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B'day spl: देश के सर्वश्रेष्ठ म्यूज़िक कम्पोज़र 'पंचम दा', महमूद ने दिया था बर्मन को पहला अवसर

संजीवनी टुडे 27-06-2019 08:03:06

मशहूर सिंगर और कंपोज़र राहुल देव बर्मन यानि आर डी बर्मन का आज 80वां जन्मदिन है। इनका जन्म 27 जून 1939 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने 4 जनवरी 1994 को मुंबई में अंतिम सांस ली थी। पंचम दा को बचपन से ही संगीत का काफी शौक था। जब वह नौ वर्ष के थे तब उन्होंने पहला गाना कम्पोज कर लिया था।


नई दिल्ली । देश के सर्वश्रेष्ठ म्यूज़िक कंपोज़र के तौर पर अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले मशहूर सिंगर और कंपोज़र राहुल देव बर्मन यानि आर डी बर्मन का आज 80वां जन्मदिन है। इनका जन्म 27 जून 1939 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने 4 जनवरी 1994 को मुंबई में अंतिम सांस ली थी। पंचम दा को बचपन से ही संगीत का काफी शौक था। जब वह नौ वर्ष के थे तब उन्होंने पहला गाना कम्पोज कर लिया था। इस गाने 'ऐ मेरी टोपी पलट के आ' को उनके पिता ने 'फंटूश' (1956) में उपयोग किया था। इसके बाद फिल्म ‘प्यासा’ (1957) के गीत ‘सर जो तेरा चकराए’ की धुन, उनके द्वारा बचपन में बनाई गई थी। फिर उन्होंने “कागज़ के फूल” (1957), “सोलवा साल” (1958) और “चलती का नाम गाड़ी” (1958) जैसी फिल्मों में अपने पिता की सहायता की।

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आपको बता दें की वह कंपोजर सचिन देव बर्मन के बेटे थे। पंचम दा ट्रैवल करने के दौरान कई गाने कंपोज करते थे। "R D Burman - The Prince of Music" किताब के मुताबिक, एक बार वह राजेश खन्ना के साथ बॉम्बे से दिल्ली फ्लाइट में सफर कर रहे थे। उसी दौरान उन्होंने 1971 में आई फिल्म कटी पतंग के लिए 'ये जो मोहब्बत है' गाना कंपोज किया था।

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एसडी बर्मन की वजह से आरडी को फिल्म जगत के सभी लोग जानते थे। पंचम को माउथआर्गन बजाने का बेहद शौक था। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल उस समय ‘दोस्ती’ फिल्म में संगीत दे रहे थे। उन्हें माउथआर्गन बजाने वाले की जरूरत थी। वे चाहते थे कि पंचम यह काम करें, लेकिन उनसे कैसे कहें क्योंकि वे एक प्रसिद्ध संगीतकार के बेटे थे। जब यह बात पंचम को पता चली तो वे फौरन राजी हो गए। मेहमूद से पंचम की अच्छी दोस्ती थी। मेहमूद ने पंचम से वादा किया था कि वे स्वतंत्र संगीतकार के रूप में उन्हें जरूर अवसर देंगे। ‘छोटे नवाब’ के जरिये मेहमूद ने अपना वादा निभाया।

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फिल्म संगीत निर्देशक के रूप में बर्मन की पहले सफल फिल्म तीसरी मंजिल (1966) रही। इसके लिए बर्मन ने गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी को उनके नाम की सिफारिश नासिर हुसैन के पास करने का श्रेय दिया था, जो फिल्म के प्रोड्यूसर और लेखक थे।

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1970 में बर्मन राजेश खन्ना की फिल्मो में किशोर कुमार के गीतों के साथ काफी प्रसिद्ध हुए। 1970 में शक्ति सामंता द्वारा निर्देशित फिल्म कटी पतंग (1970) एक म्यूजिकल सुपरहिट फिल्म साबित हुए, और यही उनके सफलता की शुरुवात भी थी। इस फिल्म का गीत ‘यह शाम मस्तानी’ और ‘यह जो मोहब्बत है’ को किशोर कुमार ने गाया था, जो काफी कम समय में ही लोकप्रिय बन चुके थे।

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1971 में बर्मन की सुपरहिट रचनाओ में बुड्ढा मिल गया का ‘रात कलि एक ख्वाब मे’ और कारवाँ फिल्म का ‘पिया तु अब तो आजा’ शामिल है। फिल्म कारवाँ में संगीत की रचना के लिए उनका पहली बार फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामनिर्देशन किया गया था।

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फिल्म हम किसीसे कम नही (1977) में बर्मन द्वारा रचित ‘क्या हुआ तेरा वादा’ गीत के लिए मोहम्मद रफ़ी को बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का राष्ट्रिय फिल्म अवार्ड मिला था। इसके बाद उन्होंने बहुत सी फिल्मो के लिए लोकप्रिय संगीत की रचना की, उन फिल्मो में मुख्य रूप से कसमे वादे (1978), घर (1978), गोलमाल (1979) और ख़ूबसूरत (1980) शामिल है। 1981 में उन्होंने फिल्म रॉकी, सत्ते पे सत्ता और लव स्टोरी के लिए लोकप्रिय संगीत की रचना की थी।

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बर्मन की पहली पत्नी रीता पटेल थी, जिनसे वे दार्जिलिंग में मिले थे। रीता उनकी फैन ने अपने दोस्तों से बर्मन से मिलने की शर्त लगायी थी। उन्होंने 1966 को शादी की और 1971 में उनका तलाक हो गया था। परिचय (1972) फिल्म का गाना मुसाफिर हूँ यारों की रचना बर्मन ने तब की थी जब अलग होने के बाद वे होटल में रह रहे थे।

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इसके बाद बर्मन ने 1980 में आशा भोसले के साथ शादी कर ली। साथ में उन्होंने बहुत से सुपरहिट गीतों को रिकॉर्ड किया और बहुत से लाइव प्रदर्शन भी किये। जबकि अपने जीवन के आखिरी समय में वे दोनों साथ में नहीं रह पाए।

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इसके बाद बर्मन को अपने जीवन में आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। उनकी माँ मीरा की मृत्यु उनकी मृत्यु के 13 साल बाद 2007 में हुई थी, अपने बेटे की मृत्यु से कुछ समय पहले ही उनकी माँ अल्जेईमर से पीड़ित थी। उन की मृत्यु से कुछ समय पहले ही वह अपने पुराने घर पर रहने लगी थी।

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बॉलीवुड सिनेमा में संगीत के भविष्य की रचना के लिये बर्मन बहुत सी संगीत संस्थाओ से भी जुड़े हुए थे। उन्हें तीन फिल्मफेयर अवार्ड से नवाजा जा चूका है, जिनमे से एक उन्हें उनकी मृत्यु के बाद दिया गया था।

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