संजीवनी टुडे

चुनावी घोषणापत्रों का सच : जितने दल, उतने वादे

संजीवनी टुडे 09-04-2019 12:53:30


वर्ष 2019 का चुनाव किसानों के नाम पर लड़ा जा रहा है। ऐसा कोई राजनीतिक दल नहीं है जिसने किसानों के हित और गरीबी मिटाने के दावे न किए हों। कांग्रेस ने गरीबमुक्त भारत की कल्पना की है। भाजपा गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों की तादाद एक निर्धारित अवधि में दस प्रतिशत से नीचे लाने की बात कह रही है। लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने ताड़ी को वैध बनाने का दावा किया है। ममता बनर्जी की पार्टी एनआरसी बिल को लागू न होने देने के इरादे व्यक्त कर रही है। जितने दल, उतने वादे। कहना होगा कि सबने अपनी सुविधा के लिहाज से विकास की परिकल्पना की है।

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घोषणापत्र चुनाव की जान होते हैं। चुनाव हमेशा से घोषणापत्र के आधार पर ही लड़े जाते हैं। पहले घोषणापत्र बेहद सादगी भरे होते थे जिसमें राजनीतिक दल पांच साल के लिए अपनी सोच, अपनी योजनाएं जाहिर कर दिया करते थे। वे केवल यह बता देते थे कि वे देश के लिए क्या करेंगे लेकिन अब घोषणापत्रों का नाम ही नहीं, स्वरूप भी बदला है। अब घोषणापत्र तैयार करने में राजनीतिक दल काफी मेहनत करते हैं। उसमें खूब नवोन्मेष करते हैं। अच्छे-अच्छे भरमाने वाले वादे करते हैं।

भले ही चुनाव बाद उसे भूल जाते हैं और जनता का वादों को पूरा होने का ख्वाब देखते-देखते पांच साल बीत जाता है। फिर नया चुनाव और नये वादे। जनता को प्रभावित करने का इससे सहज तरीका और कुछ हो भी नहीं सकता। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। भाजपा ने अपना संकल्पपत्र जारी किया है तो कांग्रेस ने जन आवाज घोषणा पत्र। घोषणापत्र का नाम बदलने का चलन भाजपा ने ही विकसित किया था। भाजपा ने इस बार के अपने संकल्प पत्र में संकल्पित भारत-सशक्त भारत का मंत्र दिया है।

घोषणापत्र लाने के पीछे किसका दिमाग था, कहां से इस विचार को अंगीकृत किया गया, लगे हाथ इस पर चिंतन कर लेना चाहिए। 1907 में छपी महात्मा गांधी की पुस्तक 'हिन्द स्वराज' को आधुनिक भारत का पहला घोषणापत्र कहा जाता है। विश्व प्रसिद्ध चिंतक कार्ल मा‌र्क्स तथा फ्रेड्रिक एंजिल्स की 1848 में छपी चर्चित पुस्तक 'द कम्युनिस्ट मेनीफेस्टो' हालांकि इससे बहुत पहले आ चुकी थी लेकिन वह किसी राजनीतिक पार्टी का घोषणा-पत्र नहीं थी। मा‌र्क्स ने अपने घोषणा-पत्र में दुनिया को बदलने का सपना देखा था।

मेनीफेस्टो पर कई पुस्तकें लिखी गईं। अलग-अलग देशों में लिखी गईं। लेकिन भारत में चुनाव घोषणापत्र देश को आगे ले जाने का राजनीतिक विजन पेश करते रहे हैं। बसपा प्रमुख मायावती तो घोषणापत्र बनाती ही नहीं हैं। वे जो बोलती हैं, वही उनकी पार्टी का अधिकृत घोषणापत्र है। समाजवादी पार्टी के दस्तावेज से अलबत्ते अगड़ा बनाम पिछड़ा में जंग के संकेत मिलते हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने घोषणापत्र में कहा है कि देश में 10 फीसदी सामान्य वर्ग के लोग 60 फीसदी राष्ट्रीय संपत्ति पर काबिज हैं।

किसान का भला तब तब तक नहीं होगा जब तक उनका पूरा कर्ज माफ न हो। सपा ने किसानों का पूरा कर्ज माफ करने की न केवल तरफदारी की है बल्कि अहीर बख्तरबंद रेजीमेंट और गुजरात इन्फेंट्री की स्थापना का भी दावा किया है। महिलाओं को तीन हजार की मदद की बात भी कही है। उधर,भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर का दावा है कि वे चमार रेजीमेंट बनाएंगे। सेना में रेजीमेंट का गठन अंग्रेजों के दौर में हुआ था। क्यों हुआ था, यह किसी से छिपा नहीं है लेकिन अब जातीय आधार पर सेना में रेजीमेंट बनाने की बात करना कहां की बुद्धिमानी है।

इस बार भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में राष्ट्रवाद को अपनी प्रतिबद्धता बताया है और आतंकवाद के खिलाफ असहिष्णुता की नीति को जारी रखने की बात कही है। भारत में होने वाले अवैध घुसपैठ को रोकने में सख्ती करने,सि‍टीजनशिप अमेंडमेंट बिल को लागू करने की बात तो कही है लेकिन किसी भी राज्य की सांस्कृतिक पहचान पर आंच न आने देने का वचन भी दिया है। राम मंदिर निर्माण की सभी संभावनाओं को तलाशने और सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में राम मंदिर बनाने का उसका संकल्प यह बताता है कि वह हिंदुत्व के अपने पुराने मुद्दों से विमुख नहीं हुई है।

सबरीमला पर भी भाजपा ने अपने संकल्पपत्र में अपना दृष्टिकोण साफ कर दिया है। किसानों की आय दोगुनी करने का उसका वादा नया नहीं है, लेकिन किसानों के एक लाख तक के ऋण को पांच साल तक ब्याजमुक्त करने का निर्णय बेहद अहम है। इससे किसानों को बड़ी सहूलियत होगी। 25 लाख करोड़ रुपये ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर खर्च करने का निर्णय भी काफी मायनेवाला है। किसान सम्मान निधि के तहत सभी किसानों को 6 हजार रुपये वार्षिक देने, छोटे और सीमांत किसानों को 60 वर्ष की उम्र के बाद पेंशन की सुविधा देने का संकल्प किया गया है।

व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए भाजपा ने राष्ट्रीय व्यापारी आयोग बनाने की घोषणा की है। देश के छोटे दुकानदारों को 60 वर्ष की उम्र के बाद पेंशन देने का वादा कर व्यापारी समाज का भी दिल जीतने की पुरजोर कोशिश की है। भाजपा ने आतंकवाद उन्मूलन के लिए सेना को पूरी को पूरी छूट देने की बात कही है। समाज के सभी वर्गों के समग्र विकास का भाजपा का संकल्प ढाढस तो बंधाता ही है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर भाजपा का ध्येय वाक्य दोहराया है जो पूरे देश को सुकून देता है। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रवाद हमारी प्रेरणा है। अंत्योदय हमारा दर्शन है और सुशासन हमारा मंत्र है। विकास के मामले में क्षेत्रीय असंतुलन को खत्म करने, राज्यों में जल संकट दूर करने के लिए अलग जल शक्ति मंत्रालय बनाने, देश में समान नागरिक संहिता लागू करने, कश्मीर से धारा 370 समाप्त करने और 35ए हटाने का दावा भी किया गया है। 

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