संजीवनी टुडे

हर राज्य में हो एक- ’’तबादला मंत्रालय’’

डाॅ.विलास जोशी

संजीवनी टुडे 12-06-2019 14:51:00

लोकसभा चुनाव के नतीजे आते ही और आंचार संहिता हटते ही राज्य सरकारों द्वारा अपनी अपनी तबादला नीति जारी करना शुरू कर दिया है। कर्मचारी और अधिकारी इस नीति से आशंकित है कि ये तबादला नीति है या बदला नीति! यकीन मानिए, जून-जुलाई का महिना आते ही कर्मचारीगण इस तबादला नीति का इंतजार उसी प्रकार करते है,जैसे किसान पहली बारीश का।


लोकसभा चुनाव के नतीजे आते ही और आंचार संहिता हटते ही राज्य सरकारों द्वारा अपनी अपनी तबादला नीति जारी करना शुरू कर दिया है। कर्मचारी और अधिकारी इस नीति से आशंकित है कि ये ’तबादला’ नीति है या ’बदला’ नीति! यकीन मानिए, जून-जुलाई का महिना आते ही कर्मचारीगण  इस तबादला नीति का इंतजार उसी प्रकार करते है, जैसे किसान ’’पहली बारीश’’ का। व्यंग्यकारलोग इन तबादलों को एक नीति न मानते हुए ,उसे एक ’’उद्योग ’’ मानते है,जिसमें कई दलालों के वारे न्यारे हो जाते है। तबादलों का इतिहास गवाह है कि इस उद्योग मेे कभी घाटा नहीं होता,बल्कि  करोड़ों रूपयों का लाभ ही होता है।

कर्मचारीगण, तबादला होने की राह उसी प्रकार देखते है, जिस प्रकार एक विरहणी  सावन के महिने में परदेस गए अपने प्रियतम के आने की राह तकती  है। एक खबर के अनुसार आनेवाले दो-एक माह में करीब 50 हजार कर्मचारीे तबादलों के तहत इधर से उधर हो जाएंगे। मैं तो कहता हूं कि राज्य सरकारों को चाहिए कि वे अपने अपने राज्यों में एक’’ नया तबादला मंत्रालय’’ बनाए। तबादला मंत्रालय बनाने का एक फायदा यह है कि एक तरफ ’’दो असंतुष्ट विधायकों’’ को ’’केबिनेट तबादला मंत्री’’ औ दूसरे को ’’राज्य तबादला मंत्री’’ बनाया जा सकता है।यानी सत्ता पार्टी के दो असंतुष्ट विधायको की पूर्ण संतुष्टी।नया तबादला मंत्रायल बनाने के और भी दूसरे फायदे है।जैसे प्रदेश भर के विधायको को एक बड़ा काम मिल जाएगा। वे अपने चहेते कर्मचारियों की सूची बनाकर ’’तबादला मंत्रायल’’ को भिजवा सकेंगे, ताकि उनके तबादले उनके मनचाहे शहर/गांव में कराए जा सके। इस नए मंत्रायल के बनने का एक लाभ यह भी होगा कि जिन कर्मचारियों को तबादले का उपहार मिलेगा वे ,खुशी खुशी  सरकारी पार्टी के गुण गाएंगें। एक सच बताऊ, इसी तबादले के चक्कर में कभी कभी कर्मचारीगण  ’’दलालों’’ के शिकार हो जाते है, जो तबादले के नाम पर उनसे एक मोटी रकम ऐठ लेते है।फिर जिनको दलालों की सेवाएं नहीं मिलती, वे अपने मुहल्ले के छुटभैये नेताओं के चक्कर में पड़ कर उनके घर की पैरी के चक्क्र लगाते रहेते है। यदि सरकार एक तबादला मंत्रालय बना दे तो कर्मचारीगण ऐसी बहुत सी परेशानियों से बच जाएंगे।

यकीन माने तो कभी कभी सरकार तबादला नीति के बहाने उन कर्मचारियों से ’’बदला’’ लेने की नीति भी अपना लेती है, जो ’उनकी विपक्षी पार्टी के समर्थक’ रहे है। सत्ता की शह पाकर कुछ अधिकारी ऐसे कर्मचारियों को तबादला करने की धौंस देते हुए यह तक कहने को नहीं चूकते कि-’’ अब’तुम जरा ढंग से ही रहना, नहीं तो तुम्हारा तबादला ’’नस्कल प्रभावित क्षेत्रों’’ में करवा दुंगा, फिर वहां बैठकर तुम मुझे जिंदगी भर याद करते रहना’’।

 तबालते के बारे में एक मजेदार बात यह भी देखने को मिलती हैै कि जो कर्मचारी अपने मनचाहे स्थान पर तबादला करवाने के लिए आवेदन करते है, उनका तबादला होता ही नहीं है, जबकि जिन्होने कभी सोचा भी नहीं था कि उनका तबादला उनके मनचाहे स्थान पर हो जाएगा, उनके तबादले के आदेश बिना रूके आ जाते है। कुछ सरकारे चाहती है कि उनके अधिनस्त कर्मचारी उनके पार्टी की विचारधारा के अनुसार ही काम करे। ऐसे में यह  सवाल उठना स्वाभाविक ही है कि यह है कि क्या यह सोच  सही है? क्योंकि, हर एक कर्मचारी, एक इंसान भी है, और उसकी अपनी भी एक राजनीतिक सोच होती हैै। ऐसे में यदि उसका तबादला कर दिया जाए तो इस बात की क्या गारंटी है कि वह बदले हुए स्थान पर जाकर अपनी विचारधारा  बदलेगा ही?

’’तबादला नीति’’ ऐसी हो कि उससे कर्मचारियों को उसकी ’’पारिवारीक खुशियां’’ भी  नसीब हो। तबादला नीति,’’बदला नीति’’  कदापि नहीं होनी चाहिए। 

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