संजीवनी टुडे

कागज की सड़क पे सीखा

संजीवनी टुडे 13-10-2018 15:08:41



खामोश तन्हा बैठे बैठे मैं ने भी
कागज की सड़क पर चलना सीखा है।
दिल में उफनते भावों में बहते हुए यूँ
आज कलम के सहारे तैरना सीखा है
शब्दों के बाण चला गीतों की धुन में  यूँ
आज दिल से मुस्करा कर हंसना मैं ने सीखा है
दिल के जख्मों पर मरहम लगाने का
आज ये आसान सा तरीका मैं ने सीखा है।
दर्द की आहट इस फिजां की हवा के
आज दामन में  छुप रहना सीखा है।
वक्त की बची खुशी जिंदगी को
आज फूलों से महकाना सीखा है।
उस खुदा की दुआ कर दिल से
आज नई पहचान बनाना सीखा है।
जुबां बंद कर इस आशियाने में कोई
आज उससे गुप्तगू करना सीखा है।
जिस्म की इस रूह को शायद यूँ
आज किसी नाम से पुकारना सीखा है। 
भारती कोरे कागज की जिन्दगी को 
आज किसी चित्रकारी से उतारना सीखा है।

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