल के रूप में सामने हैंं।

स्वीटजरलैंड के ज्यूरिख स्थित अंतरराष्ट्रीय भौतिक विज्ञान प्रयोगशाला में आईआईटी दिल्ली से एमटेक चैतन्य आर्य का पीएचडी करने के लिए चयन हो गया है। चैतन्य आर्य के स्वर्गीय पिता वित्तरहित शिक्षक थे। आर्थिक रूप से कमजोर चैतन्य आर्य को अभयानंद के मार्गदर्शन में संचालित मगध सुपर 30  उस मुकाम तक पहुंचने में मददगार बना । ज्यूरिख की उस प्रयोगशाला में शोध करना अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। वहां के चार शोधकर्ताओं को नोबेल पुरस्कार मिला है।चैतन आर्य  देश के लिए भविष्य का एक बड़ा वैज्ञानिक   होगा।यह विश्वास चैतन्य आर्य के साथ पढ़ाई करने वाले छात्रों के साथ-साथ मेंटर श्री अभयानंद और मगध सुपर 30 के संचालकों को है।

स्विगी कंपनी में बिजनेस एनालिस्ट के पद पर चयन  नवादा के मुकुल कुमार का हुआ है। वह नवादा जिले के नक्सल,जातीय हिंसा और वर्ग संघर्ष के लिए कुख्यात वारसलीगंज का है। अत्यंत ही गरीब परिवार से आने वाले मुकुल कुमार के जीवन में शिक्षा के कारण यह बदलाव आया है।साथ ही मुकुल अपने घर और आसपास के इलाके के बच्चों को समय मिलते ही पढ़ाने लगता है। 

अरवल जिले के सुमित कुमार आईआईटी,गौहाटी से बीटेक है। बहुत ही साधारण परिवार से आने वाले सुमित कुमार के पैतृक गांव के आसपास का इलाका प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी और रणवीर सेना का कार्यक्षेत्र रहा है। ऐसे में पारिवारिक पृष्ठभूमि उच्च शिक्षा में बाधक बनी हुई थी। सुमित ने बताया कि मगध सुपर 30 में पहले दिन पूर्व डीजीपी अभयानंद से पहली मुलाकात ने जीवन में सोचने- समझने की दिशा बदल दी। इस समय एडोब कंपनी में काफी अच्छे पैकेज पर काम कर रहे सुमित कुमार का कहना है कि यदि गरीब और जरुरतमंद बच्चों को मौका मिले तो वे शिक्षा से अपने जीवन में आमूल परिवर्तन ला सकते हैं।

आईआईटी,दिल्ली से इलेक्ट्रिक ब्रांच से बीटेक सोनू गुप्ता गया के अति नक्सल प्रभावित इमामगंज प्रखंड के पकरीगुरिया गांव के हैं। अत्यन्त ही गरीब परिवार से आने वाले सोनू गुप्ता का चयन सैमसंग इंडिया की सीएस ब्रांच में हुआ है।सोनू गुप्ता आज इलाके के बच्चों के लिए रोल मोडल हैंं। 

रिशु राज के लिए बेगूसराय जिले के तेघड़ा जैसे छोटे कस्बे से आईआईटी,दिल्ली तक के सफर में उसकी पारिवारिक आर्थिक पृष्ठभूमि बहुत बड़ी बाधा थी। बकौल रिशु मां-पापा ने किसी कोचिंग सेंटर में दाखिला कराने में अपनी असमर्थता व्यक्त कर दी थी लेकिन अभयानंद का मार्गदर्शन उसके सपने को साकार करने में मददगार साबित हुआ।


गया शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत रेड लाइट एरिया सराय मोड़ पर एक ठेले पर पान बेचते एक दुर्बल शरीर के व्यक्ति को आज भी देखा जा सकता है। उस पान बेचने वाले का पुत्र शुभम कुमार वर्णवाल है।शुभम कुमार वर्णवाल आईआईटी, खड़गपुर में केमिकल ब्रांच का छात्र है।शुभम कुमार वर्णवाल की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय है लेकिन समाज का सहयोग, अभयानंद के मार्गदर्शन और मगध सुपर 30 में दो साल रहने के बाद शुभम के जीवन की दिशा ही बदल गई। 


गया के बोधगया के काफी निर्धन परिवार से आने वाले एक ट्रैक्टर चालक का पुत्र शंकर रविकांत है। आईआईटी, गौहाटी से बीटेक शंकर रविकांत आज ओडिशा के बालासोर स्थित इंडियन आयल कंपनी में सीनियर प्रोजेक्ट इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। शंकर रविकांत इसके लिए अभयानंद और मगध सुपर 30 को धन्यवाद देता है जहां से प्राप्त शिक्षा ने उसके जीवन को बदल दिया। 

औरंगाबाद के नक्सल प्रभावित गोह थाना के महमद्दीपुर गांव के एक छोटे से कपड़ा दुकानदार शारदा प्रसाद की पुत्री रेणु कुमारी ने आईआईटी, दिल्ली से टेक्सटाइल एंड फाइबर से बीटेक डिग्री प्राप्त की है। रेणु कुमारी का मानना है कि नक्सल प्रभावित और गरीब परिवार उसकी उच्च शिक्षा प्राप्त करने में बाधक था। लेकिन अभयानंद सर और मगध सुपर 30 के कारण आज वह ओस्की कंपनी ज्वाइन करने मे सफल रही है। 

मगध सुपर 30 के दूसरे बैच की गया शहर के एक अल्प आय परिवार से आने वाली वंदना कुमारी एनआईटी कालीकट से बीटेक है।एक ही कमरे में परिवार रहता था। वंदना आज एक बड़ी कंपनी इंफोबाक्स, बंगलुरू में काफी हैंडसम सैलरी पर कार्यरत हैं। वंदना अपने जीवन में बदलाव के लिए शिक्षा की सुविधा मिलना बताती है। 

औरंगाबाद के अति नक्सल प्रभावित देव थाना क्षेत्र अंतर्गत भवानीपुर गांव के आकाश सिंह के लिए क्षेत्र में व्याप्त नक्सली संगठन का आतंक और उच्च शिक्षा के लिए इलाके में कोई शिक्षण संस्थान का न होना बाधक था। आकाश अपने पिता  की माली हालात को लेकर अपने भविष्य को लेकर चिंतित रहा करता था।उसके पिता एक निजी स्कूल के शिक्षक हैंं। आकाश ने बताया कि मगध सुपर 30 और पूर्व डीजीपी अभयानंद के मार्गदर्शन ने उसे आईआईटी, रुड़की के केमिकल ब्रांच में दाखिला लेने में मदद की।

गया शहर के बारी रोड स्थित मां दुर्गा मंदिर के पुजारी के इकलौते पुत्र मृत्युंजय पांडेय हैंं। आर्थिक  मोर्चे पर पुजारी जी अपने  पुत्र मृत्युंजय को  प्रतिष्ठित तकनीकी शिक्षा संस्थान तो क्या,  उच्च शिक्षा के लिए किसी अच्छे कालेज में दाखिला कराने में असमर्थ थे। अभयानंद ने अपने प्रथम बैच के लिए मृत्युंजय पांडेय का चयन किया। मृत्युंजय पांडेय ने  आईआईटी प्रवेश परीक्षा के माध्यम से मेरीन इंजीनियरिंग से बीटेक किया और फिर  कैट परीक्षा से एमबीए करने के आज अमूल कंपनी के बिहार- झारखंड का वरिष्ठ अधिकारी बन गया। 

मगध सुपर 30 के प्रथम बैच का छात्र साहिल सुमन है। गया की पटवा टोली के एक मजदूर के पुत्र साहिल सुमन ने आईआईटी प्रवेश परीक्षा से कोलकाता के मैरी कोलकाता से बीटेक किया है।एक कमरे में अपने परिवार के साथ रहने वाले साहिल सुमन अब खुशहाल जीवन जी रहे हैं। इसके लिए साहिल सुमन अभयानंद जैसे गुरु और मार्गदर्शक को पूरा श्रेय देते हैं। 

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