संजीवनी टुडे

मोदी की कूटनीतिक कुशलता

डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

संजीवनी टुडे 02-07-2019 10:43:54

जी-20 और ब्रिक्स के साझा घोषणा पत्र में नरेंद्र मोदी के प्रस्तावों को प्रमुखता से शामिल किया गया।


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जापान यात्रा केवल तीन दिनों की थी। लेकिन इसमें उनकी विदेश नीति के अनेक आयाम लक्ष्य तक पहुंचे। इन तीन दिनों में उन्होंने दो वैश्विक सम्मेलनों में प्रभावी भूमिका का निर्वाह किया। दो दर्जन देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता से आपसी सहयोग को आगे बढ़ाया। तीन देशों की बैठक में साझा रणनीति बनाने पर सहमति हुई।

 अमेरिका और जापान ने स्वीकार किया कि भारत के साथ उनके संबन्ध इतने बेहतर पहले कभी नहीं थे। जी-20 और ब्रिक्स के साझा घोषणा पत्र में नरेंद्र मोदी के प्रस्तावों को प्रमुखता से शामिल किया गया।

आर्थिक भगोड़ों के प्रति ब्रिक्स और जी-20 ने पहली बार ऐसी गम्भीरता दिखाई है। आर्थिक अपराध से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जल्द ही एक प्रपत्र तैयार किया जाएगा, जिससे इन अपराधियों की संपत्तियों को जब्त किया जा सकेगा। दूसरे देश में इन्हें पनाह नहीं दी जाएगी। इस सहमति के बाद विजय माल्या, मेहुल चोकसी और नीरव मोदी को भारत लाना संभव हो जाएगा। यह मोदी की कूटनीतिक सफलता है। 

घोषणा पत्र में पाकिस्तान व आतंकवाद पर नरेंद्र मोदी के विचार शामिल किए गए। इसमें फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) को और मजबूत बनाने का समर्थन किया गया है। एफएटीएफ के तहत आतंकी फंडिंग या मनी लांड्रिंग या गलत तरीके जमा राशि की रोकथाम में लगी एजेंसियों के बीच ग्लोबल नेटवर्क बनाया जाएगा। यह प्रस्ताव भी मोदी ने किया था।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जी-20 का बहुत महत्व है। यह बात इसमें शामिल देशों की सूची देखकर ही समझी जा सकती है। अमेरिका, चीन, फ्रांस ,जर्मनी, जापान ,आदि नाम ही इसके महत्व को समझने के लिए पर्याप्त है। इसके सदस्य देशों का विश्व की कुल जीडीपी में अस्सी प्रतिशत हिस्सेदारी है।

 विश्व की करीब आधी जनसंख्या इन्हीं देशों में निवास करती है। ये देश विश्व के आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों के साथ ही जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, आतंकवाद, जल संकट आदि मुद्दों पर कारगर दखल रखते हैं। इनके सम्मेलनों में इन्हीं सब विषयों पर विचार होता है। इसका चौदहवां सम्मेलन जापान के ओसाका में सम्पन्न हुआ।

जी-20 में अर्जेंटीना, ब्राजील, चीन, जर्मनी, इंडोनेशिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, भारत, इटली, मैक्सिको, कोरिया गणराज्य, रूस, तुर्की, अमेरिका, साउथ अफ्रीका, सऊदी अरब, ब्रिटेन, यूरोपियन यूनियन शामिल हैं। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार और निवेश ,इनोवेशन,पर्यावरण, ऊर्जा, रोजगार, महिला सशक्तिकरण,विकास, स्वास्थ्य आदि विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

जापान में ही ब्रिक्स देशों की बैठक हुई। इसमें नरेन्द्र मोदी के विचारों को खासी अहमियत दी गई। इसमें उन्होंने आतंकवाद को मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। आतंकी हिंसा फैलाते हैं। आर्थिक विकास और सामाजिक स्थिरता को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए आतंकवाद को मिलने वाली सहायता रोकनी चाहिए। यह सुनिश्चित करना विश्व समुदाय का प्रमुख कर्तव्य होना चाहिए। 

नरेन्द्र मोदी ने विश्व व्यापार संगठन को मजबूत बनाने, संरक्षणवाद से लड़ने, ऊर्जा सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण समय की आवश्यकता है। विकास तभी सार्थक है जब यह असमानता कम करे और सशक्तिकरण में योगदान दे। ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फाइव जी और ईरान से लेकर रक्षा संबंधों पर चर्चा हुई। 

अमेरिका, जापान और भारत के नेताओं की त्रिपक्षीय बैठक में नरेन्द्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने हिस्सा लिया। तीनों देशों आपसी सहयोग बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर साझा रणनीति पर कार्य करने का निर्णय लिया। नरेन्द्र मोदी और शिंजो आबे को दोबारा जनादेश मिला है। इसके लिए ट्रम्प ने दोनों को बधाई दी। कहा कि दोनों नेता अपने अपने देश और अंतरराष्ट्रीय जगत में शानदार कार्य कर रहे हैं। नरेन्द्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी हुई। इसमें ट्रम्प ने भारत से सहयोग के प्रति लचक दिखाई।

नरेन्द्र मोदी के भाषण के प्रमुख बिंदु ब्रिक्स देशों के साझा घोषणा में शामिल हुए। इसमें कहा गया कि अवैध धन और वित्तीय प्रवाह समेत भ्रष्टाचार और विदेशी क्षेत्रों में अचेत धन अर्जित करना एक वैश्विक चुनौती है जो आर्थिक विकास और सतत विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसके अलावा आतंकवाद के सभी रूपों की भर्त्सना की गई। उसके वित्तपोषण को रोकने का आह्वान किया गया। ये दोनों विषय नरेन्द्र मोदी ने ही उठाये थे। जिन्हें ब्रिक्स के साझा बयान में शामिल किया गया। नरेन्द्र मोदी की सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफौसा से भी वार्ता हुई। 

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने मोदी को बहुत अच्छा नेता बताया। उन्होंने स्वयं मोदी के साथ सेल्फी ली। उसे अपने ट्विटर पर पोस्ट किया। डोनाल्ड ट्रम्प ने नरेन्द्र मोदी को बहुत अच्छा दोस्त बताया। कहा, हम लोग सामरिक सहित कई क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। नरेन्द्र मोदी ने जापान, अमेरिका और भारत को जय बताया। कहा कि जे अर्थात जापान आई मतलब इंडिया और ए का अर्थ है अमेरिका। तीनों को मिला दें तो जय शब्द का निर्माण होता है। तीनों देश मिलकर कार्य करें तो जय निश्चित है।

इसके बाद नरेन्द्र मोदी ने कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और फ्रांस के राष्ट्रपति एमानुएल मैकरॉन से से द्विपक्षीय वार्ता की। नरेन्द्र मोदी से वार्ता के बाद सऊदी अरब ने भारतीयों का हज कोटा बढ़ा दिया। 

रूस, भारत और चीन के बीच दूसरी त्रिपक्षीय बैठक हुई। मोदी ने यह साबित किया किया कि जापान व अमेरिका से बेहतर संबंधों के बाद भी भारत किसी गुटबंदी में शामिल नहीं होगा। चीन और रूस से भी उसके संबन्ध सुधर रहे हैं। पुतिन और जिनपिंग से मोदी की वार्ता सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई। इसमें आतंकवाद और व्यापार जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत हुई।

इस त्रिपक्षीय बैठक को आरआइसी नाम दिया गया। आर मतलब रूस,आई मतलब इंडिया और सी मतलब चाइना। नरेन्द्र मोदी, शी चिनफिंग व्लादिमीर पुतिन ने सभी मसलों का वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने का ऐलान किया। इसी प्रकार जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल,फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीजा मे से मोदी की बातचीत सकारात्मक रही।

नरेन्द्र मोदी ने तीन प्रमुख चुनौतियों से निपटने के लिए पांच सुझाव दिए। कहा कि कम कीमत पर तेल और गैस की उपलब्धता जरूरी है। एकतरफा निर्णय की जगह तालमेल को वरीयता दी जाए। निरंतर आर्थिक विकास के अनुकूल माहौल बनाया जाए। ऊर्जा के वैकल्पिक साधन बढ़ाये जाएं। सौर ऊर्जा पर तेजी से कार्य किया जाए। आतंकवाद के विरुद्ध साझा रणनीति बनाई जाए।

जी-20 में आपसी मतभेदों को दरकिनार कर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। समस्याओं का समाधान वार्ता के माध्यम से होना चाहिए। कहा गया कि इस सम्मेलन से सबका लाभ होना चाहिए। वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति, अंतरराष्ट्रीय कारोबार, पर्यावरण व सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई। जी-20 देशों मतभेद भी रहे हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने तो उन्हें उजागर भी किया।

 उन्होंने कई देशों की खुली निंदा की। लेकिन नरेन्द्र मोदी से मुलाकात के बाद उनके स्वर बदल गए। पर्यावरण सुरक्षा और मुक्त व्यापार के मुद्दे पर ट्रम्प के विचार अलग रहे हैं। भारत ने डिजिटल इकोनॉमी को लेकर ओसाका घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। भारत ने डेटा के सीमा पार प्रवाह पर विरोध दर्ज किया है। डेटा नए तरह का धन है, जिसके लिए विकासशील देशों की जरूरतों का ध्यान नहीं रखा गया। 

अमेरिका ने देश का डेटा देश में ही संग्रहीत करने और डिजिटल व्यापार पर शर्तें लगाने की नीतियों का विरोध किया है। गूगल, मास्टरकार्ड वीजा और अमेजन जैसी अमेरिकी कंपनियां भारत समेत दुनियाभर में डेटा के स्थानीयकरण के खिलाफ लॉबिंग कर रही हैं। अमेरिका इसीलिए हिमायत कर रहा था। जबकि भारत और ब्रिक्स समूह के अन्य देशों का मानना है कि डेटा के मुद्दे पर बहुपक्षीय विश्व व्यापार संगठन के दायरे में ही बातचीत होनी चाहिए। 

मोदी ने जी-20 देशों को आपदा प्रबंधन पर एक वैश्विक गठबंधन में शामिल होने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि आपदाओं की स्थिति में जल्द एवं प्रभावी सुधारात्मक उपायों की जरूरत होती है क्योंकि ये गरीबों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं। जाहिर है कि मोदी ने जापान में अपनी कूटनीतिक कुशलता का परिचय दिया। इसका असर 24 देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों के साथ ही जी-20 और ब्रिक्स पर भी दिखाई दिया। 

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