संजीवनी टुडे

नोटबंदीः पहले की तुलना में व्यवस्था बेहतर, फिर भी लम्बी कतारें

संजीवनी टुडे 01-12-2016 20:19:02

Notebandi System better than before but long queues

देहरादून। उत्तराखंड में नोटबंदी का असर पहले की तुलना में काफी बेहतर हुआ है, लेकिन आज भी समस्याएं हैं वेतन का दिन महीने की पहली तारीख होती है। तमाम लोगों के वेतन खाते में आ भी गए हैं लेकिन बैंको से पैसा निकालना आसान नहीं रहा है। उत्तराखंड के बैंक भी नकदी के संकट से जूझ रहे है जिसका प्रभाव वेतन भोगियों पर भी पड़ रहा है। हालांकि 8 नवम्बर को हुई नोटबंदी को 23 दिन हो गए है। यह भी सच है कि कतारें पहले की तुलना में बहुत कम हुई हैं, लेकिन वेतन का दिन होने के कारण आज बैंको में भारी मारा-मारी रही। इसीलिए संभवतरू भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर उर्जित पटेल ने 10 दिनों तक बैंको और एटीएम में केश उपलब्ध कराने की तैयारी पर विशेष ध्यान देने को कहा है। यह 10 दिन भी कुछ लोगों के लिए विशेष चुनौती पूर्ण रहने वाले हैं। 

राजधानी उत्तराखंड के ज्यादातर बैंक अब भी छोटें नोटों की किल्लत झेल रहे हैं ऐसे में पहली तारीख को उनके ही खाते में लोगों का वेतन पहुंचता है पर 50-100 के छोटे नोटों के साथ ही 500-2000 नोट भी बैंको के पास कम मात्रा में उपलब्ध है। नोटों की कमी के कारण वेतन भोगियों के सामने समस्याएं आने वाली है। हालांकि बाजार में 500 रू. के नए नोटों की संख्या पहले से बढ़ी है और लोग पहले की तुलना में अधिक सुविधा महसूस कर रहे हैं लेकिन वेतन का दिन लोगों पर भारी पड़ा। यही स्थिति पेंशन भोगियों की भी है। जिनको हर महीने की पहली तारीख को पेंशन मिलती है यही कारण है कि बैंको तथा एटीएम में पिछले दिनों की तुलना में आज लंबी कतारें दिखी। यह कतारें भी वेतन और पेंशन भोगियों के कारण बढ़ी है पर आम आदमी को भी समय-समय पर खर्च के लिए पैसे चाहिए जिसका प्रभाव बैंको आज दिखाई दिया। 

देहरादून के बैंको में बचत खाते में 12 हजार और चालू खाते में 25 हजार दिए गए। हालांकि बैंको का कहना था कि धनराशि होने पर धनराशि और बढ़ाई जा सकती है। वैसे पहली तारीख होने के कारण अधिकांश बैंको में दोपहर 12 बजे तक कैश खत्म हो गया था। शाम तीन बजे के बाद दोबारा नकदी आई लेकिन उसमें भी बड़े नोट थे। 500 के नोटों की कमी आज भी बनी रही। बैंकर एसोसिएशन के अध्यक्ष जगमोहन मेंहदीरत्ता का कहना है कि व्यवस्था में धीरे-धीरे सुधार आएगा। मेंहदीरत्ता का कहना है कि यदि पहले से ही तैयारी की गई होती तो यह असुविधा नहीं होनी थी लेकिन होमवर्क की कमी के कारण यह स्थिति पैदा हुई। इसकी जिम्मेदार केन्द्र सरकार और उससे जुड़े लोग हैं।

इसी संदर्भ में प्रख्यात शिक्षाविद एवं स्व. प्रो. अनूप सिंह की पत्नी श्रीमती इंदु बाला मानती है कि पहली तारीख को उनकी अपनी पेंशन तथा पति की ओर से मिलने वाली पेंशन खाते में पहुंच चुकी है। उन्होंने पेटीएम के माध्यम से कुछ लोगों का भुगतान भी कर दिया है। उन्हें कोई भी समस्या फिलहाल नहीं आ रही है। श्रीमती इंदु बाला मानती है कि कुछ लोगों को भले समस्या हो पर इस व्यवस्था के दूरगामी परिणाम लोगों को मिलने शुरू हो जाऐंगे। प्रेमनगर के पिताम्बरपुर निवासिनी श्रीमती अन्नू का मानना है कि लोग इतना प्रबंध कर चलते हैं कि एक दो दिन पैसे न मिले तो भी काम चलता है। श्रीमती अन्नू मानती है कि एटीएम से दो तीन दिनों के खर्च के लिए पैसे निकाल लिए थे ऐसे में उन्हें महीने की पहली तारीख का इंतजार नहीं करना पड़ा। 

उन्हें इस व्यवस्था से कोई समस्या नहीं हो रही है। अमिता सिंह जो अभी शिक्षा प्राप्त कर रही हैं उनका कहना है कि नोट बंदी से समस्याएं तो आई है। अमिता का कहना है कि एटीएम में छोटे नोट नहीं है बड़े नोट मिलते हैं। 2000 के नोट से सामान खरीदने पर दुकानदार फुटकर देने पर आनाकानी करते हैं तथा कह देते हैं कि खुले नहीं है जिसके कारण पैसा होने के बाद भी बेगाना होना पड़ता है। अमिता का कहना है कि छोटे नोट आ जाए तो लोगों की समस्या का और जल्दी समाधान हो जाएगा। वह इस व्यवस्था की तारीफ करती है।

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