संजीवनी टुडे

बार-बार कूल्हे के फ्रेक्चर की परेशानी, बुजुर्ग रखें ध्यान

Dr Dheeraj Dubay

संजीवनी टुडे 09-12-2019 12:48:56

उम्र के साथ बुजुर्गों में कूल्हे के फ्रेक्चर की समस्या बढ़ जाती है। जरा सा गिरे या बाथरूम में फिसले तो खतरनाक फ्रेक्चर हो जाता है। यह समस्या बार-बार होने से परेशानी बढ़ जाती है। इसके पीछे खास वजह है कि हड्डियों में कैल्शियम की कमी हो जाने से वो कमजोर हो जाती है और जरा सा आघात पड़ते ही फ्रेक्चर हो जाता है।


जयपुर। उम्र के साथ बुजुर्गों में कूल्हे के फ्रेक्चर की समस्या बढ़ जाती है। जरा सा गिरे या बाथरूम में फिसले तो खतरनाक फ्रेक्चर हो जाता है। यह समस्या बार-बार होने से परेशानी बढ़ जाती है। इसके पीछे खास वजह है कि हड्डियों में कैल्शियम की कमी हो जाने से वो कमजोर हो जाती है और जरा सा आघात पड़ते ही फ्रेक्चर हो जाता है।

एचसीजी हॉस्पीटल के ज्वाइन्ट रिपलेसमेंट सर्जरी के हैड डॉ. धीरज दुबे बताते हैं कि, बुजुर्गों में चलते-फिरते गिरने या गीले फर्श पर फिसलने से कूल्हे में हड्डी टूटने की समस्या ज्यादा देखी जाती है। दरअसल हड्डियों में जब कैल्शियम की कमी हो जाती है तो वो कमजोर और खोखली होने लगती हैं, ऐसे में जरा सा दबाव पड़ते ही वे टूट जाती है। इस परेशानी से बचने के लिए हड्डियों में कैल्शियम की जांच करानी चाहिए, इससे पता चलता है कि हड्डी कितनी कमजोर हो गई हैं और इलाज का तरीका क्या होगा।

यह रखें सावधानी, ऐसे होती जांच –
हड्डियों में कैल्शियम की जांच में जब पता चलता है कि हड्डी कमजोर है तो कैल्शियम की दवाई देकर उपचार किया जाता है। कई बार किसी हार्मोन की कमी के कारण भी यह समस्या हो जाती है। अत्याधुनिक तकनीक में आर्टिफिशियल पैराथाइराइड हार्मोन के इंजेक्शन लगाए जाते हैं, इससे कैल्शियम और जरूरी हार्मोन की पूर्ति हो जाती है। बार बार फ्रेक्चर होने की समस्या से पीडि़त व्यक्ति को सहारे के साथ चलने के अलावा कूल्हे की सुरक्षा के लिए हिप पेडिंग लगाए रहना चाहिए। बाथरूम या गीले स्थान पर संभल कर जाना चाहिए। बुजुर्गों को ध्यान रखना चाहिए कि, बिना किसी छड़ी या सहारे के न चलें, गीले स्थान पर संभल कर चलें ताकि गिरने का डर न हो।

अब पूरा नहीं कूल्हे का आधा जोड़ बदल देते –
सीनियर ज्वाइंट रिपलेसमेंट सर्जन डॉ. धीरज दुबे ने बताया कि, कूल्हे में बार-बार फ्रेक्चर होने की समस्या जटिल होने पर निजात दिलाने के लिए कूल्हे के जोड़ को बदलना होता है। आजकल नई तकनीक में पूरा जोड़ बदलने के बजाए कूल्हे में आधा जोड़ बदल कर ही मरीज को ठीक कर दिया जाता है। पहले कूल्हे का फ्रेक्चर होने के इलाज में हड्डी जुडऩे में काफी लंबा समय एक-डेढ़ महीना लगता था। साथ ही मरीज को बिस्तर पर ही पड़े रहने, वहीं पर दैनिक क्रियाकलाप करने से कई तरह की बीमारी हो जाती थी। अब कूल्हे का प्रभावित हिस्सा यानि आधा जोड़ बदल कर ही इलाज हो जाता है। इसमें मरीज ऑपरेशन के बाद तुरंत चलने लगता है और कुछ दिन में बिना सहारे का सारा काम करने लगता है। रिकवरी भी जल्दी हो जाती है।

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