संजीवनी टुडे

रस्सी जल गई पर ऐंठन नहीं गई: प्रभात झा

संजीवनी टुडे 27-06-2019 13:09:20

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर दोनों सदनों में चर्चा हुई। संसद में यह बरसों की परम्परा है। अभिभाषण पर चर्चा में दोनों सदनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य भाग लेते हैं। इस बार भाजपा की अगुवाई में एनडीए भारी मतों से जीतकर आया है।


राष्ट्रपति के अभिभाषण पर दोनों सदनों में चर्चा हुई। संसद में यह बरसों की परम्परा है। अभिभाषण पर चर्चा में दोनों सदनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य भाग लेते हैं। इस बार भाजपा की अगुवाई में एनडीए भारी मतों से जीतकर आया है। सन् 2019 के जनादेश में एक नहीं, अनेक सन्देश सभी के लिए थे। जो समझना चाहे, वह समझे,जो नहीं समझना चाहते, वह नहीं समझे।

हम वर्षों से संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा सुन रहे हैं और भाग भी लेते रहे। इन दो दिनों की बहस में जो कुछ देखने को मिला, उससे लगता है कि विपक्ष जनादेश से कोई सबक नहीं लेना चाहता है। उलटे वह पूरी तरह से जनता को दोषी मान रहे हैं। अपनी बहस के भाषणों में कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल भी उसी रास्ते पर चल रहे हैं। 

लोकसभा और राज्यसभा में दो दिन से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा चल रही थी। हम सत्तापक्ष और विपक्ष के नेताओं को बहुत ध्यान से सुन रहे थे। सदन के माध्यम से दोनों सदनों को देश भी सुन रहा था। देश के जन का विवेक सामान्य नहीं होता है। बहुत ही असामान्य होता है। हम लाख सोचें कि हमारा विवेक सबसे अच्छा है पर सच्चाई यह है कि जनतंत्र में जन विवेक ही सबसे बड़ा विवेक होता है। परसों 25 जून था। 25 जून सन् 1975 को देश में कांग्रेस ने आपातकाल लागू किया था। इस दौरान देश की जनता अपने घर में भी जोर से नहीं बोल सकती थी। जब आपातकाल के बाद सन् 1977 में लोकसभा चुनाव हुआ तो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तक चुनाव हार गईं। जनतंत्र में जन विवेक का इससे बड़ा उदाहरण कहीं देखने को नहीं मिला।  

लोकसभा में पहली बार आए ओडिशा के सांसद, राज्यमंत्री प्रताप चन्द्र सारंगी ने अभिभाषण पर प्रारंभिक चर्चा शुरू की। सादा जीवन और उच्च विचारों पर सदैव चलने वाले सारंगी ने अभिभाषण में कही गयी बातों पर विस्तृत चर्चा की। सारंगी ने सदन को बताया कि भाजपा को और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह जनादेश क्यों और कैसे मिला। भाजपा की जीत के कारणों पर भी उन्होंने बड़ी विनम्रता से बात रखी। गत पांच वर्षों में देश के विकास की भी चर्चा की। उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन किया।  

एक आदिवासी सांसद डॉ. हिना विजय गाबिद (महाराष्ट्र) जब बोल रही थीं तो लग रहा था कि भारत का जनतंत्र बहुत परिपक्व हो गया है। आजादी के बाद अब सुदूर आदिवासी इलाकों में भी मोदी सरकार की योजनाएं सिर्फ पहुंची ही नहीं हैं बल्कि धरती पर उसका प्रभाव भी दिखाई दे रहा है। डॉ. हिना जब अपने संसदीय क्षेत्र का वर्णन कर रही थीं तो लग रहा था कि भारत का गरीब अब विकास की ओर जाना चाहता है। वह गरीबी पर रोने की बजाय इसे दूर करने की दिशा में  सरकार के साथ कदम से कदम  मिलाकर चलना चाहता है। 

दूसरी तरफ जब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल के नेता बोलने के लिए खड़े हुए तो ऐसा लग रहा था कि 'रस्सी जल गई पर अभी ऐंठन नहीं गई'। वे ऐसा जता रहे थे कि भारत की जनता ने बहुत बड़ी गलती कर दी। कांग्रेस के नेताओं के मन में जनादेश को सम्मान करने का साहस उनके राष्ट्रपति के अभिभाषण की चर्चा में दिए गए भाषणों में नहीं देखा गया। आज स्थिति यह है कि लोग देखना चाहते हैं कि जनादेश के बाद विपक्षी दल खासकर कांग्रेस, बसपा और सपा में कुछ समझ आई होगी। पर, वह सब देखने को नहीं मिला। हताश और निराश विपक्ष जनादेश को स्वीकारने में भी हिचकिचा रहा है। कमोवेश सभी विपक्षी दलों की स्थिति जस की तस थी।

राज्यसभा की तरफ नजर डालें तो देखेंगे कि वहां पर भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने अपनी प्रस्तावना में साफ तौर पर कहा कि हमने जन-जन के लिए जो काम किया उसी के आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश में जन-जन का सहयोग मिला। नड्डा जी ने कहा कि देश ने नरेंद्र मोदी के साथ चलने का रास्ता तय किया। अपने 50 मिनट के भाषण में उन्होंने जनादेश मिलने के कारणों पर भी प्रभावी प्रकाश डाला। उनके भाषण में सच्चाई थी। उत्साह था, उन्माद नहीं। खुशी थी पर अभिमान नहीं। नड्डाजी ने प्रस्ताव का समर्थन किया। 

श्रीमती सम्पतिया उइके जो मध्य प्रदेश के मंडला आदिवासी क्षेत्र से आती हैं, ने भी अपने भाषण में बताया कि गरीबों के लिए मोदी सरकार ने क्या-क्या किया। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि अब मोदीजी की सरकार शब्दों से गरीबों के लिए नहीं बल्कि पूरी तरह अपने आचरण से गरीबों के लिए जी रही है। संपतिया उइके ने कहा कि आज गांवों में गरीबों, आदिवासियों और अनुसूचित जाति के परिवारों में नई आशा जगी है। 

उन्हें विश्वास होने लगा है कि उन्हें भी आवास मिलेगा। 'अपना घर' का सपना पूरा होगा। रसोई गैस के चूल्हे के लिए उनका नाम भी जुड़ेगा। पानी का संकट दूर होगा। इलाज और दवाई के अभाव में अब गरीब मौत के मुंह में नहीं जाएगा। गांव-गांव में नरेंद्र मोदी की गरीबों के लिए चल रही योजनाओं ने उनकी जिंदगी में एक नई रोशनी प्रदान की है। हर गांव के गरीबों की जुबान पर नरेंद्र मोदी का नाम पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि गरीबों ने अब मान लिया है कि नरेंद्र मोदी की सरकार गरीबों की सरकार है। 

उधर, कांग्रेस के राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने अभिभाषण पर बोलते हुए जो कुछ कहा, उससे यह बात भी साफ हो रही थी कि कांग्रेस जनता पर बहुत गुस्सा है। उन्हें लग रहा था कि जनादेश तो सदैव कांग्रेस को ही मिलना चाहिए। उनके भाषण में दुःख कम बल्कि जनता के खिलाफ रोष अधिक दिख रहा था। उनके चेहरे पर यह झलक रहा था कि इस जनादेश को वे पचा नहीं पा रहे हैं। कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों के नेताओं ने जो भाषण दिया वह जाहिर कर रहा था कि उन्हें भारत की जनता के विवेक पर शंका है। 

सच्चाई यही है कि आज भी कांग्रेस सहित सपा-बसपा आत्ममंथन करने की बजाय अपना गुस्सा जनता पर दिखा रहे हैं। शायद ये भूल जाते हैं कि जनतंत्र में जनादेश को स्वीकार करना पड़ता है न कि जनता को गाली देना होता है। गुलाम नबी आजाद जैसे अनुभवी नेता भाजपा के बारे में जो कुछ कह रहे थे, उससे लग रहा था कि वे भारत की जनता को 72 वर्ष की आजादी के बाद भी अपरिपक्व मानते हैं। यही कारण है कि आज जनता के बीच कांग्रेस सिमटती जा रही है। 

 लोकसभा में तो और भी गजब हो गया। कांग्रेस के विपक्ष के नवनियुक्त नेता को अपने भाषण पर पहले ही दिन प्रधानमंत्री से माफी मांगनी पड़ी। इन दो दिनों में यह बात धीरे-धीरे सामने आ रही है कि विपक्ष न तो नकारात्मक और न ही सकारात्मक विरोध कर पा रहा है। वह पूरी तरह देश की जनता को दोषी मान रहा है। जो विपक्षी दल जनादेश का सम्मान न कर सके उनका भविष्य में देश की जनता कैसे सम्मान करेगी। ऐसे सवाल अभी भी सेंट्रल हॉल में गूंज रहे हैं। 

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को आह्वान किया। उन्होंने कहा कि चुनाव हो गए। जो आपको कहना था और जो हमें कहना था, हम सभी ने कहा। अब हम सभी का दायित्व है कि भारत के विकास में सभी एक साथ खड़े हों। विकास भारत का होना है न कि किसी राजनीतिक दल का। उन्होंने कहा कि विपक्ष हमें आगाह करे। हम उनके एक-एक शब्द को देशहित में ग्राह्य करेंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका उन्हें तय करनी है। लेकिन भारत के 130 करोड़ जनता यानी उसके लिए सत्ता और विपक्ष दोनों जिम्मेदार है। 

मोदी ने कहा कि जनादेश के मायने हमारे लिए फूल-मालाएं स्वागत या सत्कार कराना नहीं है। हमें हर पल, हर क्षण जनता की सेवा करनी है। उन्होंने कहा कि हमारे पिछले पांच वर्षों के जनविकास कार्यों पर मुहर लगाकर भारत की जनता ने पुन: उससे अधिक काम करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें ऊंची उड़ान भरनी है, पर जमीन से नहीं कटना है। हमारी हर उड़ान जमीन के लोगों के विचार के लिए होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के मित्र कह रहे थे कि हम बहुत ऊंचाई पर हैं। इसीलिए आपके पैर जमीन से उखड़ गए हैं और आप अब जमीन से उठे नहीं बल्कि पूरी तरह कट गए हैं। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि आप इससे भी ऊंची ऊंचाई पर जाएं। उन्होंने देश को आश्वस्त किया कि नए भारत के निर्माण में वे अब आगे बढ़ेंगे और उन्हें पूरे देश का और सदन में विपक्ष का सहयोग चाहिए।

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