संजीवनी टुडे

मोदी जी अभी तक इस देश की गरीब जनता की 'मन की बात 'ही नहीं समझ पाए हैं!

-निर्मल कुमार शर्मा

संजीवनी टुडे 01-07-2020 14:55:18

मोदीजी द्वारा कही जाने वाली मन की बात सीरियल की यह छठी किस्त थी। इस किस्त के प्रसारण से पूर्व हमेशा की तरह तमाम मिडिया श्रोतों और संस्थानों से उसका खूब प्रचार-प्रसार किया गया


मोदीजी द्वारा कही जाने वाली 'मन की बात ' सीरियल की यह छठी किस्त थी। इस किस्त के प्रसारण से पूर्व हमेशा की तरह तमाम मिडिया श्रोतों और संस्थानों से उसका खूब प्रचार-प्रसार किया गया,इस बार तो बाकायदा इस देश के गृहमंत्री तक ने भारत की जनता से मोदीजी के 'मन की बात ' सीरियल के इस छठे एपीसोड को विशेषतौर पर जरूर सुनने का आग्रह किया था, लेकिन यह छठा एपीसोड सुनने के बाद भारत की अभावों और मंहगाई से बुरी तरह जूझ रही जनता को गहरी निराशा हाथ लगी!, क्योंकि मोदीजी द्वारा कही गई 'मन की बातों 'में ज्यादेतर उनके द्वारा पूर्व में कही गई मन की बातों की ही पुनरावृत्ति होती रहती है या 'मन की बात 'का आलेख लिखने वाले उनके लेखक बहुत ही चतुराई और धूर्तता से इस देश,यहाँ के समाज की मूलभूत और ज्वलंतशील समस्याओं को सिरे से गायब कर देते हैं ! मसलन इस बार चूँकि गृहमंत्री जी ने देश की समस्त जनता से मोदीजी द्वारा कही जाने वाली इस 'मन की बात 'को सुनने का विशेष आग्रह किया था,इसलिए देश की जनता को भी लगा कि अब  की बार हमारे प्रधानमंत्री जी पुरानी मन की बातों की तरह न बोलकर, इस बार लीक से हटकर कुछ वास्तव में देशहित, समाजहित और इस देश के गरीब-गुरूबों के लिए भी कुछ न कुछ जरूर बोलेंगे इसके अलावे कोरोना संकट से निपटने के लिए भारत की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर भी कुछ खास बोलेंगे और जनता की इस लॉकडाउन में अत्यंत गरीबी में सुरसा के मुँह की तरह प्रतिदिन बढ़ती जा रही पेट्रोल और डीजल के दामों में राहत की कोई खुशखबरी देने वाली खबर सुनाएंगे या भारतीय भूमि पर लगातार गिद्ध दृष्टि जमाए और उस पर महिनों से अपना कब्जा जमाए और भक्षण करनेवाले चीनियों के खि़लाफ कुछ निर्णायक नीतियों की घोषणा करेंगे,लेकिन भारत की एक अरब पैंतीस करोड़ जनता को तब भारी धक्का और सदमा लगा,जब उनके सर्वप्रिय प्रधानमंत्री मोदी जी उक्त सबसे ज्वलंत समस्याओं को छुए ही नहीं,उसका जिक्र तक करने से परहेज़ कर गए,उनका समाधान करना तो बहुत दूर की बात है !

जैसे महाभारतकालीन 'अर्जुन 'को केवल मछली या चिड़िया की 'आँख' ही दिखाई देती थी, ठीक वैसे ही हमारे प्रधानमंत्री जी को भी नवम्बर 2020 में 'बिहार चुनाव 'अभी से ही दिखाई देने लगा है, इस मन की बात का सारा लब्बोलुआब यह था कि 'किसी भी तरह बिहार का यह चुनाव जीत लिया जाय ',इसलिए वे बड़ी ही चतुराई और नाटकीय अंदाज में 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना ' के अन्तर्गत गरीबों को मुफ्त अनाज वितरण की अवधि अब बढ़ाकर दीपावली व छठ तक ( मतलब नवम्बर में होनेवाले बिहार चुनाव तक ) कर दिए हैं। अभी इन्हीं प्रधानमंत्री जी द्वारा जानबूझकर अचानक लगाए गए 'लॉकडाउन ' से  सबसे ज्यादे 'गहरी चोट ' पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के करोड़ों उन मजदूरों,उनके बीवी-बच्चों को दिया गया,उस कुकृत्य से सैकड़ों लोग भूखे-प्यासे पैदल अपने गाँव जाने को बाध्य किए गये, उनको सत्ता के इशारे पर विभिन्न राज्यों की राज्य पुलिस ( विशेषकर उत्तर प्रदेश की योगी की पुलिस अपराधियों की तरह लाठियों से अकथनीय तौर पर अकारण खूब कुटाई की है ) इसके अलावा 'इस कुकृत्य से ' बहुत से (कई सौ  लोग ) लू से,भूखमरी से,बिमारी से,थकावट से ,बस,ट्रेन, ट्रेकर आदि से कुचलकर मारे गये ! अब मोदीजी को उन्हीं प्रताड़ित लोगों ( मजदूरों ) से वोट भी लेना है,और अगले पाँच साल फिर उन्हें लाठियों से कूटना भी तो है,इसलिए यह 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना ' के तहत घड़ियाली आँसू बहाकर उन्हीं लोगों से वोट लेने की 'एक कुटिल चाल 'के सिवा कुछ नहीं है !

आज वास्तविकता यह है कि इस देश में प्रतिदिन 15 हजार कोरोना संक्रमित लोग मिल रहे हैं,लेकिन अस्पतालों में गरीबों की स्वास्थ्य की देखभाल के लिए समुचित इंतजाम ही नहीं है,न पर्याप्त संख्या में डॉक्टर्स, न नर्सें,न अन्य मेडिकल स्टॉफ,न दवाइयों का समुचित व्यवस्था,न कोरोना से बचाव के लिए उपकरण हैं,सरकारी अस्पतालों की हालत अत्यंत बदहाल है। आखिर गरीबों को कोरोना टेस्टिंग करने के लिए का कोई विकल्प सरकार के पास अभी तक क्यों नहीं है ? इस देश के अस्पताल केवल धनी लोगों के इलाज के लिए बने हैं,प्रश्न यह भी है कि जब सभी लोगों की विधिवत कोरोना टेस्टिंग ही नहीं होगी तो संक्रमित लोगों की संख्या कभी भी सही नहीं आएगी,अगर इमानदारी से कोरोना संक्रमितों की जाँच हो तो वास्तव में कोरोना संक्रमित 15 हजार से बहुत ज्यादे होंगे, इस पर मोदीजी मौन रहे। इसी प्रकार बेतहाशा बढ़ते पट्रोल और डीजल के दामों से इस देश में सबसे ज्यादे परेशान और लाखों की तादाद में आत्महत्या करते किसानों की स्थिति और बदतर होती चली जाएगी,उनकी फसलों की लागतमूल्य अत्यधिक बढ़ जाएगी, फलस्वरूप उनकी दुःखद आत्महत्या करने की दर भी बढ़ जाएगी, इस गंभीर और अत्यंत महत्वपूर्ण समस्या पर भी मोदीजी 'मनमोहनी मौन 'रहे। चीन की अर्थव्यवस्था इतनी विशाल और सुदृढ है कि मोदीजी द्वारा कुछ एप बन्द करने मात्र से चीनी अर्थव्यवस्था को तबाह होते देखने का मोदी और मोदी समर्थकों तथा गोदी मिडिया का सपना देखना वैसे ही है,जैसे हजार टांगों वाले 'गोजर ' की केवल दो टांग तोड़ कर कोई यह कल्पना करे कि हमने 'गोजर को गंभीररुप से घायल कर दिया है।'

इसलिए इस देश की उक्त कुछ गंभीर समस्याओं मसलन,पेट्रोल-डीजल की बेतहाशा बढ़ते मूल्यों को रोकना,कोरोना से लड़ने की समुचित और ईमानदारी से प्रयास करना तथा भारत-चीन सीमा पर भारतीय भूमि पर कुदृष्टि डाले चीन से दो-दो हाथ करने के लिए संजीदगी, सुचिंतित, कूटनीतिक रणनीति के तहत कार्य करने से ही सफलता मिलेगी। कितने दुःख, अफसोस और हतप्रभ करने वाली बात है कि जब मातृभूमि संकट में है,तब भी इस देश का प्रधानमंत्री एक राज्य के चुनाव जीतने के लिए एक तुच्छ और सतही स्वार्थ भरा एक कृत्य करने से बाज नहीं आ रहा है ! यह एक राष्ट्र के प्रधानमंत्री के लिए बहुत ही 'शर्मनाक कृत्य ' है। किसी भी दल के प्रधानमंत्री जैसे पद के लिए सबसे सर्वोपरि कर्तव्य अपने देश और राष्ट्र की अस्मिता बचाना होना चाहिए, न कि एक राज्य की सत्ता हथियाने के लिए किए जाने वाले 'तुच्छ घिनौने कुकृत्य ' !

ऐसी ही ताजा खबरों व अपडेट के लिए डाउनलोड करे संजीवनी टुडे एप

More From editorial

Trending Now
Recommended