संजीवनी टुडे

विश्व पर्यावरण दिवस: कोरोना में पर्यावरण का नया जन्म

लेखिका- प्रिया आसोपा

संजीवनी टुडे 05-06-2020 16:18:52

विश्व में समान रूप से मनाया जाने वाला यह दिन जिसे हम पर्यावरण दिवस के नाम से जानते है, वह पिछले कुछ सालो से सिर्फ एक पुण्यतिथि के नाम की तरह ही रह गया है।


न्यूज़ डेस्क। विश्व में समान रूप से मनाया जाने वाला यह दिन जिसे हम पर्यावरण दिवस के नाम से जानते है, वह पिछले कुछ सालो से सिर्फ एक पुण्यतिथि के नाम की तरह ही रह गया है। जिस तरह पुण्यतिथि पर घर पर किसी को खाना खिला कर बुजुर्गो को याद करते हैं। उसी तरह 5 जून को अपने घर, कार्यस्थल या समाज सेवा के भाव से पौधरोपण कर लोग पर्यावरण दिवस मनाते हैं। ऐसे कई लोग अखबार या सोशल मीडिया पर पौधे के साथ वाली तस्वीरों में दिख जायेंगे, लेकिन बाद में उनमें से कई पौधे ऐसे भी होते है जिन्हे पानी तक नसीब नहीं होता है।   कुछ तो बस ऐसे ही ट्रेंडी फोटोज के हैशटैग में शामिल होने के लिए एक नाजुक से पौधे की बलि चढ़ा देते है। 

यही सब पिछले कुछ सालों से चला आ रहा है और शायद आगे भी ऐसा ही होगा, लेकिन इस बार 2020 का पर्यावरण दिवस हर बार से कुछ अलग है। इसमें न तो आपको अनगिनत पौधरोपण की फोटोज दिखेंगी और न प्रकृति से एक दिन के प्रेम के अटूट बंधन की व्याख्यान पढ़ने को मिलेगी, लेकिन फिर भी इस बार पर्यावरण हर बार से बहुत निर्मल, स्वच्छ और शीतल है। जिसका सारा श्रेय महामारी कोरोना को जाता है। 

चीन से उठा महामारी कोरोना का कहर आज पुरे विश्व में ऐसा फैला जिससे कोई अनजान नहीं है। गाँव, शहर, देश, विदेश का कोई कोना नहीं जंहा कोरोना ने अपना रंग न दिखाया हो। लाखो लोगों को अपनी चपेट में लेने के बाद इसका संक्रमण फैलता ही दिख रहा है। 

लॉकडाउन से अवगत करवाने वाले कोरोना ने जंहा अर्थव्यवस्था को बिलकुल गिरा दिया वहीँ प्रकृति को एक नया जीवनदान मिला हैं। कई महीनों से जंहा कामकाज सब ठप पड़े है, फैक्ट्रियो में ताले जड़ें हैं और लोग अपने घरों में कैद हैं। वंही पर्यावरण और ज्यादा खिला खिला, स्वच्छ और खूबसूरती के साथ निखरता जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में कोरोना ने पर्यावरण को जल और वायु प्रदुषण से बचा कर एक नया जीवनदान दिया है। निर्मल गंगा का पानी, नीला आसमान और ताज़ा हवाएं इस बात का प्रमाण हैं और सही मायने में यही एक सफल पर्यावरण दिवस है। 

हालाँकि ऐसा नहीं है की लोगों को इस बात का पता नहीं की हरे भरे और स्वच्छ पर्यावरण की क्या महत्ता है, लेकिन  फिर भी आगे बढ़ने की चाह और होड़ ने सबकी आँखों पर पट्टी बाँध दी है. पर शायद  लोग इस बात को नहीं समझ रहे हैं की पैसो के अलावा एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए एक स्वच्छ पर्यावरण का होना बहुत जरुरी है। मानव जाती से बस यही उम्मीद लगा सकते हैं की महामारी कोरोना का कहर जाने के बाद भी पर्यावरण और प्रकृति का सम्मान करें। यह भगवान की कुछ ऐसी प्राकृतिक सरंचना है जो स्वस्थ जीवनशैली के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। 

लेखिका- प्रिया आसोपाpriyaa

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