संजीवनी टुडे

भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत

संजीवनी टुडे 05-05-2019 16:53:31


संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित हो चुके जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर भारत में कई आतंकी हमलों को अंजाम दे चुका है। इसी वर्ष पुलवामा में आतंकी मसूद अजहर द्वारा प्रशिक्षित आतंकियों ने केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के काफिले पर बड़ा हमला करके भारत सरकार को चुनौती दी थी। हिम्मत देखिये कि इसकी जिम्मेदारी भी मसूद के संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। मसूद 2001 में संसद पर हुए हमले का भी दोषी है। इसके अलावा जनवरी 2016 में जैश के आतंकियों ने पंजाब के पठानकोट एयरबेस और इसी साल सितंबर में उरी में सेना के मुख्यालय पर हमला किया था।

मसूद अजहर वही आतंकी है जिसे कंधार विमान अपहरण मामले में छोड़ा गया था। भारत में कई बड़े आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद आखिरकार अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित हो चुका है। विश्व जगत में इस कदम को भारत की बड़ी जीत और पाकिस्तान की बड़ी हार के रुप में देखा जा रहा है। यह सर्वविदित है कि पाकिस्तान की ढाल बने चीन ने पिछले एक दशक में चार बार भरपूर प्रयास किया कि आतंकी सरगना मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित नहीं किया जाए। इसके लिए चीन ने वीटो पॉवर का भी अनावश्यक उपयोग किया, लेकिन भारत की वैश्विक कूटनीति के चलते पाकिस्तान और चीन को आड़े हाथ लिया जाने लगा, तब चीन अपनी जिद से पीछे हटा और संयुक्त राष्ट्र ने मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया। जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर के अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित होते ही उस पर वे तमाम प्रतिबंध स्वत: ही लागू हो गए, जो एक आतंकी पर होते हैं। पाकिस्तान में खुलेआम आतंकी प्रशिक्षण शिविरों का संचालन करने वाले मसूद अजहर को अब पाकिस्तान में भी प्रतिबंधित जीवन जीना होगा। लेकिन सवाल पाकिस्तान की नीयत का है कि वह मसूद अजहर के खिलाफ कितनी कठोरता से कार्रवाई करता है।  मात्र 240000/- में टोंक रोड जयपुर में प्लॉट 9314166166

पाकिस्तान की इमरान सरकार के बारे में कहा जाता है कि वह आतंकियों के सहयोग से बनी है। पाकिस्तान सरकार अब चाहते हुए भी मसूद के खिलाफ कार्रवाई करने से नहीं बच सकती। पाकिस्तान ने अगर मसूद के खिलाफ एक्शन नहीं किया तो दुनिया में अलग-थलग पड़ जाएगा। पहले से ही उसकी आर्थिक हालत डांवाडोल है। इससे पहले चीन ने चार बार भारत की कोशिशों को तकनीकी कारण बताकर रोका था। चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है। उसे वीटो पॉवर के इस्तेमाल का हक है। यह भी सच है कि चीन ने अपने अधिकारों का उपयोग हमेशा मसूद अजहर को बचाने में किया। 

यह सही है कि संयुक्त राष्ट्र ने किसी एक हमले के आधार पर उसे वैश्विक आतंकी घोषित नहीं किया। संयुक्त राष्ट्र समिति ने अजहर को अलकायदा के साथ संबंधों, आतंकी हमले की साजिश, उसके लिए फंड मुहैया व हथियार आपूर्ति करने, आतंकियों की भर्ती और आतंकी गतिविधियों से जुड़े रहने के चलते वैश्विक आतंकी घोषित किया। अब भले ही पाकिस्तान ने आतंकी मसूद अजहर के अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित होने पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगाए गए प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू करने का दावा तो जरूर किया है। लेकिन इस दावे के प्रतिफल पर दुनिया की नजर टिकी हुई है। ऐसे में मजबूरी में ही सही पाकिस्तान को दुनिया की कसौटी पर खरा उतरना होगा। 

जैश-ए-मोहम्मद सरगना अजहर मसूद को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करवाने के लिए भारत ने चार बार प्रयास किए। अंततः उसे चौथी बार के प्रयास में सफलता हाथ लगी है। इससे यही प्रमाणित होता है कि पूर्व के प्रयासों में भारत उतनी वजनदारी नहीं दिखा पाया, जितना दिखाना चाहिए था। पहली बार मनमोहन सरकार ने मुंबई हमले के बाद 2009 में अजहर मसूद के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पेश किया। दूसरी बार 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के बाद मोदी सरकार ने इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र में पेश किया। तीसरी बार 2017 में उड़ी में सेना के कैंप में हमले के बाद ये प्रस्ताव पेश किया गया। चौथी बार पुलवामा हमले के बाद पेश किया गया। हालांकि प्रतिबंध में जो कारण बताये गए हैं उसमें पुलवामा का जिक्र नहीं है। शायद ऐसा चीन ने अपनी झेंप मिटाने के लिए किया। 

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आतंकी मसूद अजहर अपने द्वारा प्रशिक्षित आतंकियों के माध्यम से भारत में 25 साल में 20 से ज्यादा बड़े आतंकी हमले किए। केवल इतना ही नहीं वह अपने मदरसों और आतंकी प्रशिक्षण शिविरों में भी भारत के विरोध में जहरीली भाषा का उपयोग भी करता रहा है। इसलिए वह भारत के लिए मोस्ट वांटेड की सूची में है। अब पाकिस्तान को मसूद अजहर को सजा दिलवाने का प्रयास भी करना चाहिए। नहीं तो यही समझा जाएगा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के अंतर्गत पाकिस्तान आतंकी मसूद अजहर के विरोध में ठोस कारवाई करने की मानसिकता में नहीं है। इससे पाकिस्तान की ही किरकिरी होगी।
 

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