संजीवनी टुडे

Batla House Movie Review: एक बार फिर जॉन अब्रहाम ने दी शानदार परफॉर्मेंस

संजीवनी टुडे 16-08-2019 15:01:48

जॉन अब्रहाम ने मद्रास कैफे और परमाणु- द स्टोरी ऑफ़ पोखरण के बाद एक बार फिर रियल लाइफ़ से जुड़ी घटना को फ़िल्म का विषय बनाया है। बताना चाहेंगे कि बाटला हाउस दिल्ली में 2008 में हुई एनकाउंटर की एक घटना पर आधारित है।


नई दिल्ली । जॉन अब्रहाम ने मद्रास कैफे और परमाणु- द स्टोरी ऑफ़ पोखरण के बाद एक बार फिर रियल लाइफ़ से जुड़ी घटना को फ़िल्म का विषय बनाया है। बताना चाहेंगे कि बाटला हाउस दिल्ली में 2008 में हुई एनकाउंटर की एक घटना पर आधारित है, जिसमें दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर की मृत्यु हो गयी थी। इस एनकाउंटर को लेकर कई सवाल उठाये गये थे।

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19 सितंबर, 2008 को जामिया नगर के बाटला हाउस इलाके में दो संदिग्ध आतंकवादी आतिफ अमीन और मुहम्मद साजिद को पुलिस ने मार गिराया था। ये दोनों आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े थे। जॉन पुलिस अफ़सर के रोल में काफ़ी असरदार दिख रहे हैं। 

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इसा फिल्म का निर्देशन निखिल आडवाणी ने किया है। फ़िल्म में मृणाल ठाकुर और रवि किशन अहम भूमिकाओं में नज़र आएंगे। जॉन और निखिल फ़िल्म को सह निर्माता भी हैं। फिल्म में जॉन डीसीपी संजीव कुमार यादव की भूमिका में हैं।

फिल्म की कहानी स्पेशल सेल के एसीपी संजीव कुमार यादव (जॉन अब्राहम). फिल्म की शुरुआत होती है 19 सितम्बर, 2008 से. एसीपी संजीव और उसकी पत्नी नंदिता की शादीशुदा जिंदगी खत्म होने की कगार पर है. यही वो दिन भी है जब संजीव के साथियो को दिल्ली में इंडियन मुजाहिदीन के एक ठिकाने का पता चलता है। मुजाहिदीन के दो आतंकी मर गिराए जाते हैं और इसके बदले में स्पेशल सेल के अफसर केके (रवि किशन) को अपनी जान गंवानी पड़ती है। अब संजीव को आने वाली हर बात का सामना अकेले करना है। जैसे-जैसे इस एनकाउंटर की जांच आगे बढ़ती है, राजनीतिक दल इसमें अपनी टांग अड़ाने लगते हैं। यहां संजीव कुमार अब पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) यानी किसी हादसे के बाद होने वाले स्ट्रेस की समस्या से जूझ रहा है। उसे अपनी शादी को बचाना है, केस को सुलझाना है, इस्लामी कट्टरपंथियों से जूझना है और कोर्टरूम में डिफेन्स के वकील (राजेश शर्मा) को मात देनी है। 

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निर्देशक ने जिस तरह से इस जटिल कहानी को सेल्यूलाइट पर उकेरा है वह वाकई तारीफे काबिल है| सशक्त और बुद्धिमत्ता से परिपूर्ण स्क्रीनप्ले, मजबूत कहानी और लगातार आप को व्यस्त रखने वाला ट्रीटमेंट फिल्म को एक अलग ही मुकाम पर ले जाता है।  

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अभिनय की बात करें संजीव के किरदार में जॉन अब्राहम कि यह अब तक की सबसे बेहतरीन फिल्म मानी जा सकती है। नंदिता यादव( मृणाल ठाकुर) जिन्होंने लव सोनिया जैसी संजीदा फिल्में की है उन्होंने शानदार परफॉर्मेंस दिया है। इसके अलावा राजेश शर्मा, मनीष चौधरी की अनुभवी उपस्थिति फिल्में और जान डालती है। 

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कुल मिलाकर बाटला हाउस एक मजबूत फिल्म है जो एक जटिल विषय पर बनाई गई है। इस जटिलता में इस बात का पूरा ध्यान रखा गया है किया दर्शकों का ध्यान एक पल के लिए भी इधर उधर ना जाए जिसमें बटला हाउस पूर्णता सफल हुई है।

गोवर्मेन्ट एप्रूव्ड प्लाट व फार्महाउस मात्र रु. 2600/- वर्गगज, टोंक रोड (NH-12) जयपुर में 9314166166

 

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