संजीवनी टुडे

अजी, सावन आया है और ये क्या कह रहा है?

डाॅ..विलास जोशी

संजीवनी टुडे 21-07-2019 14:28:00

सुबह हमारी गृहदेवी ने हमें नींद से जगाया, अजी, उठो। देखों, ’सावन’ आया है। मैंने लेटे लेटे ही कहा -’’इस साले सावन को भी आज ही आना था। देखो भागवान, सावन से कह दो कि तुम्हारे जीजाजी देर रात तक कार्यालय में काम करते रहते है,इसलिए अभी वे आराम कर रहे हैं।


सुबह हमारी गृहदेवी ने हमें नींद से जगाया, अजी, उठो। देखों, ’सावन’ आया है। मैंने लेटे लेटे ही कहा -’’इस साले सावन को भी आज ही आना था। देखो भागवान, सावन से कह दो कि तुम्हारे जीजाजी देर रात तक कार्यालय में काम करते रहते है,इसलिए अभी वे आराम कर रहे हैं। मैें अभी उठुंगा तो वह कहेगा- ’यार, जीजाजी, आज कार्यालय को मारो गोली, कोई ’मूवी’ देखने चलते है,फिर शाम को किसी बढ़िया से होटल में खाना-वाना खाकर वापस घर लोैटेंगे’’ (उस सावन के अंधे को तो मेरी जेब में हमेंशा पांच पांच सौ के नोट ही दिखते है), जबकि मैं ही जानता हूं कि महिने का अंतिम सप्ताह कैसे गुजरता हैं’’। 

हमारी श्रीमतीजी पुनः बोली-’’अजी, आपके साले साहब सावन नहीं, अरे वो सावन......’’  मैंने जमाई लेते हुए कहा-’’ अच्छा मकान मालिक  ’सावन सेठ’ आए हैं। उन्हे अपने ड्राइंग रूम में बिठाओ, चाय नास्ता कराओ और बातों के बिच बता दो कि बरसात शुरू हुए भी एक माह होगया है, लेकिन आपने हमारी टपकती छत दुरस्त नहीं करवाई। अगर मैं उनके सामने आऊंगा, तो वे मुझ से मकान भाड़ा मांगेगे। तुम उन्हे बातों बातों में जता दो कि अगर उन्होने छत की लिकेज  का काम शीघ्र  नहीं करवाया,तो हमें मजबूरन  वह काम किसी ये करवाना पड़़ेगा और उसकी मरम्मत का खर्च हम मकान भाड़े की राशि मेें से काटेंगे’’। तभी बीच में ही हमारी श्रीमतीजी बोली-’’ अरे वो मकान मालिक सावन सेठ नहीं, वो.......’’। मैंने रजाई मुँह पर ओढते हुए कहा-’’ अच्छा, तो ’सावनजी श्रवणजी किराने दुकान वाले’ आए हैं।अजी,तुम उनको इतना भर कह दो कि इस बार  पहली तारीख को आपका उधारी खाता पूरा चुकता कर दिया जाएगा। हां, उनको यह भी कह देना कि आपने ’’वर्षा’’ की शादी पर हमें नहीं बुलाया, इसलिए हम आप पर नाराज है’’।

अब के हमारी पत्नी झल्लाकर बोली-’’अजी पतिदेवजी, ये वे सावन नहीं है। मैं अंगड़ाई लेने की कोशिस में रजाई में ही कसमसाकर रह गया और अपने उनींदे ज्ञान चक्षु पर जोर देकर बोला-’’अरी भागवान, तो ऐसा कहो ना कि तुम्हारे कार्यालयीन सहपाठी  ’सावनकुमार जी’ आए है। अजी, ऐसा करो कि उनको कह दो कि आज मैं उनके साथ सुबह की सैर के लिए नहीं जा सकुंगा, क्योंकि मुझे हमारे कार्यालय में जल्दी पहुंचना हैं’’। मेरी यह बात सुनकर हमारी सात फेरे वाली को बहुत गुस्सा आ गया और वह बोली-’’ अजी तुम मुझे बोलने भी दोगे या नहीं, कि अपनी ही डफली बजाते रहोगे। मैं तो सवान का महिना पवन करे सौर वाले सावन की बात कर रही हूं। श्रीमतीजी की बात सुनते ही मैं बिस्तर के बाहर आ गया और मैंने अपने मोबाइल पर वाट्स्एप खोला तो देखा, ढेर सारे भाई लोगों ने ढेर सारी पोस्ट सावन आने की डाल रखी थी। वे पास्ट देखकर  मुझे लगा शायद जितना सावन वाट्सएप की पोस्ट में आया हुआ है ,उतना तो आसमान छाए सावन के  बादलों मेें भी नजर नहीं आ रहे है। जब मेैं नहाने के लिए बाथरूम में गया, तब कहीं दूर से इस गीत की पंक्तियां सुनाई पड़ रही थी-’’कुछ कहता है ये सावन, क्या कहता है, सावन के झुले पडे़ तुम चलो आओ’’।

More From editorial

Trending Now
Recommended