संजीवनी टुडे

देश की रक्षा करने वाले सैनिकों की सैलेरी का टोटका, आखिर क्यों?

-निर्मल कुमार शर्मा

संजीवनी टुडे 29-01-2020 14:56:02

आज कुछ समाचार पत्रों में, एक बहुत ही दुखी और स्तब्ध कर देने वाला समाचार प्रकाशित हुआ है। समाचारों के अनुसार, भारतीय सेना के अभिन्न अंग, सशत्र सीमा बल के 94261 सैनिक, जो भूटान और नेपाल की सीमा के 2450 किलोमीटर के बर्फीले, खुले और विस्तृत तथा बेहद ठंडे सीमा पर, दिन-रात, चौबीसों घंटे, भयंकर वर्षा व भारी हिमपात में भी, मुस्तैदी से देश की सीमा पर, वस्तुतः वे हमारी-आपकी दुश्मनों से, रखवाली करते हैं, उन्हें जनवरी और फरवरी 2020 का चाइल्ड एजुकेशन भत्ता और लीव ट्रैवल कन्ससेशन भी कथित फंड की कमी की वजह से, रोक दिया गया है।


आज कुछ समाचार पत्रों में एक बहुत ही दुखी और स्तब्ध कर देने वाला समाचार प्रकाशित हुआ है। समाचारों के अनुसार, भारतीय सेना के अभिन्न अंग, सशत्र सीमा बल के 94261 सैनिक, जो भूटान और नेपाल की सीमा के 2450 किलोमीटर के बर्फीले, खुले और विस्तृत तथा बेहद ठंडे सीमा पर, दिन-रात, चौबीसों घंटे, भयंकर वर्षा व भारी हिमपात में भी, मुस्तैदी से देश की सीमा पर,वस्तुतः वे हमारी-आपकी दुश्मनों से, रखवाली करते हैं, उन्हें जनवरी और फरवरी 2020 का 'चाइल्ड एजुकेशन भत्ता 'और 'लीव ट्रैवल कन्ससेशन 'भी कथित फंड की कमी की वजह से, रोक दिया गया है। इसी प्रकार के बहाने करके पिछले साल, सितम्बर 2019 में भी सीआरपीएफ के तीन लाख जवानों का 3600 रूपये 'राशन भत्ते 'को रोक दिया गया था, जो बाद में भुगतान किया गया था।
       
कितने शर्म, अफ़सोस और हतप्रभ करने वाली यह बात है कि यह सरकार भारतीय रिजर्व बैंक से देश के किसी आकस्मिक आपातकालीन स्थिति के लिए, रखी संचित राशि के 17 खरब 50 अरब रूपये एक झटके में ही, येनकेन-प्रकारेण निकाल लेती है,जो देश पर कभी आए आकस्मिक आपदा, मसलन बाढ़, दुर्भिक्ष या वाह्य दुश्मन देशों के अचानक हमले आदि के लिए धन को संचित रखा जाता है। अब इस सरकार के खर्च करने के प्रमुख मुद्दों में,दवा के अभाव में मरते, लाखों नवजात शिशु नहीं हैं,न सरकारी अस्पतालों के स्वास्थ्य को सुधारने में है, जहाँ, न पर्याप्त डॉक्टर हैं, न नर्सें, न स्टॉफ आदि,न किसानों को उनकी फ़सलों की जायज कीमत दिलाने में है,न पिछले पैंतालिस सालों में सर्वोच्च बेरोजगारी को कम करने में है,न 19 करोड़ रात को भूखों सोने वाले, गरीबों-वंचितों को दो टाइम के भोजन की व्यवस्था करने में है,न देश भर में फैले लाखों प्राइमरी, मिडिल व हाईस्कूलों के खंडहर में बदलते भवनों की मरम्मत करने में है,न उनमें पढ़ाने वाले अध्यापकों की नियुक्ति करने में है, न उनमें शौचालय बनवाने में है,न बच्चों को पानी पीने की व्यवस्था करने में है, न सीआरपीएफ जवानों को समय पर खाने के भत्ते देने आदिआदि में है। मतलब जनता के मूल मुद्दों को हल करने की इनकी न इच्छा है,न इनके पास पैसा है!
      
इनकी प्राथमिकताओं में,कुछ निम्न मुद्दे हैं, जिनको पूरा करने में इन्हें न तो कहीं पैसे का अभाव आड़े आता है,न उससे इनकी कथित अर्थव्यवस्था लड़खड़ाती है, मसलन विलासिता-पूर्ण व बिल्कुल निरर्थक, 'बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट 'के लिए,11 खरब रूपये, चारधाम सड़क योजना, पर जो नाजुक हिमालयी पर्यावररण व विलुप्त होती प्रजातियों को धत्ता बताते हुए, 1 खरब 20 अरब रूपये का प्रोजेक्ट है, कुँभ मेले के लिए, 40 अरब रूपये, पटेल की मूर्ति बनवाने में 30 अरब रूपये तथा अयोध्या में 5 लाख 55 हजार चीन से आयातित दीपकों से 'जगमग दीपावली' मनाने में 1 करोड़ 33 लाख रूपये खर्च करने में और अब नागरिकता संशोधन रजिस्टर बनाने में, अरबों रूपये खर्च करने का भावी प्रोजेक्ट के लिए कोई,न तो अफ़सोस है, न बजट का कोई अभाव न उसमें विलम्ब है।
     
तो उक्त उदाहरणों से यह पूर्णतः स्पष्ट है कि यह सरकार जानबूझकर, मूल मुद्दों को किसी न किसी बहाने, नेपत्थ में धकेल कर व्यर्थ के मुद्दों पर अकूत और तुरन्त पैसे खर्च करके, देश के संचित, आपातकालीन समय में काम आने वाली धरोहर को ही बर्बाद करने पर तुली हुई है। इस सरकार के पास अच्छे, जनहित के काम करने की न इच्छा शक्ति है, न पैसे! यह सरकार हर समस्या का समाधान 'निजीकरण 'में ढूंढ रही है, जैसा आज एयर इंडिया का हश्र हुआ। वैसे भारत की एक अरब पैंतीस करोड़ जनता,शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में निजीकरण करके,कथित 'पाँच सितारे संस्कृति के पब्लिक स्कूलों और प्राइवेट अस्पतालों की अकथ्य शोषण और लूटपाट से भली-भाँति परिचित है ही! इसके अतिरिक्त भारत-पकिस्तान, हिन्दू ख़तरे में है, मंदिर-मस्जिद, लव जिहाद, भ्रामक राष्ट्रवाद, अर्बन नक्सली, वामपंथी, पाकिस्तान परस्त, देशभक्त-देशद्रोही, वन्देमातरम्, जयश्रीराम, अभी-अभी लाँच्ड 'टुकड़े-टुकड़े गैंग 'आदि जुमलेबाज़ी तो अब विश्व प्रसिद्धि पाने में कामयाब हो रहे हैं।

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