संजीवनी टुडे

उड़ता पंजाब की राह पर मप्र का उत्तरी अंचल

संजीवनी टुडे 20-07-2019 18:55:12

उड़ता पंजाब की राह पर मप्र का उत्तरी अंचल


मध्य प्रदेश का उत्तरी अंचल बड़ी तेजी से नशे के चंगुल में फंसता जा रहा है। उत्तरी अंचल के पांच जिले शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, और श्योपुर नशे की ऐसी गिरफ्त में समाते जा रहे हैं, जहाँ इन जिलों की सामाजिक, आर्थिक व्यवस्था को चुनौतियाँ तो मिलनी ही है, भविष्य में कानून-व्यवस्था की गंभीर समस्या भी खड़ी होने जा रही है। त्रासदी यह है स्मैक व चरस के इस कारोबार में पुलिस महकमे की भी मिलीभगत है और नशे का शिकार 18 साल से कम आयु वर्ग के हजारों नाबालिग हैं। स्थिति पर अगर गौर करें तो हाल ही में 17 साल की बालिका शिवानी शर्मा की मौत स्मैक के ओवरडोज से हुई। शिवपुरी में बाल अपचारी बालकों द्वारा तीन लोगों की हत्या सिर्फ इसलिए की गई क्योंकि इन बालकों को नशे की लत थी और संबंधित लोगों ने उन्हें पैसे देने से इनकार कर दिया था।

हाल ही में शिवपुरी जिला मुख्यालय पर नशे के कारोबार के विरुद्ध आम नागरिकों का संगठित प्रतिरोध भी मुखर हुआ है। सांसद, विधायक से लेकर तमाम नागरिक संगठन सड़कों पर उतरकर नशे के विरुद्ध लामबंद हो रहे हैं। शिवपुरी, गुना, राजगढ़ जिलों में अनुमान है कि करीब 10 हजार से ज्यादा बच्चे इस समय स्मैक के शिकंजे में फंस चुके हैं। अकेले शिवपुरी जिला मुख्यालय पर ही करीब 100 से ज्यादा ऐसे बालकों को चिह्नित किया गया है, जिनके परिजनों उनका उपचार करा रहे हैं। त्रासदी यह है कि अधिकतर बच्चों की उम्र 18 साल से कम या थोड़ी ही अधिक है। 

जाहिर है समस्या सिर्फ नशे तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के भविष्य से भी जुड़ी है। शिवपुरी जिले में जिस बालिका की मौत स्मैक के ओवरडोज़ से हुई बताई गई है, उसके छह साथियों को पुलिस ने हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है। उनका जब एचआईवी परीक्षण किया गया तो सभी पॉजिटिव पाए गए क्योंकि ये सभी समूह में एक ही सिरिंज से स्मैक लेते थे। समझा जा सकता है कि समस्या किस स्तर पर जा पहुंची है। जिस शिवानी शर्मा की मौत हुई है, उसके शारीरिक शोषण की बात भी सामने आई है।

शिवपुरी और आसपास के जिलों में हाल ही में पुलिस ने दबाब बढ़ाने के बाद करोड़ों की स्मैक और हेरोइन पकड़ी है। शिवपुरी के पुलिस कप्तान विवेक अग्रवाल की सिफारिश पर आईजी राजाबाबू सिंह ने छह पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। इनपर नशे के कारोबारियों से जुड़े होने का आरोप है। सवाल यह है कि क्या अचानक मप्र के इन जिलों में नशे के कारोबार ने जड़ें जमा लीं? ऐसा नहीं है। करीब तीन साल से इन जिलों में तबाही के इस कारोबार ने जड़ें जमाईं, जब कुछ आला पुलिस अफसरों ने इसे संरक्षण दिया। 

पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के बाद वहां जिस बड़े पैमाने पर नशे के नेटवर्क पर सख्ती हुई, उसके चलते राजस्थान पर कारोबारियों का फोकस बढ़ा जो पाकिस्तान का सीमावर्ती राज्य है। मप्र के ये सभी जिले राजस्थान से सटे हुए है और लोक व्यवहार में भी इन जिलों के लिये अंतरराज्यीय सीमा आड़े नहीं आती, यही कारण है कि राजस्थान से बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थ मप्र के इन जिलों में आ रहे हैं। पुलिस के कुछ आला अफसर जो कुछ समय पूर्व तक इन जिलों में बड़े जिम्मेदार पदों पर रहे, उन्होंने न केवल इस अवैध कारोबार से आंखें फेर रखी थीं बल्कि इसके एवज में अकूत धन कमाया।

ऐसा नहीं कि सरकार में बैठे शीर्ष लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी लेकिन बीजेपी और कांग्रेस, दोनों दलों के नेता मुंह में दही जमा कर बैठे रहे। नतीजतन आज हालात इतने खराब हो चुके हैं कि हर परिवार अपने बच्चों को सशंकित भाव से देखने को विवश है।

 शिवपुरी, गुना बाल कल्याण समितियों के आंकड़े बड़े ही चौकाने वाले हैं। समिति की सदस्य सरला वर्मा के अनुसार दोनों जिलों में बहुत ही भयानक हालात हैं। न केवल एलीट क्लास बल्कि मजदूरी करने वाले, कचरा पन्नी बीनने वाले परिवारों के बच्चे भी इस नशे की जद में आ चुके हैं। वे बताती हैं कि करीब 100 से ज्यादा बच्चों की काउंसलिंग वह समिति के आगे कर चुकी हूं। समझा जा सकता है कि भविष्य के लिए किस व्यापक स्तर पर समस्या खड़ी होने जा रही है। जुबेनाइल जस्टिस बोर्ड से जुड़े रहे बाल अधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार रंजीत गुप्ता के अनुसार अंचल में बहुत ही त्रासदपूर्ण हालात हैं। 

पुलिस ने पहले तो इस कारोबार को पांव जमाने दिया और बाद में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी खुद इस कारोबार में उतर आए। समस्या उन बच्चों को लेकर बड़ी है, जो बहुत ही गरीब घरों से हैं और मजदूरी या भीख मांगकर जीवन-यापन कर रहे हैं। कानून व्यवस्था के लिये ये बच्चे खतरा बनेंगे ही, बाल संरक्षण की हमारी संसदीय वचनबद्धता के लिये यह स्थिति बेहद शर्मनाक है।

समाजसेवी और चिकित्सक डॉ. गोविंद सिंह के अनुसार मप्र के इस उत्तरी अंचल में स्मैक के कारोबार ने दबे पांव एड्स की जमीन भी तैयार कर दी है क्योंकि स्मैक के पाउडर को एविल इंजेक्शन के साथ घोलकर सीरिंज से लिया जाता है। लेकिन बच्चे एक ही सीरिंज से स्मैक का डोज लेकर इस बीमारी को आमंत्रित कर रहे हैं। शिवानी की मौत के बाद आरोपी बनाए गए शिवपुरी के छह युवक-युवतियों में एचआईवी पॉजिटिव इसीलिए पाया गया क्योंकि वे सभी एक या दो सीरिंज से ही स्मैक लेते थे। जाहिर है हजारों की संख्या में ऐसे मामले सामने आ सकते हैं, जब ऐसे बच्चों का चिकित्सकीय परीक्षण किया जाएगा। तब ये आंकड़े हमें शर्म से सिर झुकाने के लिये पर्याप्त होंगे।

मप्र के इस इलाके में नशा की सामग्री राजस्थान से आ रही है। सुनियोजित तरीके से एक बड़ा रैकेट ऐसे संचालित किया जा रहा है जिससे गांव-गांव तक इसके तलबगार पैदा हो गए हैं। हालत यह है कि कुछ सम्पन्न परिवार तो अपने नौनिहालों की इस लत के बारे में जानते हुए भी मजबूर हैं। स्मैक का डोज यहां टिकिट कोड वर्ड के रूप में मिलता है। 

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