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खुशहाल बचपन हमारी सोच का संकल्प बने
आजाद भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री पंडित जवाहरलाल नेहरु के जन्मदिवस 14 नवम्बर को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है, हममें से कई लोग सोचते हैं कि बाल दिवस को इतने उत्साह या बड़े स्तर पर मनाने की क्या जरूरत है। परन्तु आज देश का बचपन जिस बड़े पैमाने पर दबाव, हिंसा, शोषण का शिकार है, बाल दिवस मनाते हुए हमें बचपन की विडम्बनाओं एवं विसंगतियों से जुड़ी त्रासदियों को समाप्त करना चाहिए।
रामलला के हनुमान बने वकील पराशरण
रामायण काल में जिस तरह हनुमान जी ने लंका पर विजय पाने में भगवान श्री राम का साथ देकर एक सच्चे साथी की भूमिका निभाई थी। उसी तरह राम जन्मभूमि विवाद में अपनी दमदार दलीलों के बल पर सुप्रीम कोर्ट में रामलला के पक्ष में फैसला कराने वाले वरिष्ठ वकील केशव पराशरण ने भी रामलला भूमि प्रकरण में आज के हनुमान का रोल निभाया है।
आतंक के डाकू महोदय डॉक्टर के भेष में
तीन दिन पहले हमें एक प्यारी सी खाँसी ने घेर लिया। जब भी हमें खाँसी आती हम खों-खों करते विलंबित लय में झूम उठते। हमारे फेंफड़े हारमोनियम के पर्दे की तरह उठने-गिरने लगते। तब प्यारे से दाँत सितार की तरह झनझना उठते। इधर हमें खाँसी होती और उधर पूरा घर कत्थक डांस फरमाने लगता।

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