संजीवनी टुडे

आतंक के डाकू महोदय डॉक्टर के भेष में

--रामविलास जांगिड़

संजीवनी टुडे 12-11-2019 14:55:00

तीन दिन पहले हमें एक प्यारी सी खाँसी ने घेर लिया। जब भी हमें खाँसी आती हम खों-खों करते विलंबित लय में झूम उठते। हमारे फेंफड़े हारमोनियम के पर्दे की तरह उठने-गिरने लगते। तब प्यारे से दाँत सितार की तरह झनझना उठते। इधर हमें खाँसी होती और उधर पूरा घर कत्थक डांस फरमाने लगता।


तीन दिन पहले हमें एक प्यारी सी खाँसी ने घेर लिया। जब भी हमें खाँसी आती हम खों-खों करते विलंबित लय में झूम उठते। हमारे फेंफड़े हारमोनियम के पर्दे की तरह उठने-गिरने लगते। तब प्यारे से दाँत सितार की तरह झनझना उठते। इधर हमें खाँसी होती और उधर पूरा घर कत्थक डांस फरमाने लगता। अब हमें किसी ऐसे लुटेरे की तलाश थी जो हमें डॉक्टर के भेष में लूट सके। हम सोच रहे थे कि किसी सरकारी लुटेरे से लुटें या फिर किसी प्राइवेट लुटेरे से अपने खाँसी की अस्मत लुटाएँ। बड़े विचार से अर्द्ध सरकारी लुटेरे से हॉस्पिटल जाकर लुटने का निश्चय किया। लुटने की रकम दो सूटकेसों में भरकर हम ऑटो करके डॉक्टर बीमार मल जीए के यहाँ पहुंँचे। लूटने का श्री गणेश ऑटो वाले को पूरा पांच सौ का नोट दिखाकर किया। हॉस्पिटल के बाहर ही लुटवाने वाले भक्तों की भारी भीड़ जमा थी। अंदर डाकू महोदय डॉक्टर के भेष में अपने गिरोह के साथ कायदे से लूट मचा रहे थे। हर एक मरीज को आपस में एक दूसरे से पहले लूटने की होड़ मची थी। अंदर और बाहर लूटने-लुटवाने की भारी जोड़ सजी थी। बड़ी मुश्किल से हम श्रीमान बीमार मल जीए के पास पहुँचे। उन्होंने जाते ही 3 पाटियों की बेंच पर लेटने का अधिनियम पढ़कर सुना दिया। उन्होंने अपनी तलवार नुमा टॉर्च निकाली। मुँह खुलवाया और उसके अंदर बैठ गए। फिर लगे खाँसी को ढूँढ़ने। काफी देर तक डॉक्टर बीमार मल साहब ने मुँह के अंदर सोफे पर टांग पसारे-पसारे तमाम तरह की इधर-उधर पसरी खाँसी ढूँढ़ी। पर खाँसी कहीं ना मिली; यह नेता जी की ईमानदारी हो गई। तब डॉक्टर साहब ने मुझे उल्टा लटकाया और सिर के बल वाली फाँसी विधि से लगे ढूँढ़ने खाँसी। ढूँढ़ने की खूब कवायद की। पर हाय रे! उन्हें यहाँ भी खाँसी नजर न आई। तब उन्होंने सारे जरूरी परीक्षण लिख दिए। खून, मल, मूत्र, थूक, लार, पसीना, बदबू आदि के परीक्षण का राज्यादेश जारी किया। ईसीजी, सोनोग्राफी, इंडोग्राफी, बायोग्राफी, एक्स-रे आदि टेस्ट करवाने की बात भी उन्होंने पर्ची के सीने में खंजर की माफिक खौंस दी। तब उन्होंने 33 फीसद मुँह खोला; बेहद धीमी गति से बयान जारी किया और कहा -'मामूली टेस्टिंग जरूरी है। फिर बीमारी की जड़ तक पहुँचकर ही इसे समूल काटने के उपाय करने पड़ेंगे।' तत्पश्चात उन्होंने 5 फीसद मुँह खोलकर पुनः वेद वाक्य उवाचा -'आप अपना क्रेडिट कार्ड व पिन नंबर बता दीजिए। हॉस्पिटल की फीस हम अकाउंट से स्वयं ही निकाल लेंगे।' हमने बतौर नेग डॉक्टर साहब को दो हजार रुपयों का भोग लगाया। पास ही उनके गिरोह का वरिष्ठ सदस्य कंपाउंडर के रूप में मौजूद था। उसने हमसे पर्ची जब्त की और एक इशारे से उसका अनुगमन करने के लिए कहा। वह हमें हॉस्पिटल की गुफा के पिछवाड़े ले गया। रास्ते में हमारे जैसे कई मरीज स्वयं को लुटा रहे थे। एक दूसरे को कुटा-पिटा रहे थे। दो घंटे की मामूली सी यात्रा के बाद हम पिछवाड़े के दो पाटियों के समीप थे। बदबू, सड़ांध और अँधेरे के रम्य वातावरण में उसने दो पाटियों को पलंग कहकर लेटने का आदेश फरमाया। मुझे उस राक्षस ने अर्द्धनग्न हो जाने का फतवा भी पढ़ा। वह एक बड़े ट्रांजिस्टर नुमा मशीन के साथ ढेरों तार मेरे बदन से जहाँ-तहाँ कनेक्ट करने लगा। जैसे किसी वादी को संविधान की धाराओं में फँसाया जाता हो। मशीन में तार फँसाकर उसके दूसरे सिरों के तारों पर लगी क्लिपों को मेरे देह से जोड़ने लगा। बाहर खड़े जीव यमदूत को रास्ता देने के लिए हाथ जोड़कर कतार में कातर चेहरे के साथ खड़े थे। अंदर पास में पड़ी मशीन ग्राफ पेपर की उल्टियाँ करने लगी थी। धूर्त कंपाउंडर इन उल्टियों के ग्राफ पेपरों को निहायत ही उजबक तरीके से देखता। फिर बिच्छू सा मुँह बनाकर मशीन को 108 डिग्री पर घुमाकर मुझे घूरता। पूरे हजार रुपयों में उसने घूरना बन्द किया। मैं उससे पिंड छुड़ा कर भागा। शीघ्र ही पुनः गुफा के तोरण द्वार तक पहुँचने में मुझे 15 घंटे लगे। अब डॉक्टर साहब सरकारी लूटमार केंद्र पर जा चुके थे।

राजकीय सामान्य चिकित्सालय में बैठकर सरकारी आदेशों के अनुसार यह डॉक्टर बीमार मल जीए जी अब सरकारी सफा खाने के मरीजों की सफाई करने में लग गए थे। तब तक डॉक्टर के उसी वरिष्ठ लुटेरे जी ने मेरा ज्ञान बढ़ाया कि अब हम आपको 12 बजे बाद ही लूट सकेंगे। लिहाजा पड़ोस के साथी टेस्टिंग गैंग पर खून, मल, मूत्र, लार, पसीना आदि की टेस्टिंग करवा लीजिए। उस वरिष्ठ लुटेरे ने मुझे उस पावन स्थान तक पहुँचाया। वहाँ पर और लोग भी मुझसे पहले लुटवाने की होड़ में खड़े थे या पड़े थे। इसे यह कहना उचित रहेगा कि वे लुटवाने पर ही अड़े थे। तब 10 फीसदी छूट और पांच टेस्ट के साथ लार टेस्ट को फ्री करने के नियम का हवाला देकर मुझे 10,000 रुपये की रसीद थमा दी। मैंने उनसे आग्रह किया कि 10,000 में आपको इतने परीक्षण करने पड़ रहे हैं। प्लीज 2000 रुपये और लूट लीजिए। इतने कम रुपयों में आप अपना घर कैसे चलाएंगे? उन्होंने मेरी इस अपील पर कोई रहम नहीं खाई। फिर टेस्टिंग के अगले अभियान में मेरे चमगादड़ी शरीर से एक बोतल खून, 240 ग्राम मल, 3 लीटर मूत्र, 400 मिली लीटर थूक, 1 लीटर पसीना व 250 मिली लीटर लार एकत्र की। उन्हें एकत्र करने के पात्रों के बतौर पाँच हजार रुपए ही दे पाया।

 

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