संजीवनी टुडे

बिहार के IAS सौरभ के तबादले से भावुक हुआ सहरसा

संजीवनी टुडे 02-11-2017 20:38:43

Sahara became emotional with transfer of Bihars IAS Saurabh

नई दिल्ली। रेलवे स्टेशन से निकलते ही सब्जी मंडी मिलती थी और मंडी ऐसी कि साइकिल निकालना भी एक तरह से मुसीबत बन जाती है। कहते हैं सौरभ ने वहां के व्यवसाइयों से बात कर एक सुपर मार्केट बनवाया और सब्जी विक्रेताओं को वहां शिफ्ट कर दिया। अचानक शहर का सबसे गंदा और जाम वाला इलाका खुला-खुला लगने लगा। लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि अगर यह काम इतना आसान था तो पहले क्यों नहीं हुआ, मगर सौरभ रुके नहीं। 

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अगला मोरचा मत्स्यगंधा झील के पुनरोद्धार को बनाया, सूखी हुई और गंदगी से भरी झील जो एक बेकार तालाब में बदल गयी थी। उसका कायाकल्प हुआ और अक्टुम्बर में वहां बोटिंग होने लगी, यह भी 30 साल से अटका हुआ मामला था। 

  

2014 के बैच के आइएएस सौरभ मूलतः राजस्थान की निवासी हैं, साहित्य के शौकीन सौरभ की पसंदीदा किताब फणीश्वरनाथ रेणु की मैला आंचल रही है, जिस वजह से उन्होंने बिहार कैडर चुना और उन्हें पूर्णिया में पोस्टिंग भी मिली। अगली पोस्टिंग सहरसा की थी, वह भी कोसी का ही इलाका था। यहां आकर उन्होंने जंग खायी प्रशासनिक व्यवस्था को कुरेदना शुरू किया, उनका पहला मोरचा था सहरसा की सब्जी मंडी को जाम से निजात दिलाना। जो लोग सहरसा नहीं गये हैं, वे सोच भी नहीं सकते कि सब्जी मंडी की दुर्दशा किस स्तर की थी। 

मई में सहरसा आये सौरभ ने कई मोरचे पर काम किया और सफलता हासिल की, चाहे शहर की ट्रैफिक का मसला हो या राशन डीलरों की समस्या। वे उस वक्त देश भर में चर्चा में आ गये जब हेलमेट और जूते नहीं पहने होने के कारण उन्होंने अपने बॉडीगार्ड से ही जुर्माना वसूल लिया गया। 

मतलब यह कि सौरभ ने अपने छोटे से कार्यकाल में यह साबित कर दिया कि अगर अफसर काम करना चाहे तो राह की कमी नहीं है और ऊपरी दबाव की बात भी महज बहानेबाजी ही है। उनका तबाला नीतीश जी के गृह जिले में नगर आयुक्त के रूप में किया गया है जाहिर सी बात है कि यह एक इनाम ही है मगर फिर भी सहरसा वालों के लिए उनका तबादला किसी झटके से कम नहीं है। उन्हें लगता है कि माफियाओं ने उनका तबादला करा दिया है।

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वे काश एक साल और रह लेते तो शहरवासियों को कई समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है। सोशल मीडिया पर लगातार उनका तबादला रोके जाने के कैंपेन चल रहे हैं, लोग उनके समर्थन में अपना प्रोफाइल बदल रहे हैं। काश ऐसे अधिकारी और भी होते, ताकि सहरसा वालों को यह नहीं लगता कि सौरभ जायेंगे तो पता नहीं कौन आयेगा। 

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