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पेट्रोल और नेताओं के भाव
हिंदुस्थान मेहनतकश लोगो का देश,चिथड़ों में पसीने से तर होते मजदूरी कर मेहनत से खाने वालों का देश। भाव का प्रभाव यहा बहुत मायने रखता है। चाहे वस्तु साधारण हो या असाधारण। भाव की महिमा ही न्यारी है,यह कम ...
लोकतंत्र में हिंसा की संस्कृति के दाग
भारत का लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, इसको सशक्त बनाने की बात सभी राजनैतिक दल करते हैं, सभी ऊंचे मूल्यों को स्थापित करने की, आदर्श की बातों के साथ आते हैं पर सत्ता प्राप्ति की होड़ में सभी ए...
कब तक केन्द्रीय सत्ता की कठपुतली बने रहेंगे राज्यपाल?
- योगेश कुमार गोयल उच्चतम न्यायालय द्वारा कर्नाटक विधानसभा में 19 मई की शाम को शक्ति प्रदर्शन का आदेश दिए जाने के पश्चात् शक्ति परीक्षण से पहले ही भाजपा की येदियुरप्पा सरकार के धराशयी हो जाने के बा...
कश्मीर में अपनी कब्र खोदते पत्थरबाज
भारतीय सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने कश्मीर के पत्थरबाजों को अब कायदे से समझा दिया है। उन्हें बता दिया गया है कि उनकी तथाकथित ‘आजादी’का खवाब कभी पूरा होने वाला नहीं है। मैं स्पष्ट कर दूं क...
कांग्रेस अपने गिरेबां में भी तो झांके
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह सहित कांग्रेस के दूसरे नेताओं ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को चिट्ठी लिखकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भाषण-शैली पर आपत्ति दर्ज कराई है। कर्नाटक के हुबली में दिए गए...
आखिर हूँ तो नारी ही ना , पढ़ीलिखी हुई तो क्या ?
रोज़ की तरह आज भी घर से निकलते निकलते देर हो गई थी कॉलेज जाने को बस जो पकड़नी थी लेकिन क्या करूँ ये रोजमर्रा के काम पीछा ही नही छोड़ते।पहले तो सब को उठाने के लिए मुर्गे की तरह बांग देनी पड़ती है , फिर नवा...
पुस्तकालय ज्ञान का अकूत भण्डार: बनाये अपना मित्र
पुराने समय में पुस्तकें ही मनुष्य के ज्ञान वर्धन एवं मनोरंजन का प्रमुख माध्यम हुआ करती थी । आज जबकि इंटरनेट एवं सुचना प्रोधोगिकी का युग आ गया है और सभी सूचनाएं नेट पर उपलब्ध हैं, पुस्तकों का महत्व कम ...
वाराणसी हादसे से उपजे सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में जिस तरह निर्माणाधीन फ्लाईओवर का एक हिस्सा गाड़ियों के रेले पर जा गिरा, वह कई स्तरों पर लापरवाही एवं कोताही का संकेत देता है। यह कैसा विक...
हमारा नम्बर कब और कैसे आएगा……
आज उनके गुस्से का पारा सातवें आसमान पर था,वे दुखी भी बहुत हो रहे थे।उनका गुस्सा होना स्वाभाविक भी था।कारण भी जबरजस्त था।उनका शहर इस बार के भी स्वच्छता सर्वेक्षण में न तीन में जगह बना पाया और न ही तेरह...
निर्वाचन संबंधी सुधारो की आवश्यकता
हाल ही के कर्नाटक विधानसभा चुनावों की रैलियों में मंचों से आरोप-प्रत्यारोप के खूब दौर चले। नेताओ ने एक दूसरे को चुनौतियां भी दी। चुनावो में भागीदारी करने वाली समस्त राजनैतिक पार्टियों ने अपने बड़े नेता...
अनाथ हो चुके भक्तों के लिए एक बाबा हाजिर है…
उनका जो होना था हो चुका है,वे भजन कीर्तन के साथ ता ता थैया करने के चक्कर में अपना खुद का ठौर-ठिकाना भूल गए और अपने शिष्यों का भविष्य दाव पर लगा गए।खैर अब उन्हें अपना नया ठौर-ठिकाना मिल गया है।एक बाबाज...
क्या अब पाक सेना भी चाहती है भारत से दोस्ती
आर.के. सिन्हा पाकिस्तानी सेना का भारत से मैत्री की इच्छा जताना निश्चित रूप से अविश्वसनीय सी बात ही लगती है। उसका सारा इतिहास ही भारत विरोध से भरा पड़ा है। पर पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाज...
मोदी की विदेश नीति का हिस्सा बनी धार्मिक कूटनीति
प्रभुनाथ शुक्ल प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति में धर्म और संस्कृति एक कूटनीतिक हिस्सा रहा है। जब भी वह विदेश यात्रा पर होते हैं तो संबंधित मुल्कों के धार्मिक और पर्यटक स्थलों पर जरुर जाते ह...
क्या वाकई पूरा हो चुका है मनुष्य का विकास?
- योगेश कुमार गोयल जो व्यक्ति भविष्य के मानव को और अधिक सुधरे हुए रूप में देखने की कल्पना करते हैं, उनको अब लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज के प्रो. स्टीव जोंस के तर्क से निराशा ही होगी। दरअसल प्रो. जोंस...
पत्थरबाज आंतकियों को सख्त सबक सिखाना होगा
धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएं कम होने की बजाय बढ़ती जा रही हैं। पिछले दिनों पत्थरबाजों ने पत्थरबाजी करते हुए कश्मीर घूमने आए एक पर्यटक की जान ले ली। पर्यटक की मौत के बाद प...
झूठ क्यों बोलते हैं राहुल गांधी?
लोकेन्द्र सिंह (लेखक विश्व संवाद केंद्र, भोपाल के कार्यकारी निदेशक हैं।) कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और उनके राजनीतिक सलाहकारों का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संबंध में अध्यय...
जनप्रतिनिधियों की सुविधाओं पर उठते सवाल
ललित गर्ग   सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित वह कानून निरस्त कर दिया है जिसके मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगले में रहने की सुविधा दी गई थी। कोर्ट का कहना है...
कृषि भूमि सुधार का आधार जैविक खेती
सुरेश हिन्दुस्थानी वर्तमान में देश में इस बात के लिए गंभीरता पूर्वक चिंतन होने लगा है कि रासायनिक खादों के चलते कृषि भूमि में जो हानिकारक बदलाव आए हैं, उसे कैसे दूर किया जाए। इस बारे में केन्द्र सरका...
सुप्रीम कोर्ट में सबकुछ ठीक नहीं है, इन जजों के शब्दों में उनकी लाचारी को समझिए
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सुप्रीम संकट अब भी जारी है। मीडिया में आ रही खबरों और सीनियर जजों के शब्दों में झलकती लाचारी को समझने की कोशिश करें तो आसानी से समझ में आ जाएगा की जिनपर देश को न्याय देने ...
कावेरी पर राजनीतिक कालिमा क्यों?
  एक बार फिर कावेरी जल बंटवारे के मसला चर्चा में है। अदालत ने जल बंटवारे के बारे में फैसला फरवरी में ही सुना दिया था। दरअसल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर...
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